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कानपुर: शूटिंग रेंज की जमीन कब्जाने के मामले में रामदास को मिली जमानत
Sat, 24 Oct 2020 10:00 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 24 Oct 2020 10:00 PM IST
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हिस्ट्रीशीटर रामदास
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में कटरी शंकरपुर सराय स्थित पुलिस की शूटिंग रेंज की जमीन पर कब्जा करने और रियल इस्टेट कंपनी के साथ मिलकर जमीनों की बिक्री करने के मामले में मुख्य आरोपी रामदास को भी अपर जिला जज प्रथम विनोद कुमार सिंह की कोर्ट से जमानत मिल गई है।
कोर्ट ने डेढ़-डेढ़ लाख की दो जमानतों व निजी बंधपत्र अदा करने पर सशर्त जमानत दी है। कटरी की जमीनों पर कब्जे के मामले में कोहना थाने में 29 सितंबर को राजेंद्र निषाद, रामदास, सुरेश पाल, राजू पाल व अन्य के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी तरीके से जमीनों की बिक्री करके अवैध रूप से नींव भरवाकर कब्जा करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
शासकीय अधिवक्ता ने तर्क रखा कि रामदास ने षड़यंत्र करके व अवैध लाभ कमाने के उद्देश्य से पुलिस की शूटिंग रेंज की जमीनों को खरीदारों को दिखाया और बिकवाया। वहीं, अधिवक्ता कपिलदीप सचान ने तर्क रखा कि रामदास पूर्व में प्रधान रहे हैं और विपक्षियों ने साजिश के तहत उन्हें फंसाया है।
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उन्होंने न तो किसी जमीन पर कब्जा किया और न ही कोई अनैतिक लाभ लिया। पुलिस जिसे शूटिंग रेंज की जमीन बता रही है, विभाग के पास उसकी चौहद्दी तक नहीं है। कोर्ट ने पाया कि केस डायरी में जिन चार रजिस्ट्रियों का जिक्र किया गया, उनमें रामदास न तो क्रेता थे, न विक्रेता और न ही गवाह।
ऐसे में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने या जमीन बेचकर लाभ लेने का आरोप साबित नहीं हो सका और रामदास को जमानत मिल गई। इससे पहले रामदास के बेटे राजेंद्र को भी जमानत मिल चुकी है।
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कोर्ट ने डेढ़-डेढ़ लाख की दो जमानतों व निजी बंधपत्र अदा करने पर सशर्त जमानत दी है। कटरी की जमीनों पर कब्जे के मामले में कोहना थाने में 29 सितंबर को राजेंद्र निषाद, रामदास, सुरेश पाल, राजू पाल व अन्य के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी तरीके से जमीनों की बिक्री करके अवैध रूप से नींव भरवाकर कब्जा करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
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शासकीय अधिवक्ता ने तर्क रखा कि रामदास ने षड़यंत्र करके व अवैध लाभ कमाने के उद्देश्य से पुलिस की शूटिंग रेंज की जमीनों को खरीदारों को दिखाया और बिकवाया। वहीं, अधिवक्ता कपिलदीप सचान ने तर्क रखा कि रामदास पूर्व में प्रधान रहे हैं और विपक्षियों ने साजिश के तहत उन्हें फंसाया है।
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उन्होंने न तो किसी जमीन पर कब्जा किया और न ही कोई अनैतिक लाभ लिया। पुलिस जिसे शूटिंग रेंज की जमीन बता रही है, विभाग के पास उसकी चौहद्दी तक नहीं है। कोर्ट ने पाया कि केस डायरी में जिन चार रजिस्ट्रियों का जिक्र किया गया, उनमें रामदास न तो क्रेता थे, न विक्रेता और न ही गवाह।
ऐसे में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने या जमीन बेचकर लाभ लेने का आरोप साबित नहीं हो सका और रामदास को जमानत मिल गई। इससे पहले रामदास के बेटे राजेंद्र को भी जमानत मिल चुकी है।