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दिल्ली से चली राष्ट्रपति की चिट्ठी, यूपी में अटक गई

Mon, 02 Aug 2021 05:26 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 02 Aug 2021 05:26 PM IST
सार

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 25 जून को तीन दिवसीय दौरे पर कानपुर आए थे। उन्होंने 26 जून को शहर के नेताओं, उद्यमियों और व्यापारियों से मुलाकात कर समस्याएं और जरूरतें पूछीं। मुलाकात करने वालों ने उनके सामने कई मसले उठाए।

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President's letter from Delhi, got stuck in UP
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर की समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रपति भवन से चली चिट्ठियां प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में आकर अटक गई हैं। संबंधित विभागों ने समस्याएं बताने वालों को यह भी अवगत नहीं कराया कि राष्ट्रपति भवन से आए पत्र पर अब आगे क्या कार्यवाही हो रही है। शहर के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि मसला राष्ट्रपति के सामने पहुंचा है, लिहाजा कुछ न कुछ होगा जरूर।
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मगर एक माह बाद भी कहीं कोई हलचल नहीं दिख रही है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 25 जून को तीन दिवसीय दौरे पर कानपुर आए थे। उन्होंने 26 जून को शहर के नेताओं, उद्यमियों और व्यापारियों से मुलाकात कर समस्याएं और जरूरतें पूछीं। मुलाकात करने वालों ने उनके सामने कई मसले उठाए।
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इस पर राष्ट्रपति ने भरोसा दिया था कि वे जरूरतों को पूरा कराने का भरसक प्रयास करेंगे। उनकी तरफ से प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को पत्र भी लिखे गए। मुख्य सचिव ने उन्हें संबंधित विभागों के पास भेजा, लेकिन इन विभागों ने समस्या या जरूरत बताने वालों को अवगत नहीं कराया कि उनके मसले पर क्या प्रगति हुई? समस्या उठाने वाले इस बात से परेशान हैं कि अब आगे किससे पैरवी करें। 
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व्यापारियों ने की थी शहर में पीजीआई या एम्स की मांग 
उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा ने कोरोनाकाल में इलाज को लेकर हुई परेशानियों को देखते हुए शहर में पीजीआई या एम्स जैसे अस्पताल की स्थापना की मांग की थी। यह मांग कानपुर उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष टीकमचंद सेठिया व मणिकांत जैन, वीरांगना झलकारी बाई विकास समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार कोरी समेत कई अन्य ने भी की थी।

इस 19 जुलाई को मुकुंद मिश्रा के पास राष्ट्रपति भवन से पत्र आया कि संबंधित प्रकरण प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को भेजा गया है। मुकुंद मिश्रा का कहना है कि मुख्य सचिव की ओर से यह प्रकरण संबंधित विभाग को भेजा गया है, लेकिन उनकी ओर से अवगत नहीं कराया गया कि अब आगे क्या हो रहा है। पारदर्शिता के लिए शासन स्तर के विभागों को पत्राचार के जरिये प्रकरण की प्रगति से अवगत कराना चाहिए था। 

अस्पतालों के लिए राष्ट्रपति भवन ने भेजा पत्र
महापौर प्रमिला पांडेय ने नगर निगम के सभी अस्पतालों को चालू करने, उनमें चिकित्सा सुविधाएं बहाल कराने का आग्रह किया था। अब राष्ट्रपति भवन से उन्हें पत्र मिला है कि संबंधित प्रकरण से प्रदेश के मुख्य सचिव को अवगत करा दिया गया है। महापौर का कहना है कि इसकी पैरवी करके नगर निगम के सभी अस्पताल चालू करवाने का प्रयास करेंगी। चाचा नेहरू अस्पताल को चालू करने की तैयारियां की जा रही हैं।

भाजपा दक्षिण जिलाध्यक्ष की चिट्ठी का आया जवाब
भाजपा की दक्षिण जिला इकाई अध्यक्ष डॉ. वीना आर्या ने राष्ट्रपति को पत्र देकर पीएसीएल कंपनी में शहर के अधिकतर लोगों का धन फंसा होने की बात बताई थी। अनुरोध किया था कि लोगों का पैसा दिलाया जाए। राष्ट्रपति भवन से उनके पास एक चिट्ठी आई है, जिसमें बताया गया है कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इससे संबंधित अधिकारी से अपडेट लेने को भी कहा गया है।

ये अभी प्रस्ताव ही नहीं भेज पाए
राष्ट्रपति से मिलने वालों में पंडित दीनदयाल शोध केंद्र के पूर्व निदेशक श्यामबाबू गुप्त ने भी जीएसवीएम को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की मांग की थी। इस पर राष्ट्रपति ने एक प्रस्ताव बनाकर देने को कहा था। श्याम बाबू ने बताया कि व्यस्तता की वजह से वह अभी प्रस्ताव भेज नहीं पाए हैं। अब अगस्त में प्रस्ताव भेजेंगे।

सिर्फ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय से भेजे पत्रों की जानकारी 
पीस यूनिटी एंड स्पोर्ट्स डेवलपमेंट एसोसिएशन के सचिव शाहिद कामरान खान ने शहर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट और सेंटर फॉर एक्सीलेंस फॉर एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट के अलावा कानपुर में केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग की थी। इस पर राष्ट्रपति भवन ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा। प्रधानमंत्री कार्यालय से पत्र प्रदेश के मुख्य सचिव के पास आया, लेकिन मुख्य सचिव के पास से कहां गया, इसकी जानकारी शाहिद कामरान खान को नहीं दी गई, जबकि राष्ट्रपति भवन से प्रेषित पत्र में स्पष्ट लिखा है कि आगे की प्रगति सीधे समस्या या सुझाव देने वाले को ही दी जाए। 
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