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Kanpur: उपायुक्त उद्योग के निलंबन की संस्तुति, विशेष सचिव प्रशांत शर्मा बने जांच अधिकारी, फाइलों की जांच शुरू

Fri, 02 Sep 2022 12:07 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 02 Sep 2022 12:07 PM IST
सार

उपायुक्त उद्योग राजेश सिंह यादव की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। प्रशासन ने उनसे जुड़े सभी कामों की फाइलें तलब की हैं। इसके लिए जांच कमेटी भी गठित की गई है, जिसमें विशेष सचिव एमएसएमई प्रशांत शर्मा जांच अधिकारी बनाए गए हैं।
 

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Recommendation of suspension of Deputy Commissioner Industries in kanpur
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर में विश्वकर्मा श्रम सम्मान और एक जिला एक उत्पाद योजना की टूल किट खरीद फर्जीवाड़े में नाम आने के बाद उपायुक्त उद्योग राजेश सिंह यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। महीनों से गायब उपायुक्त उद्योग के निलंबन की संस्तुति करते हुए शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है।  इसके साथ ही शासन स्तर से भी जांच शुरू हो गई है। विशेष सचिव एमएसएमई प्रशांत शर्मा को जांच अधिकारी बनाया गया है। उपायुक्त उद्योग के सभी कामों से जुड़ी फाइलों की जांच शुरू कर दी गई है। 

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विभागीय टीम भी बना दी गई। सूत्रों के अनुसार राजेश सिंह यादव कानपुर में लंबे समय से तैनात हैं। उनके पास उप्र ट्रेड प्रमोशन अथॉरिटी, औद्योगिक अस्थान, कार्मिक जैसे महत्वपूर्ण सेक्शनों की जिम्मेदारी थी। विश्वकर्मा श्रम सम्मान समेत अन्य महत्वपूर्ण काम भी देखते रहे हैं। अब योजनाओं में फर्जीवाड़ा में इनका नाम सामने आने के बाद विभागीय के अलावा शासन स्तर से जांच शुरू कर दी गई है। शासन स्तर के अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध है। मौजूदा समय में वे छुट्टी पर चल रहे हैं।

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जबरन किए जा सकते हैं सेवानिवृत्त, आय से अधिक संपत्ति का भी मामला बन सकता
17 जून को लखनऊ आयकर की टीमों ने गोल्डन बास्केट फर्म के संचालक अंचित मगलानी, प्रतिभा यादव के आर्य नगर स्थित कार्यालय, गोदाम और दो अन्य प्रतिष्ठानों पर छापा मारा था। अंचित से मिले लिंक के आधार पर 18 जून को उपायुक्त उद्योग राजेश यादव के घर पर छापा मारा गया था।

इनके यहां 10 से ज्यादा प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले थे। इसके बाद से जांच जारी है। ये संपत्तियां परिवारीजनों के नाम खरीदी गईं। अब दस्तावेज बेनामी विंग भेजे जाएंगे। आय से अधिक संपत्ति होने के सबूत भी मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि जांच के बाद उपायुक्त उद्योग को जबरन सेवानिवृत्त भी दी जा सकती है।

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मोबाइल ने खोले थे राज, कई अफसरों को देता था काली कमाई
अंचित के यहां कार्रवाई के बाद आयकर अफसरों ने उपायुक्त उद्योग के कंपनी बाग चौराहा स्थित बंगले पर छापा मारा था। उनका मोबाइल भी जब्त किया था। मोबाइल चैटिंग से पता चला था कि राजेश सिंह यादव कई अफसरों के साथ मिलकर सरकारी धन का बंदरबांट करने में लगा था। अंचित के परिजनों के नाम पर बनी छह फर्मों के जरिये कागजों पर टूल किट खरीदी जा रही थी।

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