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हड़ताल टूटी तो बगावत ने उठाया सिर

Fri, 15 Apr 2016 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 15 Apr 2016 01:24 AM IST
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Broken strike the rebellion raised by Sir
सराफा कारोबारियों की दुकानों पर सुबह से ही लग गई भीड़ - फोटो : अमर उजाला
कानपुर। 42 दिन बाद सिर्फ आश्वासन के आधार पर सराफा बंदी वापस लेने से नाराज चार स्वर्णकारों ने अपनी एसोसिएशन से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वाले स्वर्णकारों ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों पर उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन के दबाव में काम करने का आरोप लगाया।
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इस्तीफा देने वालों में राष्ट्रीय स्वर्णकार महासभा धोबीमोहाल के संगठन मंत्री विजय वर्मा, सदस्य रमाकांत वर्मा, सोनू गुप्ता, शैलेंद्र गुप्ता हैं। कुछ पदाधिकारी भी इस्तीफा दे सकते हैं। रमाकांत वर्मा ने कहा कि यूपी सराफा एसोसिएशन ने बंदी वापस लेने से पूर्व सिर्फ गिने चुने लोगों को बुलाकर ही मंत्रणा की थी। 19 मार्च को बुलाई सभा की तरह ही इस बार भी फैसला लेना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनकी स्वर्णकार महासभा ने भी दबाव में काम किया। इस वजह से संगठन से इस्तीफा दे दिया।
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बाजार खुलना पूर्व निर्धारित था
कानपुर महानगर सराफा एसोसिएशन के महामंत्री पंकज अरोड़ा का कहना है कि बाजार खुलना पूर्व निर्धारित था। बड़े कारोबारियों ने सहालग को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया। यह फैसला जेम्स एंड ज्वैलरी फेडरेशन के दबाव में लिया गया है। इस फेडरेशन ने सरकार से मिलकर 19 मार्च से ही बाजार खोलने का फैसला कर लिया था, लेकिन सराफों की एकजुटता से इस संगठन की नहीं चली।
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24 तारीख की बंदी पर संशय
उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश चंद्र जैन का कहना है कि सरकार से बात करने के लिए गठित कमेटियां अभी भी काम कर रही हैं। सरकार को प्रपोजल दिए जा रहे हैं। सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि रोल बैक नहीं होगा लेकिन इसके बदले जो चाहते हैं वह सहूलियतें मिलेंगी। रुपये में 12 आने सफलता मिल गई है। इसे लेने की चेष्टा कर रहे हैं। सिर्फ चार आने की लड़ाई बची है। ऐसे में 24 से बंदी के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।
कारखानों में पसरा है सन्नाटा
शहर में ज्वैलरी बनने के तीन बड़े ठिकाने हैं। बिरहाना रोड नील वाली गली, नयागंज चतुर्थ भुज गली और धोबीमोहाल। यहां छोटे बड़े करीब 500 से अधिक कारखाने हैं। इसके अलावा शहर भर में फुटकर कारखाने भी हैं। इनकी संख्या सौ के आसपास है। एक कारखाने में 10 से 40 व्यक्ति तक काम करते हैं। फिलहाल इन कारखानों में सन्नाटा पसरा है। हर कारखाने में दो से चार लोग काम कर रहे हैं।
90 फीसदी कर गए थे पलायन
श्री ज्वैलर्स मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के महामंत्री विश्वजीत पॉल ने बताया कि बंदी के दौरान होली में यहां से करीब 90 फीसदी बंगाली कारीगर पलायन कर गए थे। ये अभी तक लौटे नहीं हैं। फोन करके बुलाया जा रहा है। काम बहुत है लेकिन कारीगर नहीं हैं। इसलिए बड़ा आर्डर नहीं ले रहे हैं। कारीगरों के आने में वक्त लग सकता है। इसका असर बिक्री पर बाजार पर पड़ेगा।

एक गहने में लगते आठ कारीगर
राष्ट्रीय स्वर्णकार महासभा के रमाकांत वर्मा ने बताया कि एक गहने में छह से आठ लोगों की कारीगरी लगती है। इसमें सोना गलानेे, गहने की ढलाई, छिलाई, पॉलिश, टांका लगाने, दाना, पत्ती, तार, बनाने और मोती, नग पिरोने वाले शामिल होते हैं।           हर कारीगर अपने काम में माहिर होता है इसलिए कोई दूसरा इनका काम नहीं कर सकता। बंगाल के कारीगर इस        काम में ज्यादा हुनरमंद हैं। ज्वैलरी को नई डिजायन देने में ये माहिर होते हैं। उनके चले जाने से धोबी मोहाल बाजार की रौनक गायब है।
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