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‘सभी को निवाले जो किसान देता है फांसी लगाकर वही अब जान देता है’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 01 Jan 2018 11:13 PM IST
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‘अपने-अपने हक की रोटी पर हर भूखे का हक हो, राजनीति हो पाक तो फिर क्यों किसी की नीयत पर शक हो’.... इन पंक्तियों के साथ व्यंगकार हरिहर नाथ सिंह चौहान ने राजनीति पर प्रहार किया तो सभी ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया।
मौका था कल्याणपुर स्थित पारस पैलेस में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का। कवियों ने एक के बाद शानदार कविताएं सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित डॉ. सुनील त्रिपाठी ने ‘भले ही हादसा कह लो मगर ये साफ साजिश है, जहां बारुद थी तुमने वहीं पर तीलियां रख दीं...’ सुनाकर माहौल बना दिया।
बांदा के जवाहर लाल ‘जलज’ ने ‘सत्य के ही साथ कविता डोलती है, झूठ की हर पोल कविता खोलती है’... सुनाया। अनीता मौर्य ‘अनुश्री’ ने ‘जिस घर में बुजुर्गों का बसेरा नहीं होता, उस घर में खुशियों का सवेरा नहीं होता’... सुनाकर लोगों को भावुक कर दिया।
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सुरेश फक्कड़ ने ‘बदले बदले निजाम बैठे हैं, पीकर जाम बैठे हैं, थाल पूजा का लेकर मत निकलें हर कदम पर आशाराम बैठे हैं’... सुनाकर फर्जी बाबाओं पर प्रहार किया। रवींद्र शर्मा ने ‘सभी को निवाले जो किसान देता है फांसी लगाकर वही अब जान देता है’... सुनाकर किसानों की दशा व्यक्त की।
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मौका था कल्याणपुर स्थित पारस पैलेस में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का। कवियों ने एक के बाद शानदार कविताएं सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित डॉ. सुनील त्रिपाठी ने ‘भले ही हादसा कह लो मगर ये साफ साजिश है, जहां बारुद थी तुमने वहीं पर तीलियां रख दीं...’ सुनाकर माहौल बना दिया।
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बांदा के जवाहर लाल ‘जलज’ ने ‘सत्य के ही साथ कविता डोलती है, झूठ की हर पोल कविता खोलती है’... सुनाया। अनीता मौर्य ‘अनुश्री’ ने ‘जिस घर में बुजुर्गों का बसेरा नहीं होता, उस घर में खुशियों का सवेरा नहीं होता’... सुनाकर लोगों को भावुक कर दिया।
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सुरेश फक्कड़ ने ‘बदले बदले निजाम बैठे हैं, पीकर जाम बैठे हैं, थाल पूजा का लेकर मत निकलें हर कदम पर आशाराम बैठे हैं’... सुनाकर फर्जी बाबाओं पर प्रहार किया। रवींद्र शर्मा ने ‘सभी को निवाले जो किसान देता है फांसी लगाकर वही अब जान देता है’... सुनाकर किसानों की दशा व्यक्त की।