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Kanpur News: हवा में आठ गुना हुई पीएम की मात्रा, बिना मास्क घर से निकलना जोखिम भरा
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कानपुर। केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 18 दिन से शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 150 से अधिक है। इसके चलते पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की मात्रा आठ गुना तक बढ़ गई है। सोमवार को पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा 240 यानी गंभीर स्थिति तक पहुंच गई। ऐसी हवा में सांस लेना रोजाना पांच से छह सिगरेट पीने के बराबर नुकसानदायक है। चिकित्सकों के अनुसार, हवा में घुले धूल-धुएं और गंदगी के यह महीन कण बीमारियों की बड़ी वजह बन रहे हैं। बिना मास्क बाहर निकलना जोखिम भरा हो सकता है।
पीएम के बढ़ने की प्रमुख वजह सड़कों व गलियों की बेतरतीब खोदाई, शहर से गुजरे हाईवे और सड़कों के गड्ढों से उड़ती धूल, जाम के कारण वाहनों का अत्यधिक धुआं, कूड़े को जलाने की प्रवृत्ति, निर्माण कार्यों में मानकों का उल्लंघन आदि है। आतिशबाजी के कारण भी शहर की हवा और खराब हुई है। सोमवार को बारिश के बावजूद भी शहर के एक्यूआई में कोई सुधार नहीं हुआ।
अल्ट्राफाइन पार्टिकल सबसे ज्यादा हानिकारक
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन डॉ. एसके कटियार ने कहा कि पीएम 2.5 के साथ ही इससे छोटे अल्ट्राफाइन पार्टिकल सबसे ज्यादा हानिकारक होते हैं। यह फेफड़ों के साथ ही खून में मिलकर पूरे शरीर में फैल जाते हैं और हृदय, लिवर, ब्रेन, किडनी आदि महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रदूषण के इस स्तर पर धूम्रपान बेहद हानिकारक है। साथ ही सिगरेट पीने वालों (पैसिव स्मोकिंग) से दूरी बनानी जरूरी है। अधिक प्रदूषण वाले स्थानों से दूरी बनाएं। साथ ही यदि कोई सिगरेट पी रहा है तो उससे भी दूरी रखनी जरूरी है। धुंध में सुबह एक्सरसाइज करने से बचें क्योंकि इस दौरान ज्यादा सांस खींचनी पड़ती है और इससे अधिक प्रदूषित हवा शरीर में जाती है। हर हाल में मास्क लगाकर ही बाहर निकलें।
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शहरवासियों की जिंदगी पर भारी कमीशनबाजी
आर्मापुर पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के सह संयोजक डॉ. गिरिजेश लाल श्रीवास्तव ने बताया कि शहरवासियों की जिंदगी पर कमीशनबाजी का खेल भारी पड़ रहा है। जीटी रोड समेत शहर से गुजर रहे कई प्रमुख मार्गों पर गड्ढे हैं। इनसे गुजरने वाले मध्यम व भारी वाहनों से उड़ती धूल राहगीरों को सांस रोगी बनाती है। शहर के कई ऐसे मोहल्ले हैं जहां बनी हुई इंटरलॉकिंग या सड़क को खोदकर दोबारा बनाया जा रहा है। वजह हर जनप्रतिनिधि को दिया गया खर्च का कोटा है। इसे खत्म करने और कमीशन के चक्कर में गैरजरूरी निर्माण किए जा रहे हैं। शहर में निर्माण कार्यों में पर्यावरण सुरक्षा संबंधी एक समिति होनी जरूरी है। इसी तरह वाहनों के प्रदूषण की नियमित निगरानी होनी चाहिए।
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बचाव के उपाय
घरों में एयरप्यूरीफायर का इस्तेमाल।
बाहर निकलने के दौरान एन-95 मास्क का इस्तेमाल जरूर करें।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन सी का प्रयोग करें।
सुबह उठकर गुनगुने पानी में एक चुटकी नमक डालकर गरारे करें।
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विभिन्न क्षेत्रों में एक्यूआई, पीएम 2.5 और पीएम-10 की मात्रा (शुक्रवार रात 10.30 बजे)
अशोक नगर 216 141 190
आईआईटी 196 120 162
एनएसआई 205 130 161
कल्याणपुर 203 128 150
गुरुदेव 209 134 163
किदवई नगर 208 133 170
नेहरू नगर 215 140 170
केशवपुरम 218 133 170
पनकी 200 125 165
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पीएम के बढ़ने की प्रमुख वजह सड़कों व गलियों की बेतरतीब खोदाई, शहर से गुजरे हाईवे और सड़कों के गड्ढों से उड़ती धूल, जाम के कारण वाहनों का अत्यधिक धुआं, कूड़े को जलाने की प्रवृत्ति, निर्माण कार्यों में मानकों का उल्लंघन आदि है। आतिशबाजी के कारण भी शहर की हवा और खराब हुई है। सोमवार को बारिश के बावजूद भी शहर के एक्यूआई में कोई सुधार नहीं हुआ।
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अल्ट्राफाइन पार्टिकल सबसे ज्यादा हानिकारक
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन डॉ. एसके कटियार ने कहा कि पीएम 2.5 के साथ ही इससे छोटे अल्ट्राफाइन पार्टिकल सबसे ज्यादा हानिकारक होते हैं। यह फेफड़ों के साथ ही खून में मिलकर पूरे शरीर में फैल जाते हैं और हृदय, लिवर, ब्रेन, किडनी आदि महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रदूषण के इस स्तर पर धूम्रपान बेहद हानिकारक है। साथ ही सिगरेट पीने वालों (पैसिव स्मोकिंग) से दूरी बनानी जरूरी है। अधिक प्रदूषण वाले स्थानों से दूरी बनाएं। साथ ही यदि कोई सिगरेट पी रहा है तो उससे भी दूरी रखनी जरूरी है। धुंध में सुबह एक्सरसाइज करने से बचें क्योंकि इस दौरान ज्यादा सांस खींचनी पड़ती है और इससे अधिक प्रदूषित हवा शरीर में जाती है। हर हाल में मास्क लगाकर ही बाहर निकलें।
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शहरवासियों की जिंदगी पर भारी कमीशनबाजी
आर्मापुर पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के सह संयोजक डॉ. गिरिजेश लाल श्रीवास्तव ने बताया कि शहरवासियों की जिंदगी पर कमीशनबाजी का खेल भारी पड़ रहा है। जीटी रोड समेत शहर से गुजर रहे कई प्रमुख मार्गों पर गड्ढे हैं। इनसे गुजरने वाले मध्यम व भारी वाहनों से उड़ती धूल राहगीरों को सांस रोगी बनाती है। शहर के कई ऐसे मोहल्ले हैं जहां बनी हुई इंटरलॉकिंग या सड़क को खोदकर दोबारा बनाया जा रहा है। वजह हर जनप्रतिनिधि को दिया गया खर्च का कोटा है। इसे खत्म करने और कमीशन के चक्कर में गैरजरूरी निर्माण किए जा रहे हैं। शहर में निर्माण कार्यों में पर्यावरण सुरक्षा संबंधी एक समिति होनी जरूरी है। इसी तरह वाहनों के प्रदूषण की नियमित निगरानी होनी चाहिए।
बचाव के उपाय
घरों में एयरप्यूरीफायर का इस्तेमाल।
बाहर निकलने के दौरान एन-95 मास्क का इस्तेमाल जरूर करें।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन सी का प्रयोग करें।
सुबह उठकर गुनगुने पानी में एक चुटकी नमक डालकर गरारे करें।
विभिन्न क्षेत्रों में एक्यूआई, पीएम 2.5 और पीएम-10 की मात्रा (शुक्रवार रात 10.30 बजे)
अशोक नगर 216 141 190
आईआईटी 196 120 162
एनएसआई 205 130 161
कल्याणपुर 203 128 150
गुरुदेव 209 134 163
किदवई नगर 208 133 170
नेहरू नगर 215 140 170
केशवपुरम 218 133 170
पनकी 200 125 165