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धर्मांतरण: एसआईटी की गिरफ्त से दूर मास्टरमाइंड

Wed, 14 Jan 2026 11:50 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 11:50 PM IST
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Religious conversion: The mastermind remains at large, evading the SIT.
कन्नौज। कानपुर मंडल समेत छह जिलों में बड़े पैमाने पर हुए धर्मांतरण के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है। आंध्र प्रदेश की नवाकांति सोसायटी से जुड़ा डेविड नामक युवक रैकेट का सरगना बताया जा रहा है जो अभी पुलिस की पकड़ से दूर है। पुलिस का अनुमान है कि कोरोना महामारी के बाद से इन जिलों में एक हजार लोगों ने धर्म परिवर्तन किया है।
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एसआईटी की जांच में सामने आया है कि कानपुर का डेविड ही कन्नौज, औरैया, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद और शाहजहांपुर जैसे जिलों में धर्मांतरण कराने का मुख्य ठेकेदार है। यह गिरोह विशेष रूप से कोरोना काल के बाद से सक्रिय हुआ है। इसका कारण था कि लोगों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का कमजोर होना। ऐसे समय में प्रलोभन देकर या दबाव बनाकर धर्म परिवर्तन कराने का खेल खेला गया। डेविड की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे नेटवर्क की जड़ें उखाड़ने की उम्मीद है। इस मामले में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है पर मुख्य आरोपी डेविड फरार है।
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हाल ही में करसाह गांव में धर्मांतरण का एक मामला सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों पन्नालाल, विद्यासागर और उमाशंकर दोहरे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह गिरफ्तारी एसआईटी की जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुई है। पुलिस और एसआईटी का मानना है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के पीछे कई गंभीर मंशाएं हो सकती हैं। इसमें सामाजिक और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने के साथ-साथ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने की आशंका भी जताई जा रही है।
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आंध्र प्रदेश से जुड़ाव व विदेशी फंडिंग की हो रही जांच
एसआईटी में शामिल इंस्पेक्टर कपिल दुबे के मुताबिक अब डेविड के ठिकानों और उसके संपर्कों का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। आंध्र प्रदेश से उसके जुड़ाव और विदेशी फंडिंग की भी गहराई से जांच की जा रही है। यह जांच कई राज्यों में फैली हो सकती है जिससे एसआईटी के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। एसपी विनोद कुमार ने बताया कि एसआईटी अपना काम कर रही है। जल्द ही मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और मामले का खुलासा किया जाएगा।


केस : एक
बेटे की बीमारी से परेशान मां को किया मजबूर
गुरसहायगंज कोतवाली के इस्माइलपुर गांव में एक बच्चे को असाध्य बीमारी थी। डॉक्टरों ने जवाब दे दिया तो उसकी मां प्रार्थना सभा में गई, जहां पादरी ने ठीक करने का आश्वासन दिया और आर्थिक मदद की। इसके बाद उसे ईसाई धर्म अपनाने को मजबूर किया गया। महिला को हिंदू देवी-देवताओं की पूजा न करने की सलाह दी गई। इस पर महिला ने पुलिस से शिकायत कर दी। इसके बाद धर्मांतरण के खेल का पता चला।
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केस : दो
आस्था पर उठाए सवाल तो हिंदूवादी संगठनों को बताया
ठठिया क्षेत्र के करसाह गांव में प्रार्थना सभा में पड़ोस के एक गांव का अनुसूचित जाति का युवक गया तो वहां लोगों को दवा पिलाई जा रही थी और बाइबिल के उपदेश सुनाए जा रहे थे। हिंदू मान्यताओं और उनकी आस्था को गलत बताया गया। यह बात उस युवक को नगवार गुजरी। उसने अपने दोस्त हिंदूवादी संगठन के नेता अन्नू बाबा को बताई तो उसने टीम के साथ करसाह में छापा मारा और इस तरह यहां भी धर्मांतरण की पोल खुल गई।

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पुलिस ने दबाया तो सोशल मीडिया ने उठाया
धर्मांतरण के दोनों मामलों में पुलिस की भूमिका लचर रही। करसाह गांव में जब हिंदूवादी संगठनों ने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए तो एसपी समेत पुलिस के सभी अधिकारी मौके पर गए। पुलिस ने शुरुआत में मामले को दबाने की कोशिश की। जब चारों तरफ विरोध के स्वर उठने लगे और शासन के संज्ञान में मामला आया, तब जाकर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और आरोपी पन्नालाल, विद्यासागर व उमाशंकर को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस भी मान रही है कि कोरोना काल से लेकर अब तक हजारों लोगों का धर्मांतरण किया जा चुका है।
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