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Kanpur News: एक वर्ष में आईआरडीटी भवन का उखड़ा मिला प्लास्टर, दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश
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कानपुर । शोध, विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान (आईआरडीटी) परिसर में 9.88 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 24 कक्षीय अतिथि गृह व छात्रावास परियोजना में अनियमितताएं उजागर हुई। शुक्रवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने निरीक्षण किया तो कई पिलरों का इनलाइनमेंट गड़बड़ पाया। कई स्थानों पर प्लास्टर उखड़ा मिला। डीएम ने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को फटकार लगाई। डीएम ने निर्माण स्थल का उच्च अफसरों द्वारा पर्यवेक्षण न करने पर यूपीआरएनएसएस के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
गुरुदेव स्थित आईआरडीटी भवन का निर्माण 26 सितंबर 2023 को स्वीकृत यह परियोजना 10 मार्च 2024 से शुरू हुई थी और इसे 30 सितंबर 2025 तक पूरा होना था, लेकिन अभी काफी कार्य अधूरा है। मुख्य भवन, वाणिज्यिक ब्लॉक, कैंटीन और छात्रावास का निर्माण धीमी गति से हो रहा है। मुख्य भवन का 471.80 वर्गमीटर, वाणिज्यिक ब्लॉक का 172 वर्गमीटर और सोलर रूफ का 84.90 वर्गमीटर हिस्सा अब भी अधूरा है। जांच में यह भी पाया कि यूपीआरएनएसएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने महीनों से निर्माण स्थल का पर्यवेक्षण नहीं किया है। अभिलेखों में केवल जूनियर इंजीनियर अंकित दीक्षित द्वारा पांच निरीक्षण दर्ज मिले। डीएम ने कहा कि आईआरडीटी एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण संस्थान है और इसकी गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मंडलीय जांच समिति को भवन निर्माण की गुणवत्ता, सामग्री, प्रगति और पर्यवेक्षण की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट मांगी। उन्होंने कार्यदायी संस्था को चेतावनी देते हुए अधूरा कार्य समय से पूरा करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान आईआरडीटी निदेशक फजल रहमान, उप निदेशक ए.पी. सिंह, और यूपीआरएनएसएस के जेई आदि उपस्थित रहे।
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गुरुदेव स्थित आईआरडीटी भवन का निर्माण 26 सितंबर 2023 को स्वीकृत यह परियोजना 10 मार्च 2024 से शुरू हुई थी और इसे 30 सितंबर 2025 तक पूरा होना था, लेकिन अभी काफी कार्य अधूरा है। मुख्य भवन, वाणिज्यिक ब्लॉक, कैंटीन और छात्रावास का निर्माण धीमी गति से हो रहा है। मुख्य भवन का 471.80 वर्गमीटर, वाणिज्यिक ब्लॉक का 172 वर्गमीटर और सोलर रूफ का 84.90 वर्गमीटर हिस्सा अब भी अधूरा है। जांच में यह भी पाया कि यूपीआरएनएसएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने महीनों से निर्माण स्थल का पर्यवेक्षण नहीं किया है। अभिलेखों में केवल जूनियर इंजीनियर अंकित दीक्षित द्वारा पांच निरीक्षण दर्ज मिले। डीएम ने कहा कि आईआरडीटी एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण संस्थान है और इसकी गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मंडलीय जांच समिति को भवन निर्माण की गुणवत्ता, सामग्री, प्रगति और पर्यवेक्षण की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट मांगी। उन्होंने कार्यदायी संस्था को चेतावनी देते हुए अधूरा कार्य समय से पूरा करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान आईआरडीटी निदेशक फजल रहमान, उप निदेशक ए.पी. सिंह, और यूपीआरएनएसएस के जेई आदि उपस्थित रहे।
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