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कानपुर: शादी अनुदान के एक और फर्जी आवेदक पर रिपोर्ट, समाज कल्याण अधिकारी ने खुद शुरू कराई 400 आवेदनों की जांच
Sun, 21 Feb 2021 02:51 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 21 Feb 2021 02:51 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
शादी अनुदान के एक और फर्जी आवेदक श्यामनगर निवासी ओम प्रकाश दीक्षित के खिलाफ शनिवार को रिपोर्ट दर्ज की गई है। जिस बेटी के नाम आवेदन किया गया था, जांच में वह उनकी बेटी ही नहीं निकली। यह कार्रवाई जिलाधिकारी आलोक तिवारी के निर्देश पर समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह ने की है।
इसके पहले शुक्रवार को बर्रा-8 निवासी दंपति प्रदीप कुमार और रजनी शर्मा पर रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी है। पति-पत्नी होने के बाद भी इन लोगों ने अलग-अलग बेटियों के नाम से आवेदन किए थे। इन तीन आवेदनों में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 23 और मामलों की जांच की गई। इसकी रिपोर्ट शनिवार को सीडीओ को सौंप दी गई है। इनमें भी कई आवेदन फर्जी पाए गए हैं। जल्द कार्रवाई की जाएगी। वहीं पारिवारिक लाभ, छात्रवृत्ति योजना की जांच अभी चल रही है।
समाज कल्याण अधिकारी ने खुद शुरू कराई 400 आवेदनों की जांच
फर्जी आवेदन बगैर समाज कल्याण विभाग की मिलीभगत के स्वीकृति तक नहीं पहुंच सकते। 26 आवेदनों की फाइल पैसे स्वीकृत होने के लिए ऊपर तक पहुंच गई थी। रैंडम जांच में तीन मामले फर्जी पाए जाने पर पूरा खेल सामने आया। सूत्रों के अनुसार खुद को बचाने के लिए समाज कल्याण अधिकारी ने विभागीय कर्मचारियों को लगाकर 400 शादी अनुदान के आवेदनों की जांच शुरू कराई है। उधर वृद्धावस्था के नए आवेदनों को फिर से तहसील जांच कराने के लिए भेजा गया है।
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एक साल पुराने आवेदनों की होगी जांच
सीडीओ डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कि जिस तरह से शादी अनुदान की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। इससे लगता है कि यह खेल कोई नया नहीं है। इसमें विभाग की भी मिलीभगत है। एक वर्ष पहले तक योजना का लाभ पाने वालों की जांच कराई जाएगी। जल्द टीम गठित की जाएगी। वहीं 85 और मामले फर्जी पाए गए हैं। जांच कराकर सभी पर कार्रवाई की जाएगी।
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इसके पहले शुक्रवार को बर्रा-8 निवासी दंपति प्रदीप कुमार और रजनी शर्मा पर रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी है। पति-पत्नी होने के बाद भी इन लोगों ने अलग-अलग बेटियों के नाम से आवेदन किए थे। इन तीन आवेदनों में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 23 और मामलों की जांच की गई। इसकी रिपोर्ट शनिवार को सीडीओ को सौंप दी गई है। इनमें भी कई आवेदन फर्जी पाए गए हैं। जल्द कार्रवाई की जाएगी। वहीं पारिवारिक लाभ, छात्रवृत्ति योजना की जांच अभी चल रही है।
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समाज कल्याण अधिकारी ने खुद शुरू कराई 400 आवेदनों की जांच
फर्जी आवेदन बगैर समाज कल्याण विभाग की मिलीभगत के स्वीकृति तक नहीं पहुंच सकते। 26 आवेदनों की फाइल पैसे स्वीकृत होने के लिए ऊपर तक पहुंच गई थी। रैंडम जांच में तीन मामले फर्जी पाए जाने पर पूरा खेल सामने आया। सूत्रों के अनुसार खुद को बचाने के लिए समाज कल्याण अधिकारी ने विभागीय कर्मचारियों को लगाकर 400 शादी अनुदान के आवेदनों की जांच शुरू कराई है। उधर वृद्धावस्था के नए आवेदनों को फिर से तहसील जांच कराने के लिए भेजा गया है।
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एक साल पुराने आवेदनों की होगी जांच
सीडीओ डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कि जिस तरह से शादी अनुदान की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। इससे लगता है कि यह खेल कोई नया नहीं है। इसमें विभाग की भी मिलीभगत है। एक वर्ष पहले तक योजना का लाभ पाने वालों की जांच कराई जाएगी। जल्द टीम गठित की जाएगी। वहीं 85 और मामले फर्जी पाए गए हैं। जांच कराकर सभी पर कार्रवाई की जाएगी।