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डीजीक्यूए में भर्ती घोटाला: बर्खास्त हो सकते हैं फर्जीवाड़ा कर भर्ती हुए क्लर्क, लटकी कार्रवाई की तलवार

Fri, 15 Jan 2021 06:31 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 15 Jan 2021 06:31 PM IST
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Recruitment scam in DGQA: Clerks recruited by forgery can be dismissed
घोटाला - फोटो : amar ujala
कानपुर कैंट स्थित डायरेक्टर जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस (डीजीक्यूए) कांप्लेक्स के सामान्य वस्तु नियंत्रणालय में 2016 में फर्जीवाड़ा कर भर्ती हुए छह क्लर्कों की दोबारा बर्खास्तगी हो सकती है। सीबीआई की ओर से सभी क्लर्कों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद इन पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
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दरअसल महानिदेशक की जांच में फर्जीवाड़े के साक्ष्य मिलने के बाद सभी छह क्लर्कों को बर्खास्त कर दिया गया था लेकिन ऑफिसर्स बोर्ड के चेयरमैन डॉ. संतोष तिवारी पर कार्रवाई नहीं हुई थी। वहीं सभी क्लर्क सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) स्टे ले आए थे और नौकरी कर रहे हैं। डीजीक्यूए के निर्देशों के तहत विभाग के तत्कालीन नियंत्रक देवकीनंदन ने छह क्लर्कों की नियुक्ति के लिए आदेश जारी कर वरिष्ठ अधिकारी डॉ. संतोष तिवारी को भर्ती बोर्ड का चेयरमैन बनाया था।
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परीक्षा में सफल होने के बाद भी नियुक्ति न होने की शिकायत अभ्यर्थियों ने तत्कालीन रक्षा मंत्री, डीजीक्यूए के अफसरों से की थी। आरोप थे कि चेयरमैन ने विभाग के ही आफिस अधीक्षक एवं डीजीक्यूए सलाहकार समिति के सदस्य एचएन तिवारी से मिलकर लाखों रुपये लेकर रिश्तेदारों को कम नंबर होने के बाद भी भर्ती कर लिया है।
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तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर परिकर ने जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद तत्कालीन महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह ने जांच कराई थी। इसमें भी आरोप सही पाए गए थे। सीबीआई ने भी आरोप सही पाए जाने पर चेयरमैन के अलावा छह क्लर्कों के खिलाफ साजिश रचना, धोखाधड़ी और कूट रचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
 

अधिवक्ता अमित राठौर के मुताबिक महानिदेशक की जांच में पहले ही फर्जीवाड़ा पुष्ट हो चुका है, अब सीबीआई ने भी पुष्टि करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है। ऐसे में इनकी बर्खास्तगी फिर से हो सकती है। हालांकि आरोपों के आधार पर इस पर निर्णय कोर्ट को लेना है। उधर रक्षा मंत्रालय ने भी रिपोर्ट तलब की है। अपने स्तर पर जांच कमेटी बना सकता है। 

मामला उठाने वाले का कर दिया गया था तबादला
इस मामले की शिकायत डीजीक्यूए में तैनात एक क्लर्क ने की थी। उसका कुछ महीने पहले सेंट्रल प्रूफ रेंज इटारसी तबादला कर दिया गया था। जिन पर आरोप थे, वे सभी लंबे समय से जमे हैं। 

इंटक नेता पर कस सकता है शिकंजा
सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने अपनी जांच में डीजीक्यूए सलाहकार समिति के सदस्य एचएन तिवारी (इंटक के प्रदेश महामंत्री) की भूमिका भी संदिग्ध पाई है। इन्होंने अपने दामाद रविकांत पांडेय का चयन कराया है। सूत्रों के अनुसार डीजीक्यूए में पहले हुई भर्तियों की फाइल भी खोली जा सकती है। जिन लोगों का चयन किया गया है, इनके रिश्तेदार रक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित अलग-अलग विभागों में बड़े पदों पर हैं। 

कई पर हो सकती है कार्रवाई
सीबीआई की ओर से आरोपियों के खिलाफ 22 दिसंबर को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। एंटी करप्शन, विजिलेंस को भी रिपोर्ट भेजी गई है। ये विभाग भी जल्द जांच-पड़ताल शुरू कर सकते हैं। सीबीआई आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ भी कर सकती है। कुछ पूर्व और वर्तमान अफसरों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
 
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