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Kanpur News: 1000 किमी लंबे रेन बैंड के कारण हुई बारिश
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कानपुर। महानगर सहित प्रदेश के 27 मंडलों में दो दिनों की बारिश से गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। अधिकांश क्षेत्रों में गेहूं की पकी बालियाें वाले खेतों में पानी भरा होने की वजह से उनकी पैदावार प्रभावित हुई है।
माैसम विभाग के अनुसार, पहली बार मार्च के महीने में एक साथ इतने बड़े क्षेत्र में बारिश हुई है। उत्तर और दक्षिण भारत में हो रही मूसलाधार बारिश की मुख्य वजह इस बार 1,000 किलोमीटर लंबा और रैखिक रेन बैंड बनना है। इसकी वजह से पश्चिमी विक्षोभ का असर कई गुना बढ़ गया। इससे बारिश के साथ जगह-जगह ओले भी पड़े। कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र में बारिश का असर अब खत्म हो गया है, अगले 24 घंटे में बादलों के बीच धूप भी निकलेगी।
माैसम विशेषज्ञ डाॅ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि यह रेन बैंड अफगानिस्तान से शुरू होकर पाकिस्तान और भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों तक फैला है। यह मौसमी बदलाव दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में रबी की फसलों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में शुक्रवार और शनिवार को बारिश दर्ज की गई।
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क्या है रेन बैंड
आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ गोल या लहरदार आकार में आता है लेकिन इस बार यह एक सीधी रेखा की तरह आया है। इसकी वजह से अधिक नमी और बादल एक लंबी पट्टी में जमा हो गए हैं। पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर से उत्पन्न होने वाली कम दबाव की प्रणाली है जो भारत के उत्तर और उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी लाती है। इन दो दिनों में इसी तरह की गतिविधियां सक्रिय रहीं।
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फारस, कैस्पियन सागर, अरब सागर और भूमध्य सागर से चक्रवाती हवाएं एक साथ उठी हैं जिससे हर तरफ बारिश हुई। इन हवाओं को जहां-जहां प्रभाव अधिक रहा, वहां तेज बारिश के साथ ओले भी पड़े हैं। -डाॅ. एसएन सुनील पांडेय
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माैसम विभाग के अनुसार, पहली बार मार्च के महीने में एक साथ इतने बड़े क्षेत्र में बारिश हुई है। उत्तर और दक्षिण भारत में हो रही मूसलाधार बारिश की मुख्य वजह इस बार 1,000 किलोमीटर लंबा और रैखिक रेन बैंड बनना है। इसकी वजह से पश्चिमी विक्षोभ का असर कई गुना बढ़ गया। इससे बारिश के साथ जगह-जगह ओले भी पड़े। कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र में बारिश का असर अब खत्म हो गया है, अगले 24 घंटे में बादलों के बीच धूप भी निकलेगी।
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माैसम विशेषज्ञ डाॅ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि यह रेन बैंड अफगानिस्तान से शुरू होकर पाकिस्तान और भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों तक फैला है। यह मौसमी बदलाव दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में रबी की फसलों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में शुक्रवार और शनिवार को बारिश दर्ज की गई।
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क्या है रेन बैंड
आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ गोल या लहरदार आकार में आता है लेकिन इस बार यह एक सीधी रेखा की तरह आया है। इसकी वजह से अधिक नमी और बादल एक लंबी पट्टी में जमा हो गए हैं। पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर से उत्पन्न होने वाली कम दबाव की प्रणाली है जो भारत के उत्तर और उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी लाती है। इन दो दिनों में इसी तरह की गतिविधियां सक्रिय रहीं।
फारस, कैस्पियन सागर, अरब सागर और भूमध्य सागर से चक्रवाती हवाएं एक साथ उठी हैं जिससे हर तरफ बारिश हुई। इन हवाओं को जहां-जहां प्रभाव अधिक रहा, वहां तेज बारिश के साथ ओले भी पड़े हैं। -डाॅ. एसएन सुनील पांडेय