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UP: एक और दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में 10 प्रतिशत सीटें भी नहीं भर पाए पॉलिटेक्निक
Sat, 24 Dec 2022 06:12 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 24 Dec 2022 06:12 PM IST
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पॉलिटेक्निक
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश के पॉलिटेक्निक संस्थान एक और दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्सों में 10 प्रतिशत सीटों पर भी दाखिले नहीं हुए हैं। 19 पीजी डिप्लोमा और तीन अन्य डिप्लोमा कोर्सों की कुल 19075 सीटों में महज 1477 सीटेें ही भर सकी हैं। इन सभी 22 कोर्सों में स्नातक के बाद दाखिला मिलता है।
बीते साल भी स्थिति कुछ इसी तरह थी। सत्र 2021-22 में इस वर्ग के 18 कोर्सों की कुल 18 हजार सीटों में 1585 सीटों पर ही दाखिले हुए थे। स्थिति को सुधारने के लिए इस सत्र से पीजी डिप्लोमा में साइबर सिक्योरिटी, डाटा साइंस एंड मशीन लर्निंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स कोर्स शुरू किए गए हैं। इन चारों कोर्सों की कुल 1575 में 119 सीटों पर ही दाखिले हुए हैं। बता दें कि राजकीय पॉलिटेक्निक कानपुर में चल रहे नौ पीजी डिप्लोमा कोर्सों की कुल 675 में 203 सीटों पर ही छात्रों ने दाखिला लिया है।
प्लेसमेंट और शिक्षकों की कमी वजह
पॉलिटेक्निक में पीजी डिप्लोमा करने वाले छात्रों को प्लेसमेंट न मिल पाना दाखिलों में कमी का प्रमुख कारण है। सूत्रों ने बताया कि संस्थानों के प्लेसमेंट ऑफिसर तीन वर्षीय डिप्लोमा इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छात्रों के प्लेसमेंट पर तो जोर लगाते हैं, लेकिन पीजी डिप्लोमा और अन्य एक या दो वर्षीय कोर्स वाले छात्रों की नौकरी पर ध्यान नहीं देते हैं। वहीं, अधिकतर संस्थानों में इन कोर्सों की पढ़ाई गेस्ट फैकल्टी से कराई जा रही है। दाखिले से पहले ठीक फीडबैक न मिलने से भी छात्र दाखिला लेने से कतराते हैं।
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बीते साल भी स्थिति कुछ इसी तरह थी। सत्र 2021-22 में इस वर्ग के 18 कोर्सों की कुल 18 हजार सीटों में 1585 सीटों पर ही दाखिले हुए थे। स्थिति को सुधारने के लिए इस सत्र से पीजी डिप्लोमा में साइबर सिक्योरिटी, डाटा साइंस एंड मशीन लर्निंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स कोर्स शुरू किए गए हैं। इन चारों कोर्सों की कुल 1575 में 119 सीटों पर ही दाखिले हुए हैं। बता दें कि राजकीय पॉलिटेक्निक कानपुर में चल रहे नौ पीजी डिप्लोमा कोर्सों की कुल 675 में 203 सीटों पर ही छात्रों ने दाखिला लिया है।
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प्लेसमेंट और शिक्षकों की कमी वजह
पॉलिटेक्निक में पीजी डिप्लोमा करने वाले छात्रों को प्लेसमेंट न मिल पाना दाखिलों में कमी का प्रमुख कारण है। सूत्रों ने बताया कि संस्थानों के प्लेसमेंट ऑफिसर तीन वर्षीय डिप्लोमा इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छात्रों के प्लेसमेंट पर तो जोर लगाते हैं, लेकिन पीजी डिप्लोमा और अन्य एक या दो वर्षीय कोर्स वाले छात्रों की नौकरी पर ध्यान नहीं देते हैं। वहीं, अधिकतर संस्थानों में इन कोर्सों की पढ़ाई गेस्ट फैकल्टी से कराई जा रही है। दाखिले से पहले ठीक फीडबैक न मिलने से भी छात्र दाखिला लेने से कतराते हैं।
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राजकीय पॉलिटेक्निक में चल रहे तीन वर्षीय डिप्लोमा इंजीनियरिंग कोर्सों की सीटें लगभग भर गई हैं। पीजी डिप्लोमा और दो वर्षीय डिप्लोमा की खाली सीटें चिंता की बात है। संस्थानों के प्रधानाचार्य अपने स्तर से इन कोर्सों का प्रचार-प्रसार युवाओं के बीच करेंगे। कैंपस की लैब में दौरा कराकर छात्रों में इन कोर्सों के बीच रुचि बढ़ाने का काम करेंगे। - दिनेश मोहन सिंह, निदेशक, प्राविधिक शिक्षा
ये पीजी डिप्लोमा कोर्स होते हैं संचालित
एडवरटाइजमेंट एंड पब्लिक रिलेशन, मास कम्युनिकेशन, बॉयो टेक्नोलॉजी, टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट, मार्केटिंग एंड सेल्स मैनेजमेंट, ब्यूटी एंड हेल्थकेयर, फैशन टेक्नोलॉजी, वेब डिजाइनिंग, कंप्यूटर हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग, होम साइंस, मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट एंड सेकेट्रियल प्रैक्टिस और लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस आदि कोर्स संचालित होते हैं।
नंबर गेम
19075 सीटें हैं प्रदेश भर के संस्थानों में
1477 सीटों पर ही छात्रों ने लिए हैं दाखिले
ये पीजी डिप्लोमा कोर्स होते हैं संचालित
एडवरटाइजमेंट एंड पब्लिक रिलेशन, मास कम्युनिकेशन, बॉयो टेक्नोलॉजी, टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट, मार्केटिंग एंड सेल्स मैनेजमेंट, ब्यूटी एंड हेल्थकेयर, फैशन टेक्नोलॉजी, वेब डिजाइनिंग, कंप्यूटर हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग, होम साइंस, मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट एंड सेकेट्रियल प्रैक्टिस और लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस आदि कोर्स संचालित होते हैं।
नंबर गेम
19075 सीटें हैं प्रदेश भर के संस्थानों में
1477 सीटों पर ही छात्रों ने लिए हैं दाखिले