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Kanpur News: एनआईए अधिकारी बन महिला को डिजिटल अरेस्ट कर 6.60 लाख हड़पे
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कानपुर। कैंट इलाके की एक घरेलू महिला को साइबर ठगों ने एनआईए एवं एटीएस अधिकारी बनकर न केवल डरा, धमकाकर मानसिक प्रताड़ित किया बल्कि डिजिटल अरेस्ट कर 6.60 लाख रुपये हड़प लिए। पीड़िता ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही इसकी शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर की है।
कैंट निवासी सुनीता गौड़ के अनुसार नौ नवंबर को उनके पास एक कॉल आई। कॉलर ने खुद को एटीएस अधिकारी बताया। कहा कि उनका मोबाइल नंबर फरीदाबाद विस्फोटक से जुड़ी गतिविधियों की जांच में मिला है। कॉलर ने उनसे जुड़े कुछ सवाल पूछे तो उन्होंने रांग नंबर समझकर कॉल काट दी। दूसरे दिन फिर से कॉल की। कॉल करने वाले ने कहा कि आतंकी हमले की जांच में उनका कनेक्शन मिलने की बात बताकर धमकाया। वह डर गईं और कॉल काट दी। 11 नवंबर को नए नंबर से फोन आया। इस बार खुद को एनआईए अधिकारी बताकर दबाव में लिया। बातचीत के दौरान ठगों ने वीडियो कॉल शुरू की और पूछताछ के नाम पर लगातार कैमरे के सामने रहने को कहा। उन्हें किसी को भी कॉल करने से या फोन काटने से मना किया। ऐसा करने पर उन्हें गिरफ्तारी की धमकी दी।
तीन घंटे तक महिला को फोन पर रोके रखने के बाद ठगों ने उनसे कहा कि जांच के चलते बैंक खातों की पुष्टि की जानी है। इसके लिए उन्हें तुरंत एक निश्चित खाते में पैसे ट्रांसफर करने होंगे। घबराई महिला ने बिना किसी की सलाह लिए आरटीजीएस के माध्यम से 6.60 लाख रुपये बताए गए खाते में भेज दिए। जब परिजनों ने उन्हें तनाव में देखकर कारण पूछा तब सच्चाई सामने आई।
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कोट::::
डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी, चाहे एनआईए, एटीएस या स्थानीय पुलिस कभी भी फोन पर किसी से पैसे नहीं मांगती। न ही इस तरह की वीडियो कॉल के माध्यम से निगरानी में रखती है। ऐसे कॉल आने पर तुरंत सतर्क हों। संदेह होने पर तुरंत कॉल काटकर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
-- -अंजली विश्वकर्मा, एडीसीपी क्राइम
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कैंट निवासी सुनीता गौड़ के अनुसार नौ नवंबर को उनके पास एक कॉल आई। कॉलर ने खुद को एटीएस अधिकारी बताया। कहा कि उनका मोबाइल नंबर फरीदाबाद विस्फोटक से जुड़ी गतिविधियों की जांच में मिला है। कॉलर ने उनसे जुड़े कुछ सवाल पूछे तो उन्होंने रांग नंबर समझकर कॉल काट दी। दूसरे दिन फिर से कॉल की। कॉल करने वाले ने कहा कि आतंकी हमले की जांच में उनका कनेक्शन मिलने की बात बताकर धमकाया। वह डर गईं और कॉल काट दी। 11 नवंबर को नए नंबर से फोन आया। इस बार खुद को एनआईए अधिकारी बताकर दबाव में लिया। बातचीत के दौरान ठगों ने वीडियो कॉल शुरू की और पूछताछ के नाम पर लगातार कैमरे के सामने रहने को कहा। उन्हें किसी को भी कॉल करने से या फोन काटने से मना किया। ऐसा करने पर उन्हें गिरफ्तारी की धमकी दी।
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तीन घंटे तक महिला को फोन पर रोके रखने के बाद ठगों ने उनसे कहा कि जांच के चलते बैंक खातों की पुष्टि की जानी है। इसके लिए उन्हें तुरंत एक निश्चित खाते में पैसे ट्रांसफर करने होंगे। घबराई महिला ने बिना किसी की सलाह लिए आरटीजीएस के माध्यम से 6.60 लाख रुपये बताए गए खाते में भेज दिए। जब परिजनों ने उन्हें तनाव में देखकर कारण पूछा तब सच्चाई सामने आई।
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कोट::::
डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी, चाहे एनआईए, एटीएस या स्थानीय पुलिस कभी भी फोन पर किसी से पैसे नहीं मांगती। न ही इस तरह की वीडियो कॉल के माध्यम से निगरानी में रखती है। ऐसे कॉल आने पर तुरंत सतर्क हों। संदेह होने पर तुरंत कॉल काटकर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।