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धन सरकारी, हजम किया बारी-बारी
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 17 Jan 2015 03:53 AM IST
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उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान (यूपीटीटीआई) में प्रयोगशाला की मशीन (संयंत्र) खरीदने और भवनों की मरम्मत सहित तमाम कार्यों में 10.81 करोड़ रुपये का घपला हुआ है।
पांच साल पहले एसी प्लांट पर लाखों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन प्लांट चालू नहीं हो सका। करोड़ों रुपये की लागत से बनी एमटेक लैब बंद है। जो मशीनें मंगाई गई हैं, वह कबाड़ बनी हैं।
जब से आई हैं, तब से पैक करके रखी हैं। इन मशीनों की क्वालिटी पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
यह मामला प्राविधिक शिक्षा मंत्री शिवाकांत ओझा और नव नियुक्त डायरेक्टर प्रो. दिनेश बाबू शाक्यवार के पास पहुंचा है। मंत्री, डायरेक्टर ने जांच कराके प्रभावी कार्रवाई का भरोसा भी दिया है।
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विश्व बैंक की टेक्निकल एजूकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम (टेक्यूप) के तहत यूपीटीटीआई को 10.81 करोड़ रुपये का अनुदान मिला। इससे पठन-पाठन, शोध की गुणवत्ता बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
कैंपस, भवन, कंप्यूटर, लैब और लाइब्रेरी की व्यवस्था दुरुस्त करने का काम भी शुरू हुआ। वर्ष 2003 से 2008 के बीच अनुदान के इस्तेमाल का लक्ष्य दिया गया।
इसके बावजूद मनमानी की गई और अनुदान का इस्तेमाल वर्ष 2014 तक किया गया। शिक्षक, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति पर खर्च होने वाला 25 लाख रुपये कहां गया, इसका हिसाब-किताब नहीं है।
एससी, एसटी, ओबीसी और महिला प्रशिक्षण के लिए मिला सात लाख रुपये का अनुदान भी दूसरे मद में खर्च कर दिया गया है। इसका खुलासा एक आरटीआई से मिली सूचना से हुआ है।
इससे पता चला है कि 11 सालों (2003-2014) में 10.81 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, जिसका हिसाब-किताब नहीं है। सेंट्रल एयर कंडीशनर यूनिट का निर्माण पांच साल पहले हुआ, लेकिन यह अभी तक काम नहीं कर रहा है।
सिविल वर्क की जानकारी न रखने वाले शिक्षक से इसका सत्यापन कराया गया है। मीडिया लैब, कंप्यूटर, लाइब्रेरी पर जो खर्च हुआ, सब बेकार हो गया है। सारे काम आधे-अधूरे हैं। इसको लेकर यूपीटीटीआई के तमाम टीचर, कर्मचारियों ने भी नाराजगी जताई है।
पिछले 10 जनवरी को कानपुर आए यूपीटीटीआई के बोर्ड ऑफ गवर्नर (बीओजी) के चेयरमैन प्रो. केपी सिंह और प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा संजीव मित्तल से मिलकर शिक्षकों ने कहा है कि इस घपले की जांच कराके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
यूपीटीटीआई के तमाम कार्यवाहक निदेशक और एक रिटायर शिक्षक को पूरे घपले का जिम्मेदार बताया गया है। शिक्षकों ने कहा है कि टेक्यूप के अनुदान से हुए खरीद, निर्माण, मरम्मत कार्यों में जमकर कमीशनबाजी की गई है।
बोले जिम्मेदार
यह मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराके निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की जाएगी। जांच-पड़ताल के लिए जल्द ही कमेटी गठित होगी।
कताई कार्यशाला की मशीन को चलाने की कोशिश की जा रही है। यह मशीन गलत जगह लगाई गई है।
इसलिए बारिश में भीग जाती है। जल्द ही इसे शिफ्ट किया जाएगा। जितने बजट का इस्तेमाल हुआ है, उसका आकलन कराके कार्रवाई होगी।
-प्रो. दिनेश बाबू शाक्यवार, निदेशक यूपीटीटीआई
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पांच साल पहले एसी प्लांट पर लाखों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन प्लांट चालू नहीं हो सका। करोड़ों रुपये की लागत से बनी एमटेक लैब बंद है। जो मशीनें मंगाई गई हैं, वह कबाड़ बनी हैं।
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जब से आई हैं, तब से पैक करके रखी हैं। इन मशीनों की क्वालिटी पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
यह मामला प्राविधिक शिक्षा मंत्री शिवाकांत ओझा और नव नियुक्त डायरेक्टर प्रो. दिनेश बाबू शाक्यवार के पास पहुंचा है। मंत्री, डायरेक्टर ने जांच कराके प्रभावी कार्रवाई का भरोसा भी दिया है।
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विश्व बैंक की टेक्निकल एजूकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम (टेक्यूप) के तहत यूपीटीटीआई को 10.81 करोड़ रुपये का अनुदान मिला। इससे पठन-पाठन, शोध की गुणवत्ता बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
कैंपस, भवन, कंप्यूटर, लैब और लाइब्रेरी की व्यवस्था दुरुस्त करने का काम भी शुरू हुआ। वर्ष 2003 से 2008 के बीच अनुदान के इस्तेमाल का लक्ष्य दिया गया।
इसके बावजूद मनमानी की गई और अनुदान का इस्तेमाल वर्ष 2014 तक किया गया। शिक्षक, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति पर खर्च होने वाला 25 लाख रुपये कहां गया, इसका हिसाब-किताब नहीं है।
एससी, एसटी, ओबीसी और महिला प्रशिक्षण के लिए मिला सात लाख रुपये का अनुदान भी दूसरे मद में खर्च कर दिया गया है। इसका खुलासा एक आरटीआई से मिली सूचना से हुआ है।
इससे पता चला है कि 11 सालों (2003-2014) में 10.81 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, जिसका हिसाब-किताब नहीं है। सेंट्रल एयर कंडीशनर यूनिट का निर्माण पांच साल पहले हुआ, लेकिन यह अभी तक काम नहीं कर रहा है।
सिविल वर्क की जानकारी न रखने वाले शिक्षक से इसका सत्यापन कराया गया है। मीडिया लैब, कंप्यूटर, लाइब्रेरी पर जो खर्च हुआ, सब बेकार हो गया है। सारे काम आधे-अधूरे हैं। इसको लेकर यूपीटीटीआई के तमाम टीचर, कर्मचारियों ने भी नाराजगी जताई है।
पिछले 10 जनवरी को कानपुर आए यूपीटीटीआई के बोर्ड ऑफ गवर्नर (बीओजी) के चेयरमैन प्रो. केपी सिंह और प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा संजीव मित्तल से मिलकर शिक्षकों ने कहा है कि इस घपले की जांच कराके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
यूपीटीटीआई के तमाम कार्यवाहक निदेशक और एक रिटायर शिक्षक को पूरे घपले का जिम्मेदार बताया गया है। शिक्षकों ने कहा है कि टेक्यूप के अनुदान से हुए खरीद, निर्माण, मरम्मत कार्यों में जमकर कमीशनबाजी की गई है।
बोले जिम्मेदार
यह मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराके निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की जाएगी। जांच-पड़ताल के लिए जल्द ही कमेटी गठित होगी।
कताई कार्यशाला की मशीन को चलाने की कोशिश की जा रही है। यह मशीन गलत जगह लगाई गई है।
इसलिए बारिश में भीग जाती है। जल्द ही इसे शिफ्ट किया जाएगा। जितने बजट का इस्तेमाल हुआ है, उसका आकलन कराके कार्रवाई होगी।
-प्रो. दिनेश बाबू शाक्यवार, निदेशक यूपीटीटीआई