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मौत की वजह छिपाने को नहीं कराते गायों का पोस्टमार्टम
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कानपुर देहात/रनियां। गोशालाओं मेें मवेशियों के मरने के बाद भी अफसर खेल करने से बाज नहीं आ रहे। गायों के दम तोड़ने के बाद पोस्टमार्टम करने के बजाय पंचनामा भरकर शव को दफन कर दिया जाता है।
इसके पीछे अफसर कोरोना का हवाला देकर खामियां को छिपा देते और गायों की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता। वहीं बिलसरायां गोशाला में आठ बीमार गायों की हालत इस कदर खराब है कि वह पैरों पर खड़ी तक नहीं हो पा रही हैं। हालांकि पशु चिकित्सक उनका इलाज करने में जुटे हैं।
गोशालाओं में रखे गए गोवंशों की संदेहजनक मौत होने की स्थिति में पोस्टमार्टम कराया जाता है। पिछले दिनों कोविड के चलते शासन की ओर से सामान्य व बूढ़ी होकर मरने वाली गायों का पोस्टमार्टम करने के बजाय पंचनामा भरकर दफनाने के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन किसी गाय की संदेहजनक मौत होने पर उसका पोस्टमार्टम कराया जाना आवश्यक है।
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गोशालाओं में हरा चारा न मिलने से कुपोषित व बीमार होकर मरने वाली गायों का भेद न खुले, इसके लिए जिम्मेदार अफसर इसी बात का फायदा उठाने लगे। पिछले दिनों किशरवल गोशाला में एक व बिलसरायां गोशाला में दो गायों की मौत के बाद उनका पोस्टमार्टम नहीं किया गया। पशु चिकित्सकों ने कीचड़ में गिरने से कूल्हा टूटने से उठ न पाने का हवाला देकर मौत का कारण बता दिया।
ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा कि दम तोड़ने वाली गाय कीचड़ में अचानक से कैसे गिर गई। इसके पीछे ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में भी हरा चारा न मिलने से गाय कुपोषित होकर बीमार पड़ गई। जब खड़े रहने की क्षमता भी न रही तो गिरकर घायल हो गई।
बाद में उनकी मौत हो गई। मौजूदा समय में बिलसरायां गोशाला में कुपोषित श्रेणी की आठ गाय मरणासन्न हालत में है। जिनका इलाज किया जा रहा है। उनकी हालत इस कदर खराब है कि वह पैरों पर खड़ी तक नहीं हो सकती। शनिवार को गायें बैठकर चारा खाते दिखाई दी।
कोरोना के चलते शासन की ओर से सिर्फ संदेहजनक मौत होने पर गायों का पोस्टमार्टम करने के निर्देश दिए गए हैं। रनियां की जिन गोशालाओं मेें गायों की मौत हुई है, वहां की गाय कीचड़ में गिर गई थी। जिससे कुछ के कूल्हे आदि टूट गए थे। पंचनामा भरकर शव दफनाए गए हैं। - डॉ. देवकीनंदन लवानिया, सीवीओ
बीमार आठ गायों को अलग कमरे में रखवा दिया गया है। जिनका उपचार कराया जा रहा है। हरे चारे की व्यवस्था करा दी गई है। कुछ गाय कमजोर व बीमार होने के कारण उठ नहीं पा रही हैं। - अशोक कुमार (बीडीओ सरवनखेड़ा)
गोशालाओं में अव्यवस्था के बाबत एसडीएम, बीडीओ, ग्राम सचिव व केयरटेकर के खिलाफ रिपोर्ट बनाई जा रही है। जिसे कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।
-सौम्या पांडेय (सीडीओ)
खामियां उजागर हुई तो पहुंच गया हरा चारा
रनियां। बरसात के महीने में भी गायों को हरा चारा न मिलने सहित गोशालाओं की अन्य खामियां उजागर हुई, तो हरे चारे की उपलब्धता भी होने लगी। शनिवार को बिलसरायां गोशाला मेें बरसीम लाई गई। जिसे सभी गायों को भूसे में मिलाकर खाने के लिए दिया गया। वहीं झुंड में रहने वाले मरकहे सांड़ व गायों को अलग-अलग किया गया। जिससे वह आपस में न लड़ें।
लापरवाहों पर गिर सकती गाज
कानपुर देहात। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट मेें पलीता लगाने वाले लापरवाहों पर गाज गिर सकती है। विभागीय सूत्रों की माने तो रनियां क्षेत्र की तीनों गोशालाओं किशरवल, बिलसरायां व रायपुर में कमजोर गायों की मौत व अव्यवस्थाएं उजागर होने के बाद प्रशासन की ओर से रैंडम तरीके से जांच कराई गई है। जिसकी रिपोर्ट डीएम को भेजी गई है। जिसमे लापरवाही का जिक्र किया गया है। फिलहाल अब कार्रवाई की इंतजार किया जा रहा है।
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इसके पीछे अफसर कोरोना का हवाला देकर खामियां को छिपा देते और गायों की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता। वहीं बिलसरायां गोशाला में आठ बीमार गायों की हालत इस कदर खराब है कि वह पैरों पर खड़ी तक नहीं हो पा रही हैं। हालांकि पशु चिकित्सक उनका इलाज करने में जुटे हैं।
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गोशालाओं में रखे गए गोवंशों की संदेहजनक मौत होने की स्थिति में पोस्टमार्टम कराया जाता है। पिछले दिनों कोविड के चलते शासन की ओर से सामान्य व बूढ़ी होकर मरने वाली गायों का पोस्टमार्टम करने के बजाय पंचनामा भरकर दफनाने के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन किसी गाय की संदेहजनक मौत होने पर उसका पोस्टमार्टम कराया जाना आवश्यक है।
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गोशालाओं में हरा चारा न मिलने से कुपोषित व बीमार होकर मरने वाली गायों का भेद न खुले, इसके लिए जिम्मेदार अफसर इसी बात का फायदा उठाने लगे। पिछले दिनों किशरवल गोशाला में एक व बिलसरायां गोशाला में दो गायों की मौत के बाद उनका पोस्टमार्टम नहीं किया गया। पशु चिकित्सकों ने कीचड़ में गिरने से कूल्हा टूटने से उठ न पाने का हवाला देकर मौत का कारण बता दिया।
ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा कि दम तोड़ने वाली गाय कीचड़ में अचानक से कैसे गिर गई। इसके पीछे ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में भी हरा चारा न मिलने से गाय कुपोषित होकर बीमार पड़ गई। जब खड़े रहने की क्षमता भी न रही तो गिरकर घायल हो गई।
बाद में उनकी मौत हो गई। मौजूदा समय में बिलसरायां गोशाला में कुपोषित श्रेणी की आठ गाय मरणासन्न हालत में है। जिनका इलाज किया जा रहा है। उनकी हालत इस कदर खराब है कि वह पैरों पर खड़ी तक नहीं हो सकती। शनिवार को गायें बैठकर चारा खाते दिखाई दी।
कोरोना के चलते शासन की ओर से सिर्फ संदेहजनक मौत होने पर गायों का पोस्टमार्टम करने के निर्देश दिए गए हैं। रनियां की जिन गोशालाओं मेें गायों की मौत हुई है, वहां की गाय कीचड़ में गिर गई थी। जिससे कुछ के कूल्हे आदि टूट गए थे। पंचनामा भरकर शव दफनाए गए हैं। - डॉ. देवकीनंदन लवानिया, सीवीओ
बीमार आठ गायों को अलग कमरे में रखवा दिया गया है। जिनका उपचार कराया जा रहा है। हरे चारे की व्यवस्था करा दी गई है। कुछ गाय कमजोर व बीमार होने के कारण उठ नहीं पा रही हैं। - अशोक कुमार (बीडीओ सरवनखेड़ा)
गोशालाओं में अव्यवस्था के बाबत एसडीएम, बीडीओ, ग्राम सचिव व केयरटेकर के खिलाफ रिपोर्ट बनाई जा रही है। जिसे कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।
-सौम्या पांडेय (सीडीओ)
खामियां उजागर हुई तो पहुंच गया हरा चारा
रनियां। बरसात के महीने में भी गायों को हरा चारा न मिलने सहित गोशालाओं की अन्य खामियां उजागर हुई, तो हरे चारे की उपलब्धता भी होने लगी। शनिवार को बिलसरायां गोशाला मेें बरसीम लाई गई। जिसे सभी गायों को भूसे में मिलाकर खाने के लिए दिया गया। वहीं झुंड में रहने वाले मरकहे सांड़ व गायों को अलग-अलग किया गया। जिससे वह आपस में न लड़ें।
लापरवाहों पर गिर सकती गाज
कानपुर देहात। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट मेें पलीता लगाने वाले लापरवाहों पर गाज गिर सकती है। विभागीय सूत्रों की माने तो रनियां क्षेत्र की तीनों गोशालाओं किशरवल, बिलसरायां व रायपुर में कमजोर गायों की मौत व अव्यवस्थाएं उजागर होने के बाद प्रशासन की ओर से रैंडम तरीके से जांच कराई गई है। जिसकी रिपोर्ट डीएम को भेजी गई है। जिसमे लापरवाही का जिक्र किया गया है। फिलहाल अब कार्रवाई की इंतजार किया जा रहा है।