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Kanpur News: दृढ़ इच्छाशक्ति के बल रंजना ने हासिल की सफलता
Thu, 07 May 2026 01:51 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 07 May 2026 01:51 AM IST
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कानपुर देहात। कहते हैं अगर किसी काम करने की चाहत और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो वह जरूर पूरा होता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है संदलपुर ब्लॉक के कठरा ग्राम पंचायत की रंजना देवी ने। पहले इन्होंने से लिफाफे और फाइल बनाने का काम शुरू किया और सफलता हासिल की। अब वह अपने कारोबार का दायरा बढ़ा रही हैं और अगरबत्ती बनाने का काम शुरू किया है।
रंजना बताती हैं कि पहले गांव के लोग महिला होने की वजह से घर की दहलीज से बाहर निकलने पर एतराज जताते थे लेकिन पति प्रमोद कुमार के प्रेरित करने पर लिफाफा, फाइल जैसे उत्पाद को घर पर ही बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे सफलता मिली तो गांव की अन्य महिलाओं से संपर्क किया और उन्हें भी रोजगार उपलब्ध कराया। अब 12 महिलाएं मिलकर काम कर रही हैं। इस दौरान एनआरएलएम विभाग से चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी हुई, तो विभाग से संपर्क कर समूह का गठन करते हुए आरसेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) से इन महिलाओं को प्रशिक्षण भी प्रदान कराया है।
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जरूरतें बढ़ने पर की नए काम की शुरूआत
समय के साथ समूह में महिलाओं की संख्या बढ़ी और जरूरतें भी बढ़ने लगी। ऐसे में पति प्रमोद कुमार ने नया काम शुरू करने की सलाह दी। सभी महिलाओं ने आपस में सलाह कर अगरबत्ती का काम शुरू करने पर सहमति जताई। इसके बाद करीब दो लाख रुपये खर्च कर मशीन की खरीदारी की गई, साथ ही इसे चलाने का प्रशिक्षण लिया गया। अब इस कारोबार को शुरू करने से आमदनी भी बढ़ गई है। इससे प्रति माह करीब 30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है, वहीं साथ में काम करने वाली महिलाएं पर घर का काम करने के साथ प्रति माह आठ से दस हजार रुपये कमा रही हैं।
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आस-पास के जिलों तक बनी पहुंच
काम की शुरूआत करने पर पहले स्थानीय बाजार में कारोबारियों से संपर्क किया गया। उत्पाद को पसंद किए जाने पर सभी में उत्साह बढ़ा और आस-पास के जिलों के बाजार तक दायरा बढ़ाया गया है। प्रमोद बताते हैं कि जिले के अकबरपुर, झींझक, पुखरायां जैसे बाजार के अलावा कन्नौज, कानपुर, औरैया, इटावा तक अगरबत्ती व फाइल आदि की बिक्री की जाती है। इसके लिए महिलाओं ने आपस में मिलकर काम बांट रखा है। अगर किसी तरह की समस्या आती है तो समय-समय पर सहायता की जाती है।
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रंजना बताती हैं कि पहले गांव के लोग महिला होने की वजह से घर की दहलीज से बाहर निकलने पर एतराज जताते थे लेकिन पति प्रमोद कुमार के प्रेरित करने पर लिफाफा, फाइल जैसे उत्पाद को घर पर ही बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे सफलता मिली तो गांव की अन्य महिलाओं से संपर्क किया और उन्हें भी रोजगार उपलब्ध कराया। अब 12 महिलाएं मिलकर काम कर रही हैं। इस दौरान एनआरएलएम विभाग से चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी हुई, तो विभाग से संपर्क कर समूह का गठन करते हुए आरसेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) से इन महिलाओं को प्रशिक्षण भी प्रदान कराया है।
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जरूरतें बढ़ने पर की नए काम की शुरूआत
समय के साथ समूह में महिलाओं की संख्या बढ़ी और जरूरतें भी बढ़ने लगी। ऐसे में पति प्रमोद कुमार ने नया काम शुरू करने की सलाह दी। सभी महिलाओं ने आपस में सलाह कर अगरबत्ती का काम शुरू करने पर सहमति जताई। इसके बाद करीब दो लाख रुपये खर्च कर मशीन की खरीदारी की गई, साथ ही इसे चलाने का प्रशिक्षण लिया गया। अब इस कारोबार को शुरू करने से आमदनी भी बढ़ गई है। इससे प्रति माह करीब 30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है, वहीं साथ में काम करने वाली महिलाएं पर घर का काम करने के साथ प्रति माह आठ से दस हजार रुपये कमा रही हैं।
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आस-पास के जिलों तक बनी पहुंच
काम की शुरूआत करने पर पहले स्थानीय बाजार में कारोबारियों से संपर्क किया गया। उत्पाद को पसंद किए जाने पर सभी में उत्साह बढ़ा और आस-पास के जिलों के बाजार तक दायरा बढ़ाया गया है। प्रमोद बताते हैं कि जिले के अकबरपुर, झींझक, पुखरायां जैसे बाजार के अलावा कन्नौज, कानपुर, औरैया, इटावा तक अगरबत्ती व फाइल आदि की बिक्री की जाती है। इसके लिए महिलाओं ने आपस में मिलकर काम बांट रखा है। अगर किसी तरह की समस्या आती है तो समय-समय पर सहायता की जाती है।