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Kanpur News: उर्सला में भर्ती अखिलेश दुबे की बीमारी पर खड़े हो रहे सवाल
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कानपुर। उर्सला में भर्ती अखिलेश दुबे की बीमारी पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। अखिलेश दुबे मुक्ति मोर्चा के सदस्यों ने जिलाधिकारी व जिला जज को ज्ञापन दिया है। इसमें कहा गया है कि उसे हृदय संबंधी बीमारी है तो कार्डियोलॉजी की जगह उर्सला में इलाज कैसे किया जा रहा है। उर्सला के डॉक्टरों का कहना है कि अखिलेश को ऑक्सीजन पर रखा गया है पर बीपी स्थिर नहीं हो रहा है। इलाज कर रहे डॉक्टरों के अनुसार भर्ती होने के बाद से 10 प्रतिशत हालत में सुधार है। बीपी, शुगर के अलावा किडनी, लिवर, फेफड़े में भी समस्या है और हीमोग्लोबिन भी कम है।
डॉक्टरों के अनुसार अखिलेश दुबे जिस दिन उर्सला में भर्ती हुआ, उस दिन शुगर 400 से 450 हो गया और बार-बार ऊपर नीचे होता रहा। अभी भी शुगर 350 पर ही बना हुआ है। वह जेल से बेहोशी की हालत में लाया गया था और अभी भी बीपी और शुगर में उतार-चढ़ाव के चलते बेहोशी जैसी स्थिति बनी हुई है। बिना ऑक्सीजन के सांस लेने में कठिनाई हो रही है। गुरुवार को इलाज कर रहे डॉक्टर को देखकर अखिलेश रो दिया और बोला कि मैं बचूंगा या नहीं।
डॉक्टर आईसीयू में रखकर लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार अखिलेश के फेफड़ों में संक्रमण है, खांसी भी आ रही है और लिवर में सूजन है। इसके चलते वह कुछ खा नहीं पा रहा है। पेशाब में संक्रमण के चलते जलन की शिकायत है। किडनी में भी समस्या है। सिरम क्रिएटनिन भी बढ़ा है। थोड़ी-थोड़ी देर में बेहोशी सी आ जाती है। वजन भी करीब 10 किलो कम हुआ है। आईसीयू इंचार्ज डॉ. सपन गुप्ता ने बताया कि अखिलेश दुबे की हालत ठीक नहीं है। स्थिति में जल्द से जल्द सुधार हो इसकी कोशिशें की जा रही हैं। बिना ऑक्सीजन के 10 मिनट भी सही से सांस नहीं ले पा रहा है। बीपी में भी बहुत उतार चढ़ाव हो रहा है।
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उर्सला के कई डॉक्टर और स्टाफ का कहना है कि अखिलेश जबरदस्ती बेड पर लेटा हुआ है। उसे कुछ नहीं हुआ है। बीमारी का बहाना बनाकर जेल जाने से बचना चाहता है। अभी तक पूरी तरह ठीक था। अब एक साथ कई तरह की गंभीर बीमारियां बता दीं और फिर भी वह उर्सला में ही इलाज करा रहा है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि शुगर के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन लगा रहे हैं और उसके जोड़ों और कमर में भी दर्द की समस्या है। सिरदर्द और चक्कर भी आ रहा है जिसका कारण पहले से सर्वाइकल है। डॉ. शैलेंद्र ने बताया कि एमआरआई कराया है। शुक्रवार को पता चलेगा कि उसे अभी यहां भर्ती रखना है या रेफर करना है।
डीएम से शिकायत करने पहुंचीं अखिलेश दुबे मुक्ति मोर्चा की सदस्य प्रज्ञा त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि अखिलेश शातिर अपराधी है। एक मामले में हाईकोर्ट तक से उसकी जमानत खारिज हो चुकी है और इतने शातिर अपराधी को बेवजह अस्पताल में भर्ती रखना सुरक्षा के लिए खतरा है। अखिलेश ने हृदय संबंधी बीमारी की बात कही है जबकि इसके लिए उसे कार्डियोलॉजी में भर्ती कराया जाना चाहिए था न कि उर्सला के आईसीयू में। उर्सला के जिस डॉक्टर की देखरेख में उसे भर्ती किया गया है, वह खुद फर्जी मेडिकल बनाने के मामले में जेल भेजा जा चुका है। इसके पहले भी डीएम और जिला जज ने निरीक्षण के दौरान अखिलेश को फर्जी तरीके से अस्पताल में भर्ती पाया था जिसके बाद कार्रवाई भी की गई थी। बार-बार बीमारी का बहाना बनाकर जेल से अस्पताल में भर्ती होना आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा है। जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रज्ञा ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के साथ शासन-प्रशासन के कई अधिकारियों को भी शिकायती पत्र भेजा है। ज्ञापन देने वालों में रवि सतीजा, सौरभ भदौरिया आदि शामिल रहे।
वर्जन-
शिकायतों के आरोपों की जांच के लिए सीएमओ को पत्र भेज दिया है। उनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जितेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी
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डॉक्टरों के अनुसार अखिलेश दुबे जिस दिन उर्सला में भर्ती हुआ, उस दिन शुगर 400 से 450 हो गया और बार-बार ऊपर नीचे होता रहा। अभी भी शुगर 350 पर ही बना हुआ है। वह जेल से बेहोशी की हालत में लाया गया था और अभी भी बीपी और शुगर में उतार-चढ़ाव के चलते बेहोशी जैसी स्थिति बनी हुई है। बिना ऑक्सीजन के सांस लेने में कठिनाई हो रही है। गुरुवार को इलाज कर रहे डॉक्टर को देखकर अखिलेश रो दिया और बोला कि मैं बचूंगा या नहीं।
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डॉक्टर आईसीयू में रखकर लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार अखिलेश के फेफड़ों में संक्रमण है, खांसी भी आ रही है और लिवर में सूजन है। इसके चलते वह कुछ खा नहीं पा रहा है। पेशाब में संक्रमण के चलते जलन की शिकायत है। किडनी में भी समस्या है। सिरम क्रिएटनिन भी बढ़ा है। थोड़ी-थोड़ी देर में बेहोशी सी आ जाती है। वजन भी करीब 10 किलो कम हुआ है। आईसीयू इंचार्ज डॉ. सपन गुप्ता ने बताया कि अखिलेश दुबे की हालत ठीक नहीं है। स्थिति में जल्द से जल्द सुधार हो इसकी कोशिशें की जा रही हैं। बिना ऑक्सीजन के 10 मिनट भी सही से सांस नहीं ले पा रहा है। बीपी में भी बहुत उतार चढ़ाव हो रहा है।
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उर्सला के कई डॉक्टर और स्टाफ का कहना है कि अखिलेश जबरदस्ती बेड पर लेटा हुआ है। उसे कुछ नहीं हुआ है। बीमारी का बहाना बनाकर जेल जाने से बचना चाहता है। अभी तक पूरी तरह ठीक था। अब एक साथ कई तरह की गंभीर बीमारियां बता दीं और फिर भी वह उर्सला में ही इलाज करा रहा है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि शुगर के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन लगा रहे हैं और उसके जोड़ों और कमर में भी दर्द की समस्या है। सिरदर्द और चक्कर भी आ रहा है जिसका कारण पहले से सर्वाइकल है। डॉ. शैलेंद्र ने बताया कि एमआरआई कराया है। शुक्रवार को पता चलेगा कि उसे अभी यहां भर्ती रखना है या रेफर करना है।
डीएम से शिकायत करने पहुंचीं अखिलेश दुबे मुक्ति मोर्चा की सदस्य प्रज्ञा त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि अखिलेश शातिर अपराधी है। एक मामले में हाईकोर्ट तक से उसकी जमानत खारिज हो चुकी है और इतने शातिर अपराधी को बेवजह अस्पताल में भर्ती रखना सुरक्षा के लिए खतरा है। अखिलेश ने हृदय संबंधी बीमारी की बात कही है जबकि इसके लिए उसे कार्डियोलॉजी में भर्ती कराया जाना चाहिए था न कि उर्सला के आईसीयू में। उर्सला के जिस डॉक्टर की देखरेख में उसे भर्ती किया गया है, वह खुद फर्जी मेडिकल बनाने के मामले में जेल भेजा जा चुका है। इसके पहले भी डीएम और जिला जज ने निरीक्षण के दौरान अखिलेश को फर्जी तरीके से अस्पताल में भर्ती पाया था जिसके बाद कार्रवाई भी की गई थी। बार-बार बीमारी का बहाना बनाकर जेल से अस्पताल में भर्ती होना आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा है। जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रज्ञा ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के साथ शासन-प्रशासन के कई अधिकारियों को भी शिकायती पत्र भेजा है। ज्ञापन देने वालों में रवि सतीजा, सौरभ भदौरिया आदि शामिल रहे।
वर्जन-
शिकायतों के आरोपों की जांच के लिए सीएमओ को पत्र भेज दिया है। उनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जितेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी