Kanpur Robbery: बैंक में आरबीआई की गाइडलाइन का नहीं हो रहा था पालन, गोल्ड वॉल्ट में लगा होना चाहिए था सेंसर
एसबीआई की भौंती शाखा में चोरी के मामले में कई तथ्य सामने आए हैं। दरअसल, बैंक आरबीआई की गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहा था। गोल्ड वॉल्ट में सेंसर लगा होना चाहिए था, जोकि नहीं लगा हुआ था। बैंक प्रबंधन ने भी आंतरिक जांच के निर्देश दिए।
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कानपुर में एसबीआई की भौंती शाखा में यदि आरबीआई की गाइड लाइन का पालन हो रहा होता, तो शायद चोरी नहीं होती। गाइड लाइन के मुताबिक जिस गोल्ड वॉल्ट में सोने के आभूषण रखे जाते हैं। इसमें इंफ्रारेड वाली डिवाइड लगाई जाती है। यह व्यवस्था अनिवार्य है।
इंफ्रारेड को पार करने या वॉल्ट में कोई हरकत होने पर बैंक के बाहर लगा अलार्म बजने लगता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार यह डिवाइस ही वॉल्ट में नहीं लगी थी। वहीं बैंक प्रबंधन ने आंतरिक जांच के निर्देश दिए हैं। जिन बैंकों में गोल्ड लोन की सुविधा होती है।
वहां आभूषण गोल्ड वॉल्ट (सेफ) में रखे जाते हैं। इस तिजोरी को काट पाना या तोड़ पाना मुश्किल होता है। इस मामले में तिजोरी को तोड़ा गया है। जानकारों ने बताया कि स्ट्रांग रूम में दो दरवाजे होते हैं। इसमें एक सेंसर होता है, जब कोई इसे खोलेगा या कोई हरकत करेगा, तो सेंसर एक्टिव होकर सायरन के साथ आवाज करने लगता है।
रात में नहीं रहता है बैंक का गार्ड
बैंक मैनेजर के अनुसार बैंक में आठ लोगों का स्टाफ है। दिन में एक सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी रहती है। रात में बैंक प्रबंधन की तरफ से कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं रहता है। पुलिस भी गश्त नहीं करती है। पुलिस अगर गश्त करती तो चोरी नहीं होती।
सुरक्षा के मानक कागजों तक सीमित
बैंकों में सुरक्षा के लिए समय- समय पर आरबीआई निर्देश जारी करती है लेकिन यह निर्देश कागजों तक ही सीमित रहते हैं। सिक्योरिटी ऑडिट के नाम पर भी बैंकों में खानापूर्ति की जाती है। यह ऑडिट हर साल होते हैं। इसके अलावा बैंक के इंश्योरेंस होने से भी अफसर लापरवाही बरतते हैं।
सुरक्षा के लिए ये होते हैं नियम
स्ट्रांग रूम में नगद और गोल्ड लोन आदि की आभूषण रखे जाते हैं। स्ट्रांग रूम में मानक के अनुसार चारों तरफ की बाउंड्री आरसीसी कवर होनी चाहिए। रूम में स्मोक सेंसर होने चाहिए, जिससे आग या कुछ जलाया या काटा जाए तो स्मोक सेंसर आवाज कर दे।
रूम में इंफ्रारेड सेंसर भी लगाना अनिवार्य है, जो अंधेरे में होने वाली किसी भी गतिविधि पर सायरन बजाता है। पुलिस बैंक के सुरक्षा उपकरणों की समय-समय पर जांच करें, इसमें भी खानापूर्ति की जाती है। यदि उपकरण सही नहीं हैं, तो पुलिस को बैंक अफसर के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। आरबीआई के नए नियमों के मुताबिक सीसीटीवी रिकॉर्डिंग 6 महीने तक रखनी चाहिए।
मैं अभी लखनऊ में हूं। शाखा में हुई घटना की जानकारी मिली है। पुलिस की जांच शुरू हो गई। बैंक की आंतरिक जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी ग्राहक को कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। -डीजीएम, एसबीआई, नीलेश द्विवेदी
बैंक में सुरक्षा के मानक बहुत हैं पर इन मानकों के पालन न होने से ऐसे प्रकरण सामने आते हैं। बैंकों में प्राइवेट कर्मचारियों से बैंक के अंदर और बाहर कार्य करवाना भी सुरक्षा में बड़ी चूक है। -हन्नी मूलजानी, अध्यक्ष वी बैंकर्स एसोसिएशन
बैंकों की सुरक्षा के लिए दिए गए दिशा निर्देशों का पालन न होने के कारण ही इस तरह की घटना होती हैं। इस तरह की घटना से जनता का विश्वास कम होता है। -आशीष मिश्रा, महामंत्री, वी बैंकर्स एसोसिएशन