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कानपुर: पेट्रोलियम तेल रिसाइकलिंग सप्लायर फर्म पर छापा, जांच में 1.40 करोड़ की कर चोरी मिली, 65 लाख जमा कराए
Tue, 29 Sep 2026 11:37 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 29 Sep 2026 11:37 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
उपयोग में आ चुके पेट्रोलियम तेल की रिसाइकलिंग के कारोबार से जुड़ी फर्म के प्रतिष्ठानों पर छापे में 1.40 करोड़ रुपये की कर चोरी मिली है। 10 घंटे चली जांच के बाद कारोबारी ने 65 लाख रुपये जमा कराए हैं। पंजीकरण रद्द हो चुकी फर्मों से खरीद-फरोख्त कर लाखों रुपये की आईटीसी का लाभ लेने का मामला भी सामने आया है। इससे जांच का दायरा बढ़ गया है। छापा खत्म होने के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है।
एसजीएसटी के अफसरों की दो टीमों ने सोमवार को सचेंडी और विजयनगर स्थित के एक्सपोर्ट के ठिकानों पर छापा मारा था। अधिकारियों ने रात करीब 12 बजे तक जांच की। बताया गया कि फर्म लंबे समय से इस्तेमाल किए जा चुके पेट्रोलियम तेल को एकत्र कर रिसाइकलिंग करती है। इससे ग्रीस और अलग-अलग प्रकार की मशीनों के लिए प्रॉसेस करके तेल तैयार किया जाता है। फर्म का कारोबार अच्छा होने के बावजूद कर कम आ रहा था। डाटा एनालिसिस में पंजीकरण रद्द हो चुकी बोगस फर्मों के जरिये आईटीसी में गड़बड़ी का इनपुट मिला था। इसी आधार पर छापा मारा गया।
जांच में पता चला कि आईटीसी का लाभ लेने के लिए पंजीकरण रद्द वाली फर्मों से खरीद-बिक्री दिखाई गई और इसके जरिये 40 लाख रुपये से अधिक की आईटीसी रिवर्सल की गई। जांच के दौरान खरीद-बिक्री, बिल, लेनदेन और कर संबंधी अभिलेखों की जांच की गई। संयुक्त आयुक्त एसआईबी ज्ञान प्रकाश सिंह ने बताया कि अपर आयुक्त ग्रेड दो एसआईबी प्रशांत कुमार के निर्देश पर डिप्टी कमिश्नर एसआईबी अभिषेक चतुर्वेदी ने कार्रवाई की। छापा खत्म कर दिया गया है। 65 लाख रुपये डीआरसी तीन के जरिये जमा कराए गए हैं। आगे की जांच जारी है और इससे अधिक रकम जमा होने की संभावना है।
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एसजीएसटी के अफसरों की दो टीमों ने सोमवार को सचेंडी और विजयनगर स्थित के एक्सपोर्ट के ठिकानों पर छापा मारा था। अधिकारियों ने रात करीब 12 बजे तक जांच की। बताया गया कि फर्म लंबे समय से इस्तेमाल किए जा चुके पेट्रोलियम तेल को एकत्र कर रिसाइकलिंग करती है। इससे ग्रीस और अलग-अलग प्रकार की मशीनों के लिए प्रॉसेस करके तेल तैयार किया जाता है। फर्म का कारोबार अच्छा होने के बावजूद कर कम आ रहा था। डाटा एनालिसिस में पंजीकरण रद्द हो चुकी बोगस फर्मों के जरिये आईटीसी में गड़बड़ी का इनपुट मिला था। इसी आधार पर छापा मारा गया।
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जांच में पता चला कि आईटीसी का लाभ लेने के लिए पंजीकरण रद्द वाली फर्मों से खरीद-बिक्री दिखाई गई और इसके जरिये 40 लाख रुपये से अधिक की आईटीसी रिवर्सल की गई। जांच के दौरान खरीद-बिक्री, बिल, लेनदेन और कर संबंधी अभिलेखों की जांच की गई। संयुक्त आयुक्त एसआईबी ज्ञान प्रकाश सिंह ने बताया कि अपर आयुक्त ग्रेड दो एसआईबी प्रशांत कुमार के निर्देश पर डिप्टी कमिश्नर एसआईबी अभिषेक चतुर्वेदी ने कार्रवाई की। छापा खत्म कर दिया गया है। 65 लाख रुपये डीआरसी तीन के जरिये जमा कराए गए हैं। आगे की जांच जारी है और इससे अधिक रकम जमा होने की संभावना है।
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