Banda: बेल की सुनवाई से एक दिन पहले बंदी की मौत, छात्रा के साथ छेड़छाड़ का था आरोपी, परिजनों को हत्या की आशंका
Banda Crime: जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा का कहना है कि जेल के हाता में सुबह नौ बजे बंदी के अचेत गिरे होने की जानकारी बंदियों से डिप्टी जेलर को मिली थी, जिसके बाद फौरन उसे कारागार के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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बांदा जिले में जमानत को लेकर सुनवाई से एक दिन पहले मंडलीय कारागार में बंद एक बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वह प्राथमिक विद्यालय में अनुदेशक पद पर तैनात था, जहां पिछले साल उस पर दलित परिवार की एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगा था।
जेल प्रशासन को वह रविवार की सुबह जेल के हाता में अचेत अवस्था में मिला। उसे कारागार के अस्पताल में भर्ती किया गया और फिर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पिता ने षणयंत्र के तहत हत्या का आरोप लगाया है, जबकि जेल प्रशासन मौत की वजह हार्ट अटैक बता रही है।
शहर कोतवाली के परशुराम तालाब के रहने वाले अजीत कुमार कुशवाहा बबेरू के पास बिसंडा थाना क्षेत्र के भुराने पुरवा गांव के प्राथमिक विद्यालय में अनुदेशक पद पर तैनात था। पिछले साल 21 जून को उस पर दलित परिवार की एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था।
बैरक नंबर सात में था बंद
बिसंडा थाने में उसके खिलाफ एससीएसटी, छेड़छाड़, पाक्सो एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी। इस मामले में उसको दो मार्च को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया गया था। यहां वह बैरक नंबर सात में बंद था। उसके बाद से परिजन उसकी जमानत को लेकर हाईकोर्ट में अर्जी दे रहे थे।
पोस्टमार्टम कराने और जांच की मांग
पिता वासुदेव के अनुसार दो बार उसकी अर्जी खारिज हो गई थी। तीसरी बार सुनवाई के लिए 11 सितंबर की तारीख तय थी। लेकिन, एक दिन पहले उसकी मौत हो गई। उन्होंने हत्या की आशंका जताते हुए पैनल व वीडियोग्राफी में पोस्टमार्टम कराने और जांच की मांग की है।
मौत का कारण मेजर हार्ट अटैक है
जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा का कहना है कि जेल के हाता में सुबह नौ बजे बंदी के अचेत गिरे होने की जानकारी बंदियों से डिप्टी जेलर को मिली थी, जिसके बाद फौरन उसे कारागार के अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत नाजुक होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। उसकी मौत का कारण मेजर हार्ट अटैक है।
रक्षाबंधन पर बहन को देख बोला था- मैं बेकसूर हूं, जरूर न्याय मिलेगा मुझे
मैं बेकसूर हूं। मुझे फंसाया गया है। जरूर एक दिन मुझे न्याय मिलेगा। यह कहते हुए आंसू छलक गए, जिसे देख जेल में राखी बांधने आई उसकी बहन भी रोने लगी। पिता वासुदेव ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन उसकी बहन उर्मिला, मां गीता देवी व पत्नी विद्योत्तमा जेल में अजीत से मिलने गईं थीं।
न्यायालय में उसे मिलेगा न्याय
उस वक्त अजीत बिल्कुल स्वस्थ थे और उन्हें कोई तकलीफ नहीं थी। वह बार-बार यही कहते थे कि वह बेकसूर है। उसे फंसाया गया है। उसे उम्मीद थी कि जरूर न्यायालय में उसे न्याय मिलेगा और सच्चाई सबके सामने आएगी और उसकी गई इज्जत उसे वापस मिलेगी।