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Kanpur News: रहीमपुर-करीमपुर मनरेगा कार्य में 12 लाख का गबन, बीडीओ समेत नौ दोषी
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कानपुर। गरीबों को रोजगार देने के लिए सरकार भले ही मनरेगा पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो लेकिन बिल्हौर ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारियों ने योजना को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। रहीमपुर-करीमपुर ग्राम पंचायत में 12 लाख रुपये के गबन का खुलासा हुआ है।
जिला स्तरीय तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच पूरी कर दो बीडीओ, एक सचिव, प्रधान, दो एपीओ, दो तकनीकी सहायक और कंप्यूटर ऑपरेटर को दोषी पाया है। जांच रिपोर्ट सीडीओ दीक्षा जैन को सौंप दी है। अब सभी जिम्मेदारों की नामवार सूची उपायुक्त मनरेगा से मांगी है। सूची आते ही दोषियों के निलंबन के साथ ही धनराशि की वसूली की जाएगी।
बीते एक माह पहले ग्राम रहिमपुर-करीमपुर के चंद्र कुमार कटियार ने डीएम को शिकायत दी थी कि 2024–25 से 2025–26 के बीच ग्राम प्रधान विनोद कुमार, सचिव रवि यादव, तकनीकी सहायक शशिकांत मिश्रा और अन्य ने बिना काम कराए फर्जी भुगतान किया। आरोप था कि दूसरी ग्राम पंचायतों के मजदूरों के नाम से भी फर्जी हाजिरी लगाकर मजदूरी निकाली गई। डीएम ने लोकपाल से जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। लोकपाल जांच करने गांव पहुंचे तो ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय मजदूरों को किसी भी तरह का काम नहीं दिया गया।
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जिन 80 मजदूरों के खाते में भुगतान भेजा गया वे 20 से 30 किमी दूर बेरहमपुर, बिल्हौर देहात, खजुरी, कुदौरा, अरौल, वरंडा, रौगांव, खाड़ामऊ के रहने वाले मिले। इनकी फर्जी हाजिरी लगाकर मानव दिवस बनाए गए और खातों में पैसा भेजा गया। इसके साथ करीब 13 काम (नाला खोदाई, चकमार्ग निर्माण, खेत समतलीकरण, पौधरोपण) कागजों में दिखाए गए लेकिन मौके पर एक भी काम नहीं मिला था। इन कार्यों के नाम पर दो साल में 14,85,203 रुपये खर्च दिखाए गए थे।
लोकपाल की जांच के बाद सीडीओ के निर्देश पर पीडी आलोक कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनी जिसने अंतिम रूप से 12 लाख रुपये के गबन की रिपोर्ट तैयार कर सीडीओ को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। अब दो साल में इन ग्राम पंचायत में कौन-कौन तैनात रहा इनके नाम उपायुक्त मनरेगा से मांगे हैं।
सीआईबी बोर्ड के नाम पर निकाले 2.40 लाख
मनरेगा नियम अनुसार हर कार्यस्थल पर नागरिक सूचना बोर्ड (सीआईबी) लगाया जाना अनिवार्य है। 13 कार्य स्थलों में एक पर भी बोर्ड नहीं मिला था। कागजों में 13 बोर्ड दिखाए गए थे जिसकी वास्तविक धन राशि 65,000 रुपये होती है लेकिन भुगतान 2,40,000 रुपये यानी चार गुना राशि का किया गया था।
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जिला स्तरीय तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच पूरी कर दो बीडीओ, एक सचिव, प्रधान, दो एपीओ, दो तकनीकी सहायक और कंप्यूटर ऑपरेटर को दोषी पाया है। जांच रिपोर्ट सीडीओ दीक्षा जैन को सौंप दी है। अब सभी जिम्मेदारों की नामवार सूची उपायुक्त मनरेगा से मांगी है। सूची आते ही दोषियों के निलंबन के साथ ही धनराशि की वसूली की जाएगी।
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बीते एक माह पहले ग्राम रहिमपुर-करीमपुर के चंद्र कुमार कटियार ने डीएम को शिकायत दी थी कि 2024–25 से 2025–26 के बीच ग्राम प्रधान विनोद कुमार, सचिव रवि यादव, तकनीकी सहायक शशिकांत मिश्रा और अन्य ने बिना काम कराए फर्जी भुगतान किया। आरोप था कि दूसरी ग्राम पंचायतों के मजदूरों के नाम से भी फर्जी हाजिरी लगाकर मजदूरी निकाली गई। डीएम ने लोकपाल से जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। लोकपाल जांच करने गांव पहुंचे तो ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय मजदूरों को किसी भी तरह का काम नहीं दिया गया।
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जिन 80 मजदूरों के खाते में भुगतान भेजा गया वे 20 से 30 किमी दूर बेरहमपुर, बिल्हौर देहात, खजुरी, कुदौरा, अरौल, वरंडा, रौगांव, खाड़ामऊ के रहने वाले मिले। इनकी फर्जी हाजिरी लगाकर मानव दिवस बनाए गए और खातों में पैसा भेजा गया। इसके साथ करीब 13 काम (नाला खोदाई, चकमार्ग निर्माण, खेत समतलीकरण, पौधरोपण) कागजों में दिखाए गए लेकिन मौके पर एक भी काम नहीं मिला था। इन कार्यों के नाम पर दो साल में 14,85,203 रुपये खर्च दिखाए गए थे।
लोकपाल की जांच के बाद सीडीओ के निर्देश पर पीडी आलोक कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनी जिसने अंतिम रूप से 12 लाख रुपये के गबन की रिपोर्ट तैयार कर सीडीओ को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। अब दो साल में इन ग्राम पंचायत में कौन-कौन तैनात रहा इनके नाम उपायुक्त मनरेगा से मांगे हैं।
सीआईबी बोर्ड के नाम पर निकाले 2.40 लाख
मनरेगा नियम अनुसार हर कार्यस्थल पर नागरिक सूचना बोर्ड (सीआईबी) लगाया जाना अनिवार्य है। 13 कार्य स्थलों में एक पर भी बोर्ड नहीं मिला था। कागजों में 13 बोर्ड दिखाए गए थे जिसकी वास्तविक धन राशि 65,000 रुपये होती है लेकिन भुगतान 2,40,000 रुपये यानी चार गुना राशि का किया गया था।