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प्रो. मुन्ना सिंह का निलंबन स्थगित किया
अमर उजाला कानपुर
Updated Sun, 31 May 2015 03:19 AM IST
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शिक्षकों की सीधी भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों से घिरे चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह का निलंबन 28 मई को लखनऊ हाईकोर्ट ने स्थगित कर दिया है। हाईकोर्ट ने मामले की जांच जल्द पूरी करने के आदेश दिए हैं। जब तक जांच होगी, तब तक प्रो. मुन्ना सिंह छुट्टी पर रहेंगे। इसकी पुष्टि प्रो. मुन्ना सिंह के अधिवक्ता एसके कालिया और उनके असिस्टिंग काउंसिल रजत राजन सिंह ने की है। छुट्टी पर रहने के दौरान भी प्रो. मुन्ना सिंह को पूरा वेतन मिलेगा। हाईकोर्ट ने प्रो. मुन्ना सिंह की सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ की संबद्धता भी खत्म कर दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई छह हफ्तों के बाद होगी।
शिक्षकों की सीधी भर्ती में गड़बड़ी की प्रारंभिक जांच के बाद निलंबित किए गए कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह ने राज्यपाल/कुलाधिपति राम नाईक के आदेश को लखनऊ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने निलंबन को गलत ठहराते हुए पूरा वेतन दिए जाने की मांग की थी। इस मामले पर गुरुवार को लखनऊ हाईकोर्ट की जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की अदालत ने सुनवाई की। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने प्रो. मुन्ना सिंह के निलंबन आदेश को स्थगित कर दिया। सीनियर अधिवक्ता एसके कालिया के असिस्टिंग काउंसिल रजत राजन सिंह ने बताया कि प्रो. मुन्ना सिंह की ओर से छुट्टी पर जाने की अनुमति मांगी गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने मुहर लगा दी है। अब प्रो. मुन्ना सिंह कुलपति बने रहेंगे लेकिन राज्यपाल की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी की जांच पूरी होने तक वह छुट्टी पर रहेंगे। इससे जांच-पड़ताल में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। बताते चलें कि राज्यपाल राम नाईक ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, सीएसजूेएम यूनिवर्सिटी के कुलपति और मेरठ विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है, जो कि शिक्षक भर्ती की जांच कर रही हैं। इस मामले को दो महीने के अंदर रिपोर्ट देनी है।
इस ग्राउंड पर मिली राहत
उत्तर प्रदेश कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम 1958 में प्रावधान है कि कुलपति को निलंबित नहीं किया जा सकता है। यह अधिकार के किसी के पास नहीं है। किसी दूसरे विश्वविद्यालय से संबद्धता भी नहीं दी जा सकती है। इस अधिनियम में कुलपति को हटाने या उन्हें छुट्टी पर भेजने का प्रावधान है। इसी ग्राउंड को लेते हुए ही हाईकोर्ट ने प्रो. मुन्ना सिंह का निलंबन स्थगित कर दिया है। संबद्धता समाप्त कर दी है। उत्तर प्रदेश कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम 1958 में ही कुलपति के बर्खास्तगी का प्रावधान भी है। यह कार्रवाई राज्यपाल/ कुलाधिपति कर सकते हैं लेकिन जांच-पड़ताल के बाद। अब मामले की जांच चल रही है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद राज्यपाल आगे की कार्रवाई कर सकत हैं।
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शिक्षकों की सीधी भर्ती में गड़बड़ी की प्रारंभिक जांच के बाद निलंबित किए गए कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह ने राज्यपाल/कुलाधिपति राम नाईक के आदेश को लखनऊ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने निलंबन को गलत ठहराते हुए पूरा वेतन दिए जाने की मांग की थी। इस मामले पर गुरुवार को लखनऊ हाईकोर्ट की जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की अदालत ने सुनवाई की। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने प्रो. मुन्ना सिंह के निलंबन आदेश को स्थगित कर दिया। सीनियर अधिवक्ता एसके कालिया के असिस्टिंग काउंसिल रजत राजन सिंह ने बताया कि प्रो. मुन्ना सिंह की ओर से छुट्टी पर जाने की अनुमति मांगी गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने मुहर लगा दी है। अब प्रो. मुन्ना सिंह कुलपति बने रहेंगे लेकिन राज्यपाल की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी की जांच पूरी होने तक वह छुट्टी पर रहेंगे। इससे जांच-पड़ताल में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। बताते चलें कि राज्यपाल राम नाईक ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, सीएसजूेएम यूनिवर्सिटी के कुलपति और मेरठ विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है, जो कि शिक्षक भर्ती की जांच कर रही हैं। इस मामले को दो महीने के अंदर रिपोर्ट देनी है।
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इस ग्राउंड पर मिली राहत
उत्तर प्रदेश कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम 1958 में प्रावधान है कि कुलपति को निलंबित नहीं किया जा सकता है। यह अधिकार के किसी के पास नहीं है। किसी दूसरे विश्वविद्यालय से संबद्धता भी नहीं दी जा सकती है। इस अधिनियम में कुलपति को हटाने या उन्हें छुट्टी पर भेजने का प्रावधान है। इसी ग्राउंड को लेते हुए ही हाईकोर्ट ने प्रो. मुन्ना सिंह का निलंबन स्थगित कर दिया है। संबद्धता समाप्त कर दी है। उत्तर प्रदेश कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम 1958 में ही कुलपति के बर्खास्तगी का प्रावधान भी है। यह कार्रवाई राज्यपाल/ कुलाधिपति कर सकते हैं लेकिन जांच-पड़ताल के बाद। अब मामले की जांच चल रही है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद राज्यपाल आगे की कार्रवाई कर सकत हैं।
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