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रेल ट्रैक किनारे फिर भड़की आग
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rail track ke kinare phir bhadki aag
- फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट/मानिकपुर। करीब चालीस दिनों से ज्यादा समय से जिले के जंगलों में लगी आग शनिवार को कई जगहों पर बुझी नजर आई। फिर भी कई जंगलों में आग अभी भी हल्की फुल्की सुलग रही है। वहीं बहिलपुरवा से लेकर पनहाई रेलवे ट्रैक के किनारे झाड़ियों में आग फिर धधक उठी, जिसके चलते एक घंटे से ज्यादा समय तक रेलवे ट्रैक और स्टेशन परिसर धुएं के गुबार से घिरा रहा। गनीमत रही कि इससे ट्रेनों का आवागमन प्रभावित नहीं हुआ। उधर, जंगलों की आग से वन्य जीव प्राणियों ने भी अपनी आवाजाही शहर के आसपास करना शुरू कर दिया है।
बरौंधा के जंगलों से लेकर रानीपुर वन्य जीव विहार के जंगलों में लगी आग शनिवार को शांत रही। यहां के जंगलों की आग को वन विभाग कर्मियों ने फायर ब्रिगेड की मदद से काबू में कर लिया। फिर भी हजारों की संख्या में पेड़-पौधे जल गए, जिससे विभाग को लाखों रुपये की क्षति हुई। करीब चालीस दिन से ज्यादा समय से जिले के विंध्य पर्वत श्रंखलाओं में आग से जंगल सुलग रहे हैं। शनिवार को भी यह क्रम कई जगहों पर जारी रहा, लेकिन अधिकतर जगहों पर आग खामोश रही। वहीं, झांसी-प्रयागराज रेलमार्ग के बहिलपुरवा स्टेशन से लेकर पनहाई रेलमार्ग के लगभग 25 किमी के अंतराल में बीच बीच जंगलों में आग फिर भड़क उठी, जिससे रेलवे स्टेशन तक धुएं के गुबार में डूबा रहा, लेकिन इससे कोई नुकसान नहीं हुआ है।
जानकारी होने पर शनिवार की सुबह से ही जीआरपी, आरपीएफ के जवान रेल कर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से आग को रेलवे ट्रैक की ओेर आने से रोकते रहे। रेलवे ट्रैक की झाड़ियों में सुलगी आग से किसी भी ट्रेन का आवागमन बाधित नहीं हुआ और न ही अभी तक किसी नुकसान की बात सामने आई है, फिर भी रेल कर्मचारी आग को बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं मानिकपुर व रानीपुर वन्यजीव विहार क्षेत्र में लगातार कई दिनों से आग लगी होने से वन्यजीव प्राणियों ने भी अपना आवागमन बदलते हुए इधर-उधर भटक रहे हैं। शुक्रवार की शाम को तो एक तेंदुआ भटककर चित्रकूट के कामदगिरी पर्वत तक पहुंच गया, जिससे लोगों में खौफ का वातावरण छा गया। लोगों को डर है कि कहीं शहर के अंदर न ये वन्य प्राणी पहुंच जाएं और नुकसान कर दें।
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परिक्रमा करने वाले कई श्रद्धालुओं ने बताया कि पहाड़ की चोटी पर एक तेेंदुआ देखा गया जो शाम को अंधेरा होने के बाद नहीं दिखा। आसपास के लोगों ने बताया कि कई दिनों से तेंदुआ इस पर्वत के पास देखा जा रहा है, जिससे परिक्रमा मार्ग के आस पास रहने वाले लोग भयभीत भी हैं। गर्मी के दिनों मेें घरों के बाहर सोने वाले लोग इन दिनों घर के अंदर सो रहे हैं। फिलहाल शनिवार की सुबह से देर शाम तक तेंदुआ इस क्षेत्र में नहीं दिखा है। संभावना जताई गई है कि वह मध्यप्रदेश के जंगल की ओर चला गया होगा।
अब बरौंधा के जंगलों और रानीपुर वन्य जीव विहार के जंगलों में लगी आग को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है। जंगलों की आग को वनकर्मियों ने फायर ब्रिगेड के साथ मिलकर बुझा दिया गया है। आसपास की बस्ती के लोगों को महुआ बीनने के दौरान पत्तियों में आग न लगाने को कहा गया है।
त्रिवेणी प्रसाद, क्षेत्राधिकारी, रानीपुर वन्य जीव विहार
जंगलों में आग लगने से वन्यजीव प्राणी इधर-उधर भागे होंगे। छोटे जीवजंतु आग में फंस भी जाते हैं, लेकिन बडे़ जानवर भागकर दूसरे जंगल की ओर चले गए हैं। मानिकपुर और बरगढ़ के जंगल से सटे मध्यप्रदेश के जंगल हैं, जिसमें अक्सर वन्यजीव प्राणी आते-जाते रहते हैं। आग से जीव उसी ओर जाते हैं।
-कैलाश प्रकाश, डीएफओ, वन विभाग
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बरौंधा के जंगलों से लेकर रानीपुर वन्य जीव विहार के जंगलों में लगी आग शनिवार को शांत रही। यहां के जंगलों की आग को वन विभाग कर्मियों ने फायर ब्रिगेड की मदद से काबू में कर लिया। फिर भी हजारों की संख्या में पेड़-पौधे जल गए, जिससे विभाग को लाखों रुपये की क्षति हुई। करीब चालीस दिन से ज्यादा समय से जिले के विंध्य पर्वत श्रंखलाओं में आग से जंगल सुलग रहे हैं। शनिवार को भी यह क्रम कई जगहों पर जारी रहा, लेकिन अधिकतर जगहों पर आग खामोश रही। वहीं, झांसी-प्रयागराज रेलमार्ग के बहिलपुरवा स्टेशन से लेकर पनहाई रेलमार्ग के लगभग 25 किमी के अंतराल में बीच बीच जंगलों में आग फिर भड़क उठी, जिससे रेलवे स्टेशन तक धुएं के गुबार में डूबा रहा, लेकिन इससे कोई नुकसान नहीं हुआ है।
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जानकारी होने पर शनिवार की सुबह से ही जीआरपी, आरपीएफ के जवान रेल कर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से आग को रेलवे ट्रैक की ओेर आने से रोकते रहे। रेलवे ट्रैक की झाड़ियों में सुलगी आग से किसी भी ट्रेन का आवागमन बाधित नहीं हुआ और न ही अभी तक किसी नुकसान की बात सामने आई है, फिर भी रेल कर्मचारी आग को बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं मानिकपुर व रानीपुर वन्यजीव विहार क्षेत्र में लगातार कई दिनों से आग लगी होने से वन्यजीव प्राणियों ने भी अपना आवागमन बदलते हुए इधर-उधर भटक रहे हैं। शुक्रवार की शाम को तो एक तेंदुआ भटककर चित्रकूट के कामदगिरी पर्वत तक पहुंच गया, जिससे लोगों में खौफ का वातावरण छा गया। लोगों को डर है कि कहीं शहर के अंदर न ये वन्य प्राणी पहुंच जाएं और नुकसान कर दें।
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परिक्रमा करने वाले कई श्रद्धालुओं ने बताया कि पहाड़ की चोटी पर एक तेेंदुआ देखा गया जो शाम को अंधेरा होने के बाद नहीं दिखा। आसपास के लोगों ने बताया कि कई दिनों से तेंदुआ इस पर्वत के पास देखा जा रहा है, जिससे परिक्रमा मार्ग के आस पास रहने वाले लोग भयभीत भी हैं। गर्मी के दिनों मेें घरों के बाहर सोने वाले लोग इन दिनों घर के अंदर सो रहे हैं। फिलहाल शनिवार की सुबह से देर शाम तक तेंदुआ इस क्षेत्र में नहीं दिखा है। संभावना जताई गई है कि वह मध्यप्रदेश के जंगल की ओर चला गया होगा।
अब बरौंधा के जंगलों और रानीपुर वन्य जीव विहार के जंगलों में लगी आग को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है। जंगलों की आग को वनकर्मियों ने फायर ब्रिगेड के साथ मिलकर बुझा दिया गया है। आसपास की बस्ती के लोगों को महुआ बीनने के दौरान पत्तियों में आग न लगाने को कहा गया है।
त्रिवेणी प्रसाद, क्षेत्राधिकारी, रानीपुर वन्य जीव विहार
जंगलों में आग लगने से वन्यजीव प्राणी इधर-उधर भागे होंगे। छोटे जीवजंतु आग में फंस भी जाते हैं, लेकिन बडे़ जानवर भागकर दूसरे जंगल की ओर चले गए हैं। मानिकपुर और बरगढ़ के जंगल से सटे मध्यप्रदेश के जंगल हैं, जिसमें अक्सर वन्यजीव प्राणी आते-जाते रहते हैं। आग से जीव उसी ओर जाते हैं।
-कैलाश प्रकाश, डीएफओ, वन विभाग