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जेल में हो गई बंदी की मौत, घरवाले बोले-पीट-पीटकर मार डाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 22 Oct 2017 09:35 AM IST
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जिला कारागार कानपुर देहात
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यूपी के कानपुर देहात माती जिला जेल में गैंगस्टर के मामले बंद अकबरपुर के रनियां निवासी राघवेंद्र उर्फ लालू (35) की गुरुवार की रात संदिग्ध हालात में मौत हो गई। जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जेल कर्मचारी शव छोड़कर चले गए। शुक्रवार सुबह पुलिस ने परिजनों को हार्ट अटैक से मौत की सूचना दी तो घर पर कोहराम मच गया। अस्पताल पहुंचे परिजनों ने शरीर पर काले निशान देखकर मारपीट किए जाने का आरोप लगाकर हंगामा किया। मौके पर पहुंचे एसडीएम और सीओ ने समझा-बुझाकर उन्हें शांत कराया। पोस्टमार्टम में मौत की कारण स्पष्ट न होने पर बिसरा सुरक्षित रखा गया है।
मूलरूप से गजनेर के गोगूमऊ निवासी राघवेंद्र अकबरपुर के रनियां क्षेत्र में परिवार समेत रह रहा था। 12 सितंबर को पुलिस ने उसके खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई कर जेल भेजा था। गुरुवार को अचानक राघवेंद्र को पेट दर्द और उल्टियां आने पर जेल अस्पताल मेें भर्ती कराया गया था। उसकी हालत में सुधार न होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। रात करीब 12:50 बजे जेल पुलिस कर्मी उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने किया हंगामा
इधर, शुक्रवार को राघवेंद्र की मौत की जानकारी मिलते ही पत्नी वर्षा, मां रमन, पिता अमर सिंह, चाचा संजीव, बहन मोनी और बहनोई अमित अस्पताल पहुंच गए। परिजनों ने मारपीट किए जाने का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया। चाचा संजीव सिंह ने बताया कि 17 अक्टूबर को राघवेंद्र से उसकी मां, बहन और बहनोई मिलकर आए थे। उस वक्त तब वह ठीक था। फिर अचानक उसकी तबियत कैसे खराब हो सकती है।
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दाहिने हाथ पर काला निशान पड़ा था
उनका आरोप है कि राघवेंद्र की गर्दन, कान और दाहिने हाथ पर काला पड़ा था, जिससे साफ है कि उसके साथ जेल में मारपीट की गई, जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने जेल प्रशासन पर बीमारी की बात कहकर उन्हें गुमराह करने का आरोप लगाया। परिजनों के शव न ले जाने की सूचना पर एसडीएम मनोज कुमार और सीओ मौके पर पहुंचे। इसके बाद किसी तरह से परिजनों को समझा-बुझाकर शव उनके सुपुर्द कर दिया।
बोले जिम्मेदार...
पेट दर्द और उल्टियां आने पर बंदी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, वहां इलाज के दौरान मौत हो गई।-आरके पांडेय, जेलर
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मूलरूप से गजनेर के गोगूमऊ निवासी राघवेंद्र अकबरपुर के रनियां क्षेत्र में परिवार समेत रह रहा था। 12 सितंबर को पुलिस ने उसके खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई कर जेल भेजा था। गुरुवार को अचानक राघवेंद्र को पेट दर्द और उल्टियां आने पर जेल अस्पताल मेें भर्ती कराया गया था। उसकी हालत में सुधार न होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। रात करीब 12:50 बजे जेल पुलिस कर्मी उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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परिजनों ने किया हंगामा
इधर, शुक्रवार को राघवेंद्र की मौत की जानकारी मिलते ही पत्नी वर्षा, मां रमन, पिता अमर सिंह, चाचा संजीव, बहन मोनी और बहनोई अमित अस्पताल पहुंच गए। परिजनों ने मारपीट किए जाने का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया। चाचा संजीव सिंह ने बताया कि 17 अक्टूबर को राघवेंद्र से उसकी मां, बहन और बहनोई मिलकर आए थे। उस वक्त तब वह ठीक था। फिर अचानक उसकी तबियत कैसे खराब हो सकती है।
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दाहिने हाथ पर काला निशान पड़ा था
उनका आरोप है कि राघवेंद्र की गर्दन, कान और दाहिने हाथ पर काला पड़ा था, जिससे साफ है कि उसके साथ जेल में मारपीट की गई, जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने जेल प्रशासन पर बीमारी की बात कहकर उन्हें गुमराह करने का आरोप लगाया। परिजनों के शव न ले जाने की सूचना पर एसडीएम मनोज कुमार और सीओ मौके पर पहुंचे। इसके बाद किसी तरह से परिजनों को समझा-बुझाकर शव उनके सुपुर्द कर दिया।
बोले जिम्मेदार...
पेट दर्द और उल्टियां आने पर बंदी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, वहां इलाज के दौरान मौत हो गई।-आरके पांडेय, जेलर