{"_id":"60c5e4bf8ebc3e64ba598537","slug":"preparations-for-war-against-corona-s-third-wave-hallet-hospital-denies-report-mri-useless-in-ursula","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कोरोना की तीसरी लहर से जंग की तैयारी: रिपोर्ट से हैलट का इनकार, उर्सला में एमआरआई बेकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना की तीसरी लहर से जंग की तैयारी: रिपोर्ट से हैलट का इनकार, उर्सला में एमआरआई बेकार
Sun, 13 Jun 2021 04:28 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 13 Jun 2021 04:28 PM IST
सार
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग ने उर्सला की एमआरआई जांच की फिल्म पढ़कर रिपोर्ट बनाने से इनकार कर दिया है। अभी तक उर्सला की एमआरआई फिल्म रेडियोलॉजी विभाग भेज दी जाती थी।
विज्ञापन
हैलट अस्पताल
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कानपुर उर्सला अस्पताल में रोगियों की एमआरआई जांच का संकट और गहरा हो गया है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग ने उर्सला की एमआरआई जांच की फिल्म पढ़कर रिपोर्ट बनाने से इनकार कर दिया है। अभी तक उर्सला की एमआरआई फिल्म रेडियोलॉजी विभाग भेज दी जाती थी।
यहां से एक सप्ताह में रिपोर्ट बनाकर उर्सला को दी जाती थी। अब वह भी नहीं हो पाएगा। ऐसे में रोगियों को अपने डॉक्टर या फिर किसी निजी रेडियोलॉजिस्ट को फीस देकर रिपोर्ट बनवानी पड़ेगी। निजी डायग्नोस्टिक्स सेंटरों में एमआरआई की जांच कराने में रोगी के पांच हजार रुपये लग जाते हैं।
विज्ञापन
यहां से एक सप्ताह में रिपोर्ट बनाकर उर्सला को दी जाती थी। अब वह भी नहीं हो पाएगा। ऐसे में रोगियों को अपने डॉक्टर या फिर किसी निजी रेडियोलॉजिस्ट को फीस देकर रिपोर्ट बनवानी पड़ेगी। निजी डायग्नोस्टिक्स सेंटरों में एमआरआई की जांच कराने में रोगी के पांच हजार रुपये लग जाते हैं।
विज्ञापन
उर्सला में सिर्फ ढाई हजार रुपये में जांच होती है। उर्सला की एमआरआई मशीन अच्छी क्वालिटी की है। इससे जांच रिपोर्ट स्पष्ट होती है, लेकिन एमआरआई फिल्म देखकर रोगी की बीमारी बता पाने वाला कोई रेडियोलॉजिस्ट अस्पताल में नहीं है। इससे मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग की मदद ली जाती थी।
उर्सला के सीएमएस डॉ. अनिल निगम ने बताया कि उन्होंने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल से अनुरोध किया था कि एमआरआई की रिपोर्ट एक सप्ताह के बजाय कुछ जल्दी करवा दें, जिससे रोगी परेशान न हों। बाद में रेडियोलॉजी विभाग से संदेश आ गया कि विभाग में डॉक्टर नहीं हैं।
इससे अब एमआरआई रिपोर्ट नहीं बन पाएगी। बता दें कि सरकारी अस्पतालों में एमआरआई की सुविधा सिर्फ उर्सला में ही है। हैलट के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को मशीन आवंटित तो हो गई है, लेकिन अभी स्थापित नहीं हुई है। हैलट को सुपर स्पेशियलिटी के हैंडओवर होने के बाद ही लग पाएगी।
उर्सला के सीएमएस डॉ. अनिल निगम ने बताया कि उन्होंने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल से अनुरोध किया था कि एमआरआई की रिपोर्ट एक सप्ताह के बजाय कुछ जल्दी करवा दें, जिससे रोगी परेशान न हों। बाद में रेडियोलॉजी विभाग से संदेश आ गया कि विभाग में डॉक्टर नहीं हैं।
इससे अब एमआरआई रिपोर्ट नहीं बन पाएगी। बता दें कि सरकारी अस्पतालों में एमआरआई की सुविधा सिर्फ उर्सला में ही है। हैलट के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को मशीन आवंटित तो हो गई है, लेकिन अभी स्थापित नहीं हुई है। हैलट को सुपर स्पेशियलिटी के हैंडओवर होने के बाद ही लग पाएगी।