UP: बिना आपराधिक इतिहास के अशोक को लाई थी पुलिस, झूठे खुलासे के प्रयास में की थी बर्बरता, जानें पूरा मामला
Banda News: मरका थाना क्षेत्र के मऊ गांव के मजरा कुसुमहिन पुरवा निवासी संतोष गौतम के घर में 23 फरवरी 2021 को बदमाशों ने डकैती की घटना को अंजाम दिया था। घटना के खुलासे के लिए पुलिस ने पांच लोगों को उठाया था। आरोप है कि थाने ले जाकर तीन दिन तक उनके साथ मारपीट की गई थी।
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डकैती जैसे गंभीर मामलों में अक्सर पुलिस ऐसे संदिग्धों को पूछताछ के लिए उठाती है, जिन पर चोरी, लूट या फिर डकैती के मुकदमे पहले से ही दर्ज होते हैं। मगर पीड़ित अशोक के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं था। सूत्रों की माने तो डकैती के वक्त उसके खिलाफ कोई भी मुकदमा किसी भी थाने में दर्ज नहीं था।
अशोक सिर्फ छोटे वाहनों का चालक ही था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस डकैती का जबरन खुलासा करने के लिए ही अशोक को लाई थी और शायद झूठा खुलासा भी हो जाता, लेकिन जीभ कटने के बाद मौजूदा पुलिस कर्मियों के हाथ पांव फूल गए और वे उसे लेकर आनन-फानन अस्पताल पहुंचे।
इतना ही नहीं अशोक को बिना लिखापढ़ी के ही एसओजी ने उठाया था। परिजनों की ओर से थाने से लेकर कप्तान तक के कार्यालय में पुलिस कर्मियों की शिकायत की गई, लेकिन अपने गिरेबां में झांकने से अधिकारियों ने हमेशा इन्कार किया। जिस कारण आखिर में अशोक को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
डकैती भी न खोल सकी पुलिस
हैरत की बात है कि जिस डकैती के लिए एसओजी के अधिकारियों ने अशोक पर जुलम की इंतहा कर दी, उस घटना का आज तक खुलासा भी न हो सका। इसके पीछे भी अशोक के साथ हुई दर्दनाक घटना ही रही कि फिर किसी भी पुलिस कर्मी डकैती की उक्त फाइल को हाथ लगाना भी उचित नहीं समझा।
इंसाफ की लड़ाई के लिए अशोक की हो रही प्रशंसा
गरीब होने के बाद भी अशोक की इंसाफ के लिए लड़ाई आखिर में रंग लाई। कोर्ट के माध्यम से ही सही, लेकिन उसकी सुनवाई और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। अशोक व उसके परिवार वालों के इस हौसले की गांव वाले भी प्रशंसा कर रहे हैं। वहीं मरका थाना प्रभारी नरेश प्रजापति का कहना है कि आरोपी पुलिस कर्मी वर्तमान में कहां तैनात है, इसका पता किया जा रहा है।
पत्नी और भाई को भी नहीं मिलने देते थे
पीड़ित अशोक ने बताया कि पुलिस की बर्बरता सिर्फ उसी तक सीमित नहीं थी। थाने में उसकी पिटाई की जानकारी मिलने पर जब कभी पत्नी सुमित्रा और भाई उससे मिलने आते तो उन्हें भी बुरी तरह से दुत्कार दिया जाता था। पुलिस वाले कहते थे, चले जाओ वर्ना अशोक के साथ तुम दोनों को भी डकैती में लपेट देंगे।
छह पुलिसकर्मियों पर रिपोर्ट, पूछताछ के नाम पर दी थीं यातनाएं
बबेरू में सीजेएम न्यायालय के आदेश पर चार साल बाद डकैती के खुलासे के लिए हिरासत में लिए गए युवक की मारपीट के दौरान जीभ कटने के मामले में मरका थाने में तीन तत्कालीन इंस्पेक्टर, एक दरोगा व दो सिपाहियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
पुलिस ने पांच लोगों को उठाया था
मरका थाना क्षेत्र के मऊ गांव के मजरा कुसुमहिन पुरवा निवासी संतोष गौतम के घर में 23 फरवरी 2021 को बदमाशों ने डकैती की घटना को अंजाम दिया था। घटना के खुलासे के लिए तत्कालीन एसओजी प्रभारी आलोक सिंह, आनंद सिंह, बबेरू कोतवाल रामआसरे, मरका थाना एसआई और दो पुलिस कर्मियों ने गांव के अशोक उर्फ बड़कवा उर्फ कोदउवा, रज्जन, दीपक, रजवा और सुनील को पकड़ा था।
मारपीट के दौरान उसकी जीभ कटकर गिर गई
मरका थाना ले जाकर आरोप है कि तीन दिन तक उनके साथ मारपीट की गई थी। साक्ष्य न मिलने पर उन्हें छोड़ दिया गया था। दो दिन बाद मरका पुलिस ने अशोक उर्फ बड़कवा को बुलाया। थाने में लाकअप में बंद कर पट्टा से बेरहमी से उससे मारपीट की गई। मारपीट के दौरान उसकी जीभ कटकर गिर गई।
अस्पताल से छुट्टी कराकर पुलिस ने छोड़ा था घर
इससे अशोक बेहोश हो गया था। मरका थाना प्रभारी ने नौ अप्रैल 2021 को अशोक को जिला अस्पताल पहुंचाया था। वहां से उसे डॉक्टरों ने कानपुर के लिए रेफर कर दिया था। अशोक को कानपुर से 10 अप्रैल को लाकर पुन: जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। 16 अप्रैल को जिला अस्पताल से छुट्टी कराकर मरका पुलिस ने उसे घर छोड़ा था।
न्यायालय के आदेश पर सभी पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
अशोक ने खुद को बेगुनाह बताते हुए मरका थाने में तहरीर दी थी। एसपी, आईजी जोन प्रयागराज, डीजीपी, मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली को मामले की रजिस्ट्री की थी। कहीं से भी न्याय न मिलने पर उसने अंत में सीजेएम न्यायालय में शरण ली। न्यायालय के आदेश पर सभी पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। थानाध्यक्ष मरका नरेश प्रजापति ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। विवेचना वह खुद कर रहे हैं।