हमीरपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल: जिला अस्पताल में लगाए गए पोस्टर, लिखा- नहीं है आर्थोपेडिक सर्जन
हमीरपुर जिला अस्पताल 25 की जगह कुल आठ डॉक्टरों के भरोसे संचालित हो रहा है। मरीजों का कहना है कि डॉक्टर ना होने की वजह से उन्हें इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल में जाना पड़ता है। इसमें काफी खर्चा होता है और इलाज भी सही नहीं मिलता है।
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उत्तर प्रदेश में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने के तमाम प्रयास न काफी साबित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का अमला भले ही स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का दावा कर रहा है। लेकिन वस्तुस्थिति कुछ अलग ही नजर आती है।
सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। इसका उदाहरण हमीरपुर जिला अस्पताल हैं, जहां स्टॉफ की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हैं। जिला अस्पताल में 25 की जगह सिर्फ आठ डॉक्टर ही तैनात है।
100 बेड के इस अस्पताल में औसतन 800 मरीज इलाज कराने आते हैं। यहां सर्जन, रेडियोलाजिस्ट, आर्थो पेडिक्स सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, कार्डियोलाजिस्ट, चेस्ट फिजिशियन, एनेथेसिस्ट जैसे महत्वपूर्ण डॉक्टरों के ना होने से मरीजों को इलाज के लिए प्राइवेट डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है।
सीएमएस डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि डॉक्टरों कमी है, जिसको लेकर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। इलाज कराने आए मरीजों ने कहा कि इस जिला अस्पताल में डॉक्टर ना होने की वजह से उन्हें इलाज के लिए कानपुर जाना पड़ता है। साथ ही, प्राइवेट डॉक्टरों की शरण में जाने पर इलाज का भारी खर्च उठाना पड़ता है।