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Kanpur News: जिस जिले में करोड़ों की संपत्ति बनाई वहीं फिर से तैनाती

Sun, 05 Oct 2025 12:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 05 Oct 2025 12:12 AM IST
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Re-posting in the same district where property worth crores was made
कानपुर। सदर तहसील में 22 साल तक तैनात रहने वाले कानून गो आलोक दुबे को करोड़ों की संपत्ति बनाने के मामले में फिर से मूल पद लेखपाल पर भेजा गया है। यहां भी अधिकारियों ने उस पर मेहरबानी दिखाई है। उसे बिल्हाैर तहसील भेजा गया है। आलोक ने लेखपाल के पद पर रहकर ही संचेंडी क्षेत्र के दूल और रौतपुर गांव में जमीनों की खरीद-बिक्री की। उच्च अधिकारियों ने एक बार फिर से जिले में ही तैनाती दे दी।
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अधिवक्ता संदीप सिंह की शिकायत के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने जांच कराई तो फर्जी प्रपत्रों से जमीन बेचने में कानून गो आलोक दुबे और लेखपाल अरुणा द्विवेदी का नाम सामने आया था। फरवरी 2025 में दोनों को निलंबित कर दिया था। पूरी जांच के लिए जिलाधिकारी ने एडीएम न्यायिक, एसडीएम सदर, और एसीपी कोतवाली को नामित किया था। छह माह बाद सितंबर में कानूनगो आलोक दुबे को बहाल कर दिया गया लेकिन महिला लेखपाल को बहाल नहीं किया गया। कानूनगो के बहाली की फाइल के साथ जांच रिपोर्ट भी जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह से समक्ष प्रस्तुत की गई जिसमें करीब 41 संपत्तियां आलोक व परिजनों के नाम पर होने का खुलासा हुआ। जिलाधिकारी ने नियमों के विरुद्ध जमीन खरीदने और मनमानी करने का आरोपी मानकर दंड में पदावनत कर लेखपाल बना दिया। यानी जिस पद से एक वर्ष पहले पदोन्नति हुई थी वापस उसी पद पर तैनाती दे दी गई।
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कल्याणपुर में निवास बिल्हौर में तैनाती

सूत्रों ने बताया कि आलोक कल्याणपुर क्षेत्र में रहता है। अफसरों की मेहरबानी के कारण उसकी तैनाती बिल्हौर तहसील में दी गई है। यानी बहाली से लेकर तैनाती देने तक अफसरों की पूरी कृपा रही। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब उच्च अधिकारियों को आलोक के कारनामे का पता चल गया तो जिले में ही तैनाती क्यों दी गई? मंडल के किसी अन्य जिले में भी तैनाती दी जा सकती थी।
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पदोन्नति के दो माह बाद सदर में करा ली थी तैनाती
जिले में बैठे उच्च अधिकारियों का संरक्षण आलोक पर पूरी तरह से था। वर्ष 2024 में लेखपाल से पदोन्नति होकर कानून गो बना था। इसकी तैनाती नर्वल तहसील में की गई थी। करीब दो माह बाद फिर से अपनी तैनाती सदर तहसील में करा ली थी। कैंट क्षेत्र का प्रभार दिया गया था।




कार्रवाई के नाम पर पदावनत बड़ा दंड है जो उसको दिया गया है। इसके अलावा जिलाधिकारी की तरफ से एंटी करप्शन टीम को जांच करने के लिए पत्र लिखा गया है। टीम जांच कर कार्रवाई करेगी। - विवेक चतुर्वेदी, एडीएम वित्त
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