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गणितीय मॉडल सूत्र के आधार पर दावा: आईआईटी प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल बोले- तीसरी लहर जनवरी में, पीक फरवरी तक
Thu, 23 Dec 2021 11:19 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 23 Dec 2021 11:19 PM IST
सार
अपने गणितीय मॉडल सूत्र के माध्यम से अध्ययन कर प्रो. मणींद्र ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और डेनमार्क जैसे देशों के आंकड़ों से पता चला है कि जिन देशों में नेचुरल इम्युनिटी है, उनमें अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या कम है।
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कोरोना मरीज। (प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : PTI
विस्तार
आपने वैक्सीन नहीं लगवाई और कोविड गाइडलाइन यानी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन नहीं कर रहे हैं तो सतर्क रहें। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा न करने वालों में नेचुरल इम्युनिटी (प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता) नहीं विकसित हुई है। आईआईटी के प्रोफेसर पद्मश्री मणींद्र अग्रवाल का दावा है कि वैक्सीन न लगवाने वालों, गाइडलाइन का पालन न करने वालों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों के लिए कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का संक्रमण होने का खतरा अधिक है।
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अपने गणितीय मॉडल सूत्र के माध्यम से अध्ययन कर प्रो. मणींद्र ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और डेनमार्क जैसे देशों के आंकड़ों से पता चला है कि जिन देशों में नेचुरल इम्युनिटी है, उनमें अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या कम है। कहा कि ब्रिटेन में नेचुरल इम्यूनिटी कम है। इस वजह से वहां ओमिक्रॉन का असर अधिक है।
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वहीं साउथ अफ्रीका में इम्युनिटी अधिक होने से असर कम है। प्रो. अग्रवाल ने कहा कि ओमिक्रॉन के खतरे को टाला नहीं जा सकता। केवल इससे सचेत रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनवरी में तीसरी लहर आने की आशंका है। फरवरी में इसका पीक आ सकता है। उन्होंने कहा कि सावधानी बरतें। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। इसी से ओमिक्रॉन से बचा जा सकता है।
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