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Kanpur News: झिझक छोड़ किया भैंस पालन तो पटरी पर लौटी प्रेमवती की गृहस्थी
Thu, 01 Feb 2024 03:56 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 01 Feb 2024 03:56 AM IST
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रूरा। महिलाएं भी किसी से कम नहीं हैं। यह उलरापुर की प्रेमवती से साबित कर दिया। उसने झिझक छोड़ कर भैंस पालन शुरू किया। आमदनी बढ़ी तो गृहस्थी पटरी पर लौट आई । जिले में प्रति मवेशी रिकार्ड दूध उत्पादन में उसे प्रथम पुरस्कार दिया गया। अब गांव में प्रेमवती की सोच की न केवल सब दाद दे रहे हैं, बल्कि उसके रास्ते पर चलने का प्रयास भी कर रहें।
डेरापुर ब्लॉक के उलरापुर निवासी प्रेमवती को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था। सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर रहे पति की उतनी आमदनी नहीं थी तो गृहस्थी ठीक से संभल सके। आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेमवती ने पशुपालन का मन बनाया और स्थानीय पशु चिकित्सक से जानकारी ली और भैंस पालन शुरू किया। तीन साल पहले जमा पूंजी से एक भैंस खरीदी। दूध बेचकर बचत बढ़ाई और धीरे-धीरे कर और भैंसे खरींदी। कुल नौ भैंस का पालन कर रिकार्ड दूध उत्पादन किया। प्रति भैंस औसतन 12 लीटर दूध उत्पादन कर प्रेमवती ने सफलता की नई इबारत लिखी। गांव में ही 40 रुपये प्रति लीटर दूध बिक जाता है। इससे आमदनी बढ़ी तो गृहस्थी पटरी पर लौट आई। अब ग्रामीण और परिवार के अन्य सदस्य भी उसकी सोच के कायल हो गए। पूरा परिवार पशुपालन में उसकी मदद करते हैं। प्रेमवती दुधारू पशुओं की देखभाल में कोई असर नहीं रखती हैं। दाना, खली और हरा चारा की व्यवस्था की वजह से दूध उत्पादन अच्छा है। प्रति भैंस प्रति दिन 12 लीटर दूध उत्पादन पर पशुपालन विभाग की ओर से उसे प्रथम पुरस्कार में 7 हजार रुपये दिए गए। प्रेमवती कहती हैं कि पति सुनील कुमार रनियां की एक फैक्ट्ररी में सिक्यूरिटी गार्ड है। अब पशुपालन में देवर व अन्य परिवारी भी मदद करते हैं। केवल 3 बीघा जमीन है। आंशिक जमीन पर चारा उगाते हैं। प्रधान विनोद कुमार ने बताया कि प्रेमवती ने महिला होकर रिकार्ड दूध उत्पादन कर पुरस्कार पाया है। यह अन्य पशुपालकों के लिए नजीर है। सीवीओ डॉ.सुबोध कुमार ने बताया कि बीते वर्ष 23 दिसंबर को प्रेमवती को प्रथम पुरस्कार दिया गया है। दुधारू पशुओं की देखभाल और हरा चरा आदि का इंतजाम कर अच्छा दूध उत्पादन किया जा सकता है। प्रेमवती की मिसाल देकर अन्य पशु पालकों को जागरूक किया जा रहा है।
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डेरापुर ब्लॉक के उलरापुर निवासी प्रेमवती को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था। सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर रहे पति की उतनी आमदनी नहीं थी तो गृहस्थी ठीक से संभल सके। आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेमवती ने पशुपालन का मन बनाया और स्थानीय पशु चिकित्सक से जानकारी ली और भैंस पालन शुरू किया। तीन साल पहले जमा पूंजी से एक भैंस खरीदी। दूध बेचकर बचत बढ़ाई और धीरे-धीरे कर और भैंसे खरींदी। कुल नौ भैंस का पालन कर रिकार्ड दूध उत्पादन किया। प्रति भैंस औसतन 12 लीटर दूध उत्पादन कर प्रेमवती ने सफलता की नई इबारत लिखी। गांव में ही 40 रुपये प्रति लीटर दूध बिक जाता है। इससे आमदनी बढ़ी तो गृहस्थी पटरी पर लौट आई। अब ग्रामीण और परिवार के अन्य सदस्य भी उसकी सोच के कायल हो गए। पूरा परिवार पशुपालन में उसकी मदद करते हैं। प्रेमवती दुधारू पशुओं की देखभाल में कोई असर नहीं रखती हैं। दाना, खली और हरा चारा की व्यवस्था की वजह से दूध उत्पादन अच्छा है। प्रति भैंस प्रति दिन 12 लीटर दूध उत्पादन पर पशुपालन विभाग की ओर से उसे प्रथम पुरस्कार में 7 हजार रुपये दिए गए। प्रेमवती कहती हैं कि पति सुनील कुमार रनियां की एक फैक्ट्ररी में सिक्यूरिटी गार्ड है। अब पशुपालन में देवर व अन्य परिवारी भी मदद करते हैं। केवल 3 बीघा जमीन है। आंशिक जमीन पर चारा उगाते हैं। प्रधान विनोद कुमार ने बताया कि प्रेमवती ने महिला होकर रिकार्ड दूध उत्पादन कर पुरस्कार पाया है। यह अन्य पशुपालकों के लिए नजीर है। सीवीओ डॉ.सुबोध कुमार ने बताया कि बीते वर्ष 23 दिसंबर को प्रेमवती को प्रथम पुरस्कार दिया गया है। दुधारू पशुओं की देखभाल और हरा चरा आदि का इंतजाम कर अच्छा दूध उत्पादन किया जा सकता है। प्रेमवती की मिसाल देकर अन्य पशु पालकों को जागरूक किया जा रहा है।
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