क्लोन चेक के जरिये होने वाले फ्रॉड को रोकने के लिए आरबीआई ने बैंकों को इसी सप्ताह नए निर्देश जारी किए हैं। इसमें बियरर (धारक) चेक से होने वाले भुगतान पर भी कड़ी नजर रखने को कहा गया है। संदिग्ध लगने पर चेक को अल्ट्रावायलेट लैब से भी गुजारने के निर्देश दिए हैं।
आरबीआई से जुड़े सूत्रों ने बताया पिछले जून से लेकर चेक फ्रॉड के अब तक 13 मामले प्रकाश में आ चुके हैं। क्लोन चेकों से एसबीआई की हंसपुरम शाखा में 25 हजार, मेडिकल कॉलेज शाखा में 49 हजार, रतनलाल नगर शाखा में 48 हजार, विनोबा नगर शाखा में 30 हजार, पीरोड शाखा में 40 हजार, गोपाल नगर स्थित शाखा में 50 हजार, मोतीझील और शारदानगर शाखा में 48-48 हजार और पांडु नगर स्थित शाखा में 45 हजार, आवास-विकास परिषद एक नंबर शाखा से 46 हजार रुपये निकलने का मामले सामने आए थे।
इन सभी में चेक फ्रॉड के मॉड्यूल में कुछ समानताएं मिली हैं जैसे इन सभी चेक में भुगतान बियरर (धारक) चेक से हुआ है। इस चेक के होने पर धारक से बैंक कर्मी द्वारा भुगतान के संबंध में कोई भी पूछताछ नहीं की जाती है। शातिरों ने आर्डर वाली सामान्य चेक को बियरर चेक बना लिया और भुगतान ले लिया। जिनके साथ फ्रॉड हुआ, उनके पास आर्डर वाली चेक थी। आर्डर चेक लगाने वाले से उसकी पहचान के लिए प्रमाण पत्र जैसे आधार नंबर या फिर पैन नंबर आने के बाद ही भुगतान होता है।
यह होती है चेक बियरर और आर्डर
बियरर (धारक) चेक बैंक के माध्यम से खाताधारक को उपलब्ध कराई जाती है। इस चेक को खाते में लगाने पर संबंधित से किसी भी प्रकार की पूछताछ मसलन किसने चेक दी, कौन लेने आया आदि पूछताछ नहीं की जाती है। चेक में दायें तरफ बियरर चेक लिखा होता है। जबकि आर्डर चेक में किसी दूसरे या तीसरे को भुगतान की बात होती है। जब यह चेक बैंक में लगाया जाता है तो लगाने वाले व्यक्ति से बैंक कर्मचारी चेक कैसे मिला, किसने दिया संबंधित का पूरा ब्योरा लेता है।
क्या होती है अल्ट्रावायलेट (यूवी) लैब
यह एक प्रकार की मशीन होती है जिसमें अल्ट्रावायलेट (यूवी) किरणों के जरिये क्लोन या सही चेक की पहचान की जाती है। जब यूवी किरणें चेक पर डाला जाती हैं तो बैंक के लोगो आदि चमकने लगते हैं। इसके अलावा कई अन्य सुरक्षा फीचर भी दिखने लगते हैं। अभी बैंकों में काम अधिक और स्टाफ कम होने से सभी चेक को इस लैब से नहीं गुजारा जाता है।