Mahoba: दिव्य धर्म सभा में पुरी पीठाधीश्वर का लोगों से संवाद, बोले- वेदों की महत्ता को नकार नहीं सकता विज्ञान
कबरई कस्बे के विवेकनगर में दिव्य धर्म सभा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें पुरी पीठाधीश्वर निश्चलानंद सरस्वती महाराज लोगों से संवाद कर रहे हैं। दूसरे दिन उन्होंने कहा कि विज्ञान वेद-पुराण की महत्ता को नकार नहीं सकता है।
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महोबा के कबरई कस्बा कबरई में दो दिवसीय प्रवास पर आए पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने दिव्य धर्म सभा में लोगों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि आज विज्ञान का युग है। विज्ञान भी सनातन धर्म की देन है। विज्ञान वेद-पुराण की महत्ता को नकार नहीं सकता।
धर्म सभा में पुरी पीठाधीश्वर ने धर्म, अध्यात्म, विज्ञान, राष्ट्रीयता, हिंदुत्व और हिंदू राज्य जैसे मुद्दों पर बात की। कहा कि भारत में निवास करने वाले सभी नागरिकों के पूर्वज हिंदू हैं और सनातन धर्म से पोषित हैं। उन्हें अपने अतीत का स्मरण कराकर वापस लाना होगा।
भारत में बढ़ रहे अंग्रेजी भाषा के चलन पर उन्होंने कहा कि देश में 40 फीसदी जनता हिंदी भाषा बोलती है। हिंदी में ही संस्कृत का समावेश है। वेद व पुराण का हिंदी संस्करण सनातन धर्म को सही तरीके से परिभाषित करता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कार व विचार पैदा करें।
आज की व्यवस्था में जो कुछ है, उसमें से अच्छाइयों को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका जीवन धर्म और राष्ट्ररक्षा के लिए है। अंतिम सांस तक भारतवर्ष के लिए कार्य करेंगे। इस दौरान प्रदीप पाठक, प्रभात पाठक, किशन पाठक, प्रकाश मिश्रा, अमित पाठक आदि ने गुरू दीक्षा ग्रहण की।
हिंदू राष्ट्र के लिए दृढ़ संकल्पित होना होगा
पहले दिन धर्म सभा में पीठाधीश्वर निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए हर व्यक्ति को दस व्यक्तियों को जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार के भरोसे न रहें। अपनी समस्याओं को मिलकर आपस में निराकरण करें।
80 फीसदी स्वयं के भरोसे, 16 फीसदी राज्य सरकार और चार फीसदी समस्याएं केंद्र से निस्तारित होती हैं। बताया कि आज जो कंप्यूटर युग चल रहा है। उस कंप्यूटर का आविष्कार भी पुरी पीठ की देन हैं। पुरी पीठ के 143वें शंकराचार्य ने वैदिक गणित की रचना की थी। उसी के तीन सूत्रों के आधार पर अंग्रेज शिष्यों ने आगे का अनुसंधान कर कंप्यूटर का आविष्कार किया।