गंगा को मिली 8 करोड़ लीटर गंदे पानी से निजात, ये किया गया उपाय
- बकरमंडी से नाला बिनगवां सीवेज ट्रीटमेंट की ओर मोड़ा गया
- काम पूरा होने की खुशी में अफसरों ने पनकी मंदिर जाकर प्रसाद चढ़ाया
- सीसामऊ नाले का 7 करोड़ लीटर पानी अभी गंगा में जाता रहेगा
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अक्टूबर में इस नाले का शेष हिस्सा वीआईपी रोड से मुड़ते ही इसका पानी गंगा में जाना पूरी तरह बंद हो जाएगा। सीसामऊ नाले से कुल 14 करोड़ लीटर गंदा पानी रोज गंगा में जाता है। यह गंगा में गिरने वाला देश का सबसे बड़ा नाला है। करीब सवा सौ साल पुराना है। दोपहर में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक आरके अग्रवाल, परियोजना प्रबंधक घनश्याम द्विवेदी, सहायक अभियंता डीके भदौरिया सहित अन्य अफसर बकरमंडी पहुंचे।
घनश्याम द्विवेदी ने बताया कि दोनों गेट खोलकर वहां से सीसामऊ नाले का पानी राखी मंडी सीवेज पंपिंग स्टेशन में भेजना शुरू कर दिया गया है। अभी दो गेट लगे हैं, एक गेट लगाने का काम बाकी है। पर इस वजह से नाले का बहाव प्रभावित नहीं हो रहा है। इस गेट को सिल्ट हटाने और इमरजेंसी में नाले का बहाव रोकने के लिए लगाया जाना है। यह गेट भी 10 जून को लग जाएगा। इसके बाद वहां स्थित एक अन्य बरसाती नाला भी गंगा के बजाए एसटीपी में जाने लगेगा। बकरमंडी से पूरा नाला मुड़ने के खुशी में संबंधित अफसर पनकी मंदिर गए और प्रसाद चढ़ाया।