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Kanpur News: एनआईए का डायरेक्टर बन रिटायर्ड अधिकारी से पांच लाख ठगे
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कानपुर। चकेरी थाना क्षेत्र के श्यामनगर में साइबर ठगों ने नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) का डायरेक्टर बनकर उद्योग निदेशालय के रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी से पांच लाख रुपये की ठगी कर ली। शातिरों ने एक मामले में पीड़ित का नाम होने की बात कहते हुए व्हाट्सएप पर फर्जी सरकारी दस्तावेज भेजे और जीवन भर जेल में रहने की धमकी दी।
श्यामनगर के सी ब्लॉक निवासी विश्वनाथ गुप्ता (69) उद्योग निदेशालय में प्रशासनिक अधिकारी पद से रिटायर्ड हैं। उन्होंने दर्ज रिपोर्ट में बताया कि रिटायर होने के बाद उन्हें स्पाइन की बीमारी हो गई थी। बीती 29 दिसंबर की सुबह उनके पास अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने अपना नाम रंजीत यादव बताया। उसने प्रेम कुमार नाम के व्यक्ति को अपना अधिकारी बताते हुए कॉन्फ्रेंस कॉल में जोड़ लिया। प्रेम कुमार ने सदानंद दते नाम के व्यक्ति से बात कराई जो खुद को नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी का डायरेक्टर बता रहा था।
उसने कहा कि उनका महाराष्ट्र के पुणे में एक केस चल रहा है। इसमें आरसी फौजी और अफजल खान ने 200 लोगों के नाम लिए हैं। इसमें उनका भी नाम शामिल है। इसके बाद ठगों ने व्हाट्सएप पर वारंट और रिजर्व बैंक के डिप्टी कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर बने हुए दस्तावेज भेजे। जीवन भर जेल में रहने की धमकी दी। दहशत में आकर मामले से बचने के लिए पांच लाख रुपये 30 दिसंबर को आरटीजीएस के माध्यम से भेज दिए। ठगी का अहसास हुआ। पीड़ित ने साइबर क्राइम समेत पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से शिकायत की। चकेरी इंस्पेक्टर अजय प्रकाश मिश्र ने बताया कि तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर साइबर सेल की मदद ली जा रही है।
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श्यामनगर के सी ब्लॉक निवासी विश्वनाथ गुप्ता (69) उद्योग निदेशालय में प्रशासनिक अधिकारी पद से रिटायर्ड हैं। उन्होंने दर्ज रिपोर्ट में बताया कि रिटायर होने के बाद उन्हें स्पाइन की बीमारी हो गई थी। बीती 29 दिसंबर की सुबह उनके पास अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने अपना नाम रंजीत यादव बताया। उसने प्रेम कुमार नाम के व्यक्ति को अपना अधिकारी बताते हुए कॉन्फ्रेंस कॉल में जोड़ लिया। प्रेम कुमार ने सदानंद दते नाम के व्यक्ति से बात कराई जो खुद को नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी का डायरेक्टर बता रहा था।
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उसने कहा कि उनका महाराष्ट्र के पुणे में एक केस चल रहा है। इसमें आरसी फौजी और अफजल खान ने 200 लोगों के नाम लिए हैं। इसमें उनका भी नाम शामिल है। इसके बाद ठगों ने व्हाट्सएप पर वारंट और रिजर्व बैंक के डिप्टी कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर बने हुए दस्तावेज भेजे। जीवन भर जेल में रहने की धमकी दी। दहशत में आकर मामले से बचने के लिए पांच लाख रुपये 30 दिसंबर को आरटीजीएस के माध्यम से भेज दिए। ठगी का अहसास हुआ। पीड़ित ने साइबर क्राइम समेत पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से शिकायत की। चकेरी इंस्पेक्टर अजय प्रकाश मिश्र ने बताया कि तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर साइबर सेल की मदद ली जा रही है।
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