फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   private school became modern madrasa in kanpur

योगी सरकार ने कसा शिकंजा तो 'प्राइवेट स्कूल बन गए आधुनिक मदरसे'

Sat, 06 Jan 2018 05:57 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 06 Jan 2018 05:57 PM IST
विज्ञापन
private school became modern madrasa in kanpur
डेमो पिक
बेसिक शिक्षा विभाग ने गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों पर शिकंजा कसना शुरू किया तो मुस्लिम बहुल इलाकों में अचानक मदरसों की संख्या बढ़ गई। यूपी के कानपुर के  इन इलाकों में बड़ी संख्या में मान्यता के बिना स्कूल चल रहे थे। जब सख्ती हुई तो यह स्कूल आधुनिक मदरसों में तब्दील हो गए। यहां पर अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, संस्कृत, गणित, विज्ञान जैसे विषय पढ़ाए जा रहे हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से इन मदरसों को मानक पूरे होने पर मान्यता भी मिल गई है।
विज्ञापन



बेसिक शिक्षा विभाग का चला था डंडा
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने शहर में चल रहे गैरमान्यता प्राप्त छोटे स्कूलों पर सख्ती की। नए मानकों के हिसाब से स्कूल चलाने के निर्देश दिये और न पूरा करने पर स्कूल बंद करने को कहा। मानक पूरा करना आसान नहीं था तो ऐसे में इन स्कूलों के संचालकों ने अरबी फारसी बोर्ड से मान्यता करा ली। वजह यह है कि मदरसों के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मानक थोड़े आसान हैं।
विज्ञापन



यह स्कूल बने आधुनिक मदरसे
कर्नलगंज का अर्श पब्लिक स्कूल अब मदरसा तालीमुल अर्श में बदल गया है। चमनगंज का टेंडरफुट मॉडल स्कूल का नाम मदरसा हमीदुल उलूम और कैंब्रिज पब्लिक स्कूल अब मदरसा कैंब्रिज स्कूल हो गया है। इसी तरह बांसमंडी का लिटिल बॉसम स्कूल और चीना पार्क का लिटिल स्टेप स्कूल भी मदरसे में परिवर्तित हो चुके हैं। कर्नलगंज के मदरसा तालीमुल अर्श के प्रबंधक अब्दुल वहीद खां ने बताया कि वह अपने मदरसे में सभी बच्चों को कॉन्वेंट स्कूल जैसी आधुनिक शिक्षा देते हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार की मंशा भी यही है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह हैं दोनों विभागों के मानकों में फर्क
बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन प्राथमिक स्तर पर चल रहे पब्लिक स्कूलों की मान्यता के लिए 20 बाई 20 फिट के छह कमरे, बड़ा हॉलनुमा ऑफिस, छह बीएड उत्तीर्ण प्रशिक्षित शिक्षिक-शिक्षिकाएं, भूकंपरोधी इमारत होनी चाहिए। जबकि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अरबी-फारसी बोर्ड से मान्यता के लिए 15 बाई 20 फिट के तीन कमरे, एक हॉलनुमा ऑफिस, अरबी-फारसी बोर्ड की डिग्री (आलिम, कामिल, फाजिल आदि) वाले प्रशिक्षित शिक्षक-शिक्षिकाओं को होना चाहिए। 



अरबी-फारसी बोर्ड से तमाम शिक्षण संस्थानों को मदरसे की मान्यता मिली है। मान्यता के लिए लखनऊ में अरबी-फारसी बोर्ड के रजिस्ट्रार दफ्तर से संपर्क किया जा सकता है। मानक पूरे होने पर विभाग से मान्यता मिल जाएगी।
- डॉ. प्रियंका अवस्थी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed