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Kanpur News: 50 फीसदी गर्भवतियों में खून की कमी से बढ़ रही समस्याएं
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कानपुर। 50 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी से चार प्रमुख समस्याएं बढ़ रही हैं। इनमें उच्च रक्तचाप, शुगर, पोस्टपार्टम हैमरेज यानि डिलीवरी के बाद अधिक रक्तस्राव और संक्रमण शामिल है। ऐसे में जान जाने का भी खतरा रहता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर से मिलकर जांच कराएं और डाइट में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन जरूर लें। यह जानकारी कानपुर ऑब्स एंड गाइनी सोसाइटी की तिलकनगर स्थित एक होटल में आयोजित गैस्टोसिस कार्यशाला में अहमदाबाद से आए गैस्टोसिस इंडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष व वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अल्पेश गांधी ने दी।
कार्यक्रम की शुरुआत चीफ पैट्रन डॉ. मीरा अग्निहोत्री, डॉ. अल्पेश गांधी, अध्यक्ष डॉ. कल्पना दीक्षित, सचिव डॉ. रेशमा निगम ने दीप जलाकर की। डॉ. अल्पेश ने बताया कि डिलीवरी के बाद 300-500 एमएल रक्तस्राव सामान्य है लेकिन डेढ़ से दो लीटर रक्तस्राव खतरनाक है। सिलीगुड़ी से आए डॉ. प्रियांकुर रॉय ने बताया कि अगर पहली गर्भावस्था में महिला को हाई बीपी की समस्या होती है तो दोबारा में यह दिक्कत होने की संभावना बढ़ जाती है। संचालन डॉ. सीमा द्विवेदी ने किया। यहां पर डॉ. रेनू गुप्ता, डॉ. नीलम मिश्रा, डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. अनीता गौतम, डॉ. नीना गुप्ता. डॉ. कंचन सिंह, डॉ. किरन पांडे, डॉ. किरन सिन्हा आदि रहीं।
लखनऊ से आईं डॉ. प्रीति कुमार ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर बच्चों में कार्डियोवैस्कुलर की दिक्कत पैदा कर रहा है। इस ओर की गई लापरवाही आने वाली पीढ़ी को दिल का रोगी बना सकती है। उच्च रक्तचाप वाली गर्भवती महिलाएं अगर बीपी कंट्रोल नहीं करती हैं तो वह बच्चे में भी ब्लड प्रेशर, गुर्दे, मेमोरी लॉस और आंखों पर असर डाल सकता है। 10 से 15 फीसदी इसकी संभावना रहती है। कहा कि जिस महिला को हाई बीपी गर्भावस्था के दौरान रहता है, उसे नियमित तौर पर हर साल अपना फुल बॉडी चेकअप कराते रहना चाहिए।
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कार्यक्रम की शुरुआत चीफ पैट्रन डॉ. मीरा अग्निहोत्री, डॉ. अल्पेश गांधी, अध्यक्ष डॉ. कल्पना दीक्षित, सचिव डॉ. रेशमा निगम ने दीप जलाकर की। डॉ. अल्पेश ने बताया कि डिलीवरी के बाद 300-500 एमएल रक्तस्राव सामान्य है लेकिन डेढ़ से दो लीटर रक्तस्राव खतरनाक है। सिलीगुड़ी से आए डॉ. प्रियांकुर रॉय ने बताया कि अगर पहली गर्भावस्था में महिला को हाई बीपी की समस्या होती है तो दोबारा में यह दिक्कत होने की संभावना बढ़ जाती है। संचालन डॉ. सीमा द्विवेदी ने किया। यहां पर डॉ. रेनू गुप्ता, डॉ. नीलम मिश्रा, डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. अनीता गौतम, डॉ. नीना गुप्ता. डॉ. कंचन सिंह, डॉ. किरन पांडे, डॉ. किरन सिन्हा आदि रहीं।
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लखनऊ से आईं डॉ. प्रीति कुमार ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर बच्चों में कार्डियोवैस्कुलर की दिक्कत पैदा कर रहा है। इस ओर की गई लापरवाही आने वाली पीढ़ी को दिल का रोगी बना सकती है। उच्च रक्तचाप वाली गर्भवती महिलाएं अगर बीपी कंट्रोल नहीं करती हैं तो वह बच्चे में भी ब्लड प्रेशर, गुर्दे, मेमोरी लॉस और आंखों पर असर डाल सकता है। 10 से 15 फीसदी इसकी संभावना रहती है। कहा कि जिस महिला को हाई बीपी गर्भावस्था के दौरान रहता है, उसे नियमित तौर पर हर साल अपना फुल बॉडी चेकअप कराते रहना चाहिए।
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