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Kanpur News: 43 साल बाद मंदिर में राधारानी की वापसी, धूमधाम से निकाली शोभायात्रा
Thu, 23 Apr 2026 02:03 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 23 Apr 2026 02:03 AM IST
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मूसानगर। मुख्य बाजार स्थित प्राचीन श्री बांके बिहारी मंदिर में राधारानी समेत अन्य विग्रहों की पुनर्स्थापना के को लेकर चल रहे तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन बुधवार को भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
शोभायात्रा का आयोजन श्री बांके बिहारी पटराहन प्रबंध समिति के तत्वावधान में किया गया। पं. सुमित तिवारी और पं. अंकुश त्रिपाठी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यात्रा का शुभारंभ कराया। यात्रा मंदिर परिसर से शुरू होकर नगर की प्रमुख गलियों से होते हुए मुगल रोड के रास्ते थाना परिसर पहुंची। इस दौरान भगवान बांके बिहारी रथ पर सवार होकर थाना परिसर पहुंचे और वहां से राधारानी को परिवार सहित गाजे-बाजे के साथ मंदिर लाया गया। 43 वर्षों बाद मंदिर में राधारानी समेत अन्य विग्रहों के पहुंचने पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
शोभायात्रा के लिए मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया था। वहीं, नगर की गलियों को भगवा ध्वजों से सजाकर उत्सव का माहौल बनाया गया। यात्रा में शामिल महिलाएं भक्ति गीतों पर झूमती नजर आईं। नगर के लोगों ने राधा रानी की जगह-जगह पूजा अर्चना के साथ ही स्टॉल लगाकर जलपान कराया।
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महिलाओं ने राधारानी, बांके बिहारी, बलदाऊ जी, गरुड़ जी, गणेश जी और हनुमान जी की प्रतिमाओं का आकर्षक शृंगार किया। समिति के अध्यक्ष राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि 43 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद यह शुभ दिन आया है, जब राधारानी बांके बिहारी के साथ मंदिर में विराजमान हुई हैं। पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल है। बता दें कि 16 अप्रैल 1983 को मंदिर से मूर्तियां चोरी हुई थी। कानूनी प्रक्रिया के बाद पिछले साल सितंबर में मंदिर समिति को अदालत के आदेश पर मूर्तियां मिली हैं। अब भव्य आयोजन कर उन्हें स्थापित कराया जा रहा है।
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शोभायात्रा का आयोजन श्री बांके बिहारी पटराहन प्रबंध समिति के तत्वावधान में किया गया। पं. सुमित तिवारी और पं. अंकुश त्रिपाठी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यात्रा का शुभारंभ कराया। यात्रा मंदिर परिसर से शुरू होकर नगर की प्रमुख गलियों से होते हुए मुगल रोड के रास्ते थाना परिसर पहुंची। इस दौरान भगवान बांके बिहारी रथ पर सवार होकर थाना परिसर पहुंचे और वहां से राधारानी को परिवार सहित गाजे-बाजे के साथ मंदिर लाया गया। 43 वर्षों बाद मंदिर में राधारानी समेत अन्य विग्रहों के पहुंचने पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
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शोभायात्रा के लिए मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया था। वहीं, नगर की गलियों को भगवा ध्वजों से सजाकर उत्सव का माहौल बनाया गया। यात्रा में शामिल महिलाएं भक्ति गीतों पर झूमती नजर आईं। नगर के लोगों ने राधा रानी की जगह-जगह पूजा अर्चना के साथ ही स्टॉल लगाकर जलपान कराया।
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महिलाओं ने राधारानी, बांके बिहारी, बलदाऊ जी, गरुड़ जी, गणेश जी और हनुमान जी की प्रतिमाओं का आकर्षक शृंगार किया। समिति के अध्यक्ष राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि 43 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद यह शुभ दिन आया है, जब राधारानी बांके बिहारी के साथ मंदिर में विराजमान हुई हैं। पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल है। बता दें कि 16 अप्रैल 1983 को मंदिर से मूर्तियां चोरी हुई थी। कानूनी प्रक्रिया के बाद पिछले साल सितंबर में मंदिर समिति को अदालत के आदेश पर मूर्तियां मिली हैं। अब भव्य आयोजन कर उन्हें स्थापित कराया जा रहा है।