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Kanpur News: 70 साल पुराना विवाद खत्म, 20 करोड़ की 20 बीघा जमीन पर केडीए का हक
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कानपुर। करीब 70 साल पुराने दहेली सुजानपुर जमीन विवाद में एडीएम वित्त की अदालत ने कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के पक्ष में फैसला सुनाया है। इस निर्णय के अनुसार, लगभग 20 करोड़ रुपये कीमत की 20 बीघा जमीन अब केडीए की मानी जाएगी। अदालत ने विशाल भारत कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी की ओर से दाखिल अमलदरामद प्रार्थनापत्र में दिए गए तथ्यों को खारिज कर दिया।
यह मामला मूल रूप से वर्ष 1956 में किए गए पट्टों से जुड़ा है। वर्ष 1982 में तत्कालीन एडीएम वित्त की ओर कुछ पट्टों को निरस्त कर दिया गया था जिसके बाद यह विवाद मंडलायुक्त कोर्ट और राजस्व परिषद तक पहुंचा। विभिन्न अदालतों में सुनवाई के बाद वर्ष 2015 में राजस्व परिषद ने एक फैसला सोसाइटी के पक्ष में सुनाया था। इसी आधार पर सोसाइटी ने खतौनी में अपना नाम दर्ज कराने के लिए एडीएम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
केडीए ने राजस्व परिषद के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। वर्ष 2022 में उच्च न्यायालय ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए इसे एडीएम वित्त की अदालत में भेजने का निर्देश दिया था। हाल ही में एडीएम वित्त डॉ. विवेक चतुर्वेदी की अदालत ने गहन सुनवाई के बाद यह निर्णय सुनाया कि जमीन पर केडीए का ही अधिकार रहेगा और सोसाइटी की मांगें खारिज कर दीं।
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यह मामला मूल रूप से वर्ष 1956 में किए गए पट्टों से जुड़ा है। वर्ष 1982 में तत्कालीन एडीएम वित्त की ओर कुछ पट्टों को निरस्त कर दिया गया था जिसके बाद यह विवाद मंडलायुक्त कोर्ट और राजस्व परिषद तक पहुंचा। विभिन्न अदालतों में सुनवाई के बाद वर्ष 2015 में राजस्व परिषद ने एक फैसला सोसाइटी के पक्ष में सुनाया था। इसी आधार पर सोसाइटी ने खतौनी में अपना नाम दर्ज कराने के लिए एडीएम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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केडीए ने राजस्व परिषद के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। वर्ष 2022 में उच्च न्यायालय ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए इसे एडीएम वित्त की अदालत में भेजने का निर्देश दिया था। हाल ही में एडीएम वित्त डॉ. विवेक चतुर्वेदी की अदालत ने गहन सुनवाई के बाद यह निर्णय सुनाया कि जमीन पर केडीए का ही अधिकार रहेगा और सोसाइटी की मांगें खारिज कर दीं।
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