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काश! हर गांव में पैदा होते रामजियावन, श्मसान को बना दिया पंच पल्लव
कामता सिंह, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 22 Jul 2017 11:29 AM IST
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श्मसान घाट पर पेड़ पौधों की देखरेख करते राम जियावन निषाद।
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी में फतेहपुर के मलवां ब्लाक के शिवराजपुर गांव का श्मसान घाट पंच पल्लव( पंचवटी) बन गया है। गांव के रामजियावन निषाद पांडु नदी के किनारे सौ से अधिक छायादार पौधे रोप कर उन्हें पाल पोष रहे हैं। गांव में इन्हें लोग वृक्षमित्र के नाम से भी जानते हैं। निरक्षर किसान रामजियावन ने अपनी कुल ढाई बीघे जमीन पर भी फलदार पौधे रोपे हैं।
राम जियावन निषाद के पास कुल ढाई बीघे पैतृक जमीन है। इनके साथ बेटा मुन्ना, शिवप्रकाश और पत्नी रामप्यारी रहती हैं। दोनों बेटों की कमाई से जीविका चलती है। बीस साल पहले पिता गंगाराम की प्रेरणा से इन्होंने पौधरोपण शुरू किया। यह कहीं भी उगे मिले आम, बरगद, पीपल, पाकड़, गूलर के पौधों को पांडु नदी के किनारे स्थित श्मसान घाट पर रोप देते थे। इस दौरान यहां पर छाया की कोई व्यवस्था नहीं थी। शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए आने वालों को घंटों धूप में बैठना पड़ता था।
यह खुद कई बार शव यात्रा के दौरान श्मसान घाट पर घंटों धूप से जूझ चुके थे। ऐसे में श्मसान घाट पर छायादार पौधे लगाने की इच्छा हुई। बाद में यह शौक लगन बन गया। इसी के चलते पैतृक जमीन को बाग बना दिया। बाग में आम, अमरूद, नीबू, आंवला के पेड़ खड़े हैं। वृक्षमित्र रामजियावन बताते हैं कि पौधों की सेवा करने में आत्मिक शांति मिलती है। उन्होंने बताया कि परिजनों से कह रखा है कि अंतिम संस्कार इसी श्मसान घाट पर किया जाए। इससे उनके रोपे गए पेड़ों के नीचे बैठकर शव यात्रा में शामिल होने वाले बैठ सकें। इससे आत्मा को शांति मिलेगी।
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राम जियावन निषाद के पास कुल ढाई बीघे पैतृक जमीन है। इनके साथ बेटा मुन्ना, शिवप्रकाश और पत्नी रामप्यारी रहती हैं। दोनों बेटों की कमाई से जीविका चलती है। बीस साल पहले पिता गंगाराम की प्रेरणा से इन्होंने पौधरोपण शुरू किया। यह कहीं भी उगे मिले आम, बरगद, पीपल, पाकड़, गूलर के पौधों को पांडु नदी के किनारे स्थित श्मसान घाट पर रोप देते थे। इस दौरान यहां पर छाया की कोई व्यवस्था नहीं थी। शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए आने वालों को घंटों धूप में बैठना पड़ता था।
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यह खुद कई बार शव यात्रा के दौरान श्मसान घाट पर घंटों धूप से जूझ चुके थे। ऐसे में श्मसान घाट पर छायादार पौधे लगाने की इच्छा हुई। बाद में यह शौक लगन बन गया। इसी के चलते पैतृक जमीन को बाग बना दिया। बाग में आम, अमरूद, नीबू, आंवला के पेड़ खड़े हैं। वृक्षमित्र रामजियावन बताते हैं कि पौधों की सेवा करने में आत्मिक शांति मिलती है। उन्होंने बताया कि परिजनों से कह रखा है कि अंतिम संस्कार इसी श्मसान घाट पर किया जाए। इससे उनके रोपे गए पेड़ों के नीचे बैठकर शव यात्रा में शामिल होने वाले बैठ सकें। इससे आत्मा को शांति मिलेगी।
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