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फागुन बौराया, सावन को हराया
अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 03 Mar 2015 02:52 AM IST
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कानपुर। अबकी साल फागुन की बारिश ने सावन (अगस्त) की बारिश को भी पीछे छोड़ दिया है। मौसम विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि अगस्त 2014 में मात्र 52.8 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जबकि मार्च में शनिवार से सोमवार दोपहर तक 53.3 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। इस तरह फागुन की बारिश ने सावन की बारिश को धो दिया। देर रात तक भी रुक-रुक कर बूंदाबांदी होती रही। सोमवार को बदरी के साथ 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं ने ठंड लौटा दी। लोगों के स्वेटर-जैकेट्स फिर निकल आए।
मौसम विज्ञानी बता रहे हैं कि तेज हवाओं और रात के पारे में 1.8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने से ठंड का अहसास हुआ है। मंगलवार को भी धूप-छांव की स्थिति बनी रहेगी पर मौसम धीरे-धीरे साफ होगा। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे के अनुसार वातावरण में नमी कम हुई है।
कहीं ये बारिश शिफ्ट होने का असर तो नहीं?
डॉ. दुबे के अनुसार साल भर अलग-अलग मौसम में होने वाली बारिश तेजी से शिफ्ट होती दिख रही है। इसके कई कारण हैं पर 2005 के बाद इसका असर ज्यादा दिखा। आंकड़ों के अनुसार कुल बारिश में औसतन 88 फीसदी बारिश जुलाई से सितंबर के बीच मानसूनी बारिश के रूप में हो जानी चाहिए। अक्तूबर से नवंबर के बीच पोस्ट मानसून के रूप में औसतन 6.2 फीसदी और दिसंबर से मार्च में औसतन 2.8 फीसदी बारिश होनी चाहिए। गर्मी के मौसम (अप्रैल-मई) में यह आंकड़ा औसतन 3 फीसदी है पर फरवरी 2013 में 121.2 मिमी बारिश हुई। 2014 जुलाई से सितंबर तक 443.3 मिलीमीटर बारिश हुई। फरवरी 2014 में 29.8 और मार्च 2015 में 53.3 मिलीमीटर बारिश हुई जबकि दिसंबर से मार्च तक औसतन 6.2 मिलीमीटर बारिश ही होनी चाहिए।
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मौसम विज्ञानी बता रहे हैं कि तेज हवाओं और रात के पारे में 1.8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने से ठंड का अहसास हुआ है। मंगलवार को भी धूप-छांव की स्थिति बनी रहेगी पर मौसम धीरे-धीरे साफ होगा। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे के अनुसार वातावरण में नमी कम हुई है।
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कहीं ये बारिश शिफ्ट होने का असर तो नहीं?
डॉ. दुबे के अनुसार साल भर अलग-अलग मौसम में होने वाली बारिश तेजी से शिफ्ट होती दिख रही है। इसके कई कारण हैं पर 2005 के बाद इसका असर ज्यादा दिखा। आंकड़ों के अनुसार कुल बारिश में औसतन 88 फीसदी बारिश जुलाई से सितंबर के बीच मानसूनी बारिश के रूप में हो जानी चाहिए। अक्तूबर से नवंबर के बीच पोस्ट मानसून के रूप में औसतन 6.2 फीसदी और दिसंबर से मार्च में औसतन 2.8 फीसदी बारिश होनी चाहिए। गर्मी के मौसम (अप्रैल-मई) में यह आंकड़ा औसतन 3 फीसदी है पर फरवरी 2013 में 121.2 मिमी बारिश हुई। 2014 जुलाई से सितंबर तक 443.3 मिलीमीटर बारिश हुई। फरवरी 2014 में 29.8 और मार्च 2015 में 53.3 मिलीमीटर बारिश हुई जबकि दिसंबर से मार्च तक औसतन 6.2 मिलीमीटर बारिश ही होनी चाहिए।
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