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Kanpur News: भारत-यूके-आयरलैंड उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन में बोले प्रो. पाठक उच्च शिक्षा अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं
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शिखर सम्मेलन में शामिल सीएसजेएमयू कुलपति प्रो. विनय पाठक।
- फोटो : स्वयं
कानपुर। अब दुनिया भर में उच्च शिक्षा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। अन्य शहर भी तेजी से कौशल और तकनीक के साथ प्रगति कर रहे हैं। टियर 2 और टियर 3 शहरों के संस्थानों ने अपने एजुकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी से विकास किया है। अनुसंधान के साथ नए पाठ्यक्रमों को वर्तमान आवश्यकताओं के साथ अपनाया है।
यह बातें एआईयू अध्यक्ष और सीएसजेएमयू कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने गुरुवार को लंदन में दुनिया भर के शिक्षाविदों को संबोधित करने के दौरान कहीं।भारत-यूके-आयरलैंड उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन में हुए भारत-यूके अचीवर्स कार्यक्रम में प्रो. पाठक ने कहा कि दुनिया आपसी जुड़ाव, ज्ञान के आदान-प्रदान और वैश्विक सहयोग पर निर्भर है।
उच्च शिक्षा केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक-आर्थिक विकास, नवाचार और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने का माध्यम भी है। इसलिए, यह आवश्यक है कि हम पारंपरिक सीमाओं से परे जाकर सहयोग करें और एक समावेशी, सशक्त और टिकाऊ शैक्षिक भविष्य का निर्माण करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में छात्रों के पास न केवल डिग्री, बल्कि आवश्यक व्यवसायिक और तकनीकी कौशल भी होना चाहिए तभी वह जीवन की ऊंचाइयों में आगे बढ़ सकेंगे।
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लंदन के वेस्टमिंस्टर में हाउस ऑफ लॉर्ड्स पैलेस में आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश की बड़ी हस्तियां शिरकत कर रही हैं। इसमें जलवायु परिवर्तन से लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसी वैश्विक चुनौतियों पर विश्व के कई शिक्षाविद्, विश्वविद्यालय के कुलपति, नीति निर्माता मंथन करेंगे। कुलपति प्रो. पाठक ने बताया कि इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत, यूके, और आयरलैंड के शैक्षणिक संस्थानों के बीच गहरे संबंध स्थापित करना और साझेदारी को मजबूत करना है।
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यह बातें एआईयू अध्यक्ष और सीएसजेएमयू कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने गुरुवार को लंदन में दुनिया भर के शिक्षाविदों को संबोधित करने के दौरान कहीं।भारत-यूके-आयरलैंड उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन में हुए भारत-यूके अचीवर्स कार्यक्रम में प्रो. पाठक ने कहा कि दुनिया आपसी जुड़ाव, ज्ञान के आदान-प्रदान और वैश्विक सहयोग पर निर्भर है।
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उच्च शिक्षा केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक-आर्थिक विकास, नवाचार और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने का माध्यम भी है। इसलिए, यह आवश्यक है कि हम पारंपरिक सीमाओं से परे जाकर सहयोग करें और एक समावेशी, सशक्त और टिकाऊ शैक्षिक भविष्य का निर्माण करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में छात्रों के पास न केवल डिग्री, बल्कि आवश्यक व्यवसायिक और तकनीकी कौशल भी होना चाहिए तभी वह जीवन की ऊंचाइयों में आगे बढ़ सकेंगे।
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लंदन के वेस्टमिंस्टर में हाउस ऑफ लॉर्ड्स पैलेस में आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश की बड़ी हस्तियां शिरकत कर रही हैं। इसमें जलवायु परिवर्तन से लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसी वैश्विक चुनौतियों पर विश्व के कई शिक्षाविद्, विश्वविद्यालय के कुलपति, नीति निर्माता मंथन करेंगे। कुलपति प्रो. पाठक ने बताया कि इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत, यूके, और आयरलैंड के शैक्षणिक संस्थानों के बीच गहरे संबंध स्थापित करना और साझेदारी को मजबूत करना है।