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यूनिवर्सिटी के रेग्युलर एग्जाम दो मार्च से
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 13 Jan 2015 03:18 AM IST
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छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी के रेग्युलर एग्जाम 2 मार्च से शुरू होंगे। सोमवार को परीक्षा समिति ने बैठक में इस पर मुहर लगाते हुए रेग्युलर एग्जाम 2014-15 का विस्तृत शेड्यूल जारी कर दिया है।
शेड्यूल जल्द ही वेबसाइट www.kanpuruniversity.org पर उपलब्ध करा दिया जाएगा। बीए, बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी और एमकॉम के सारे एग्जाम 22 अप्रैल 2015 तक संपन्न हो जाएंगे। एग्जाम में कानपुर नगर, कानपुर देहात सहित प्रदेश के 15 जिलों के 10 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स शामिल होंगे।
यूनिवर्सिटी के एकेडमिक भवन सभागार में हुई मीटिंग में कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन की अध्यक्षता वाली परीक्षा समिति ने बीलिब, एमलिब, बीएससी बायोटेक, एलएलबी फर्स्ट ईयर और एलएलबी सेकेंड ईयर के एग्जाम का शेड्यूल भी फाइनल कर दिया है।
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बीए के छात्र अनुग्रह प्रताप सिंह को वायवा देने की अनुमति मिल गई है। मीटिंग में रजिस्ट्रार सैय्यद वकार हुसैन, परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर यादव, कूटा अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह, महामंत्री डॉ. देवेंद्र अवस्थी और असिस्टेंट रजिस्ट्रार राकेश कुमार मौजूद रहे।
जहां टीचर नहीं वहां बंद होंगे प्रवेश
समिति ने बताया कि जिस कॉलेज में प्रिंसिपल, टीचर नहीं हैं, उन्हें परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा। संबंधित कॉलेज की परीक्षा पास के राजकीय, अनुदानित या फिर सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में कराई जाएगी।
ऐसे कॉलेजों की एडमिशन प्रक्रिया जुलाई 2015 से बंद की जाएगी। परीक्षा समिति का कहना है कि जिन कॉलेजों में स्टूडेंट्स की संख्या 100 से कम है, उन्हें भी परीक्षा केंद्र की सूची से बाहर रखा जाएगा।
परीक्षक को देना होगा जवाब
प्रैक्टिकल एग्जाम और वायवा में 75 फीसदी से ज्यादा मार्क्स देने वाले शिक्षकों की जवाबदेही तय कर दी गई है। परीक्षा समिति ने कहा है कि जो टीचर ज्यादा मार्क्स देंगे, उन्हें बताना होगा कि प्रोजेक्ट पर कितने मार्क्स दिए।
कितने सरल और कितने कठिन सवाल पूछे हैं। इस व्यवस्था से प्रैक्टिकल में मनमाना मार्क्स देने का मामला कम होगा। जबकि अभी प्रैक्टिकल में 90-90 फीसदी तक मार्क्स दिए जाते हैं।
वित्त समिति तय करेगी सत्यापन फीस
यूनिवर्सिटी में शैक्षिक दस्तावेजों के सत्यापन की फीस निर्धारित करने का अधिकार अब वित्त समिति को दे दिया गया है। जो प्रस्ताव बना है, उसके मुताबिक सत्यापन की फीस 1000 रुपये तक की जा सकती है।
कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सत्यापन फीस तय करने का प्रस्ताव बनाकर वित्त समिति के पास भेज दिया गया है। जल्द ही वित्त समिति की मीटिंग होगी और सत्यापन फीस निर्धारित कर दी जाएगी। यह फीस तय होना जरूरी है।
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शेड्यूल जल्द ही वेबसाइट www.kanpuruniversity.org पर उपलब्ध करा दिया जाएगा। बीए, बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी और एमकॉम के सारे एग्जाम 22 अप्रैल 2015 तक संपन्न हो जाएंगे। एग्जाम में कानपुर नगर, कानपुर देहात सहित प्रदेश के 15 जिलों के 10 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स शामिल होंगे।
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यूनिवर्सिटी के एकेडमिक भवन सभागार में हुई मीटिंग में कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन की अध्यक्षता वाली परीक्षा समिति ने बीलिब, एमलिब, बीएससी बायोटेक, एलएलबी फर्स्ट ईयर और एलएलबी सेकेंड ईयर के एग्जाम का शेड्यूल भी फाइनल कर दिया है।
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बीए के छात्र अनुग्रह प्रताप सिंह को वायवा देने की अनुमति मिल गई है। मीटिंग में रजिस्ट्रार सैय्यद वकार हुसैन, परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर यादव, कूटा अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह, महामंत्री डॉ. देवेंद्र अवस्थी और असिस्टेंट रजिस्ट्रार राकेश कुमार मौजूद रहे।
जहां टीचर नहीं वहां बंद होंगे प्रवेश
समिति ने बताया कि जिस कॉलेज में प्रिंसिपल, टीचर नहीं हैं, उन्हें परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा। संबंधित कॉलेज की परीक्षा पास के राजकीय, अनुदानित या फिर सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में कराई जाएगी।
ऐसे कॉलेजों की एडमिशन प्रक्रिया जुलाई 2015 से बंद की जाएगी। परीक्षा समिति का कहना है कि जिन कॉलेजों में स्टूडेंट्स की संख्या 100 से कम है, उन्हें भी परीक्षा केंद्र की सूची से बाहर रखा जाएगा।
परीक्षक को देना होगा जवाब
प्रैक्टिकल एग्जाम और वायवा में 75 फीसदी से ज्यादा मार्क्स देने वाले शिक्षकों की जवाबदेही तय कर दी गई है। परीक्षा समिति ने कहा है कि जो टीचर ज्यादा मार्क्स देंगे, उन्हें बताना होगा कि प्रोजेक्ट पर कितने मार्क्स दिए।
कितने सरल और कितने कठिन सवाल पूछे हैं। इस व्यवस्था से प्रैक्टिकल में मनमाना मार्क्स देने का मामला कम होगा। जबकि अभी प्रैक्टिकल में 90-90 फीसदी तक मार्क्स दिए जाते हैं।
वित्त समिति तय करेगी सत्यापन फीस
यूनिवर्सिटी में शैक्षिक दस्तावेजों के सत्यापन की फीस निर्धारित करने का अधिकार अब वित्त समिति को दे दिया गया है। जो प्रस्ताव बना है, उसके मुताबिक सत्यापन की फीस 1000 रुपये तक की जा सकती है।
कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सत्यापन फीस तय करने का प्रस्ताव बनाकर वित्त समिति के पास भेज दिया गया है। जल्द ही वित्त समिति की मीटिंग होगी और सत्यापन फीस निर्धारित कर दी जाएगी। यह फीस तय होना जरूरी है।