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पीयूष जैन को मिली जमानत: इत्र कारोबारी को मिली राहत, लेकिन नहीं हो सकेगी रिहाई, जीएसटी चोरी का फैसला आना बाकी

Wed, 27 Jul 2022 10:01 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 27 Jul 2022 10:01 PM IST
सार

इत्र कारोबारी पीयूष जैन को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है, लेकिन रिहाई नहीं हो सकेगी। बता दें कि सोना तस्करी के आरोप में कस्टम एक्ट के मामले में कारोबारी राहत को मिली है। वहीं, जीएसटी चोरी के मामले में दाखिल जमानत याचिका पर फैसला आना अभी बाकी है। 

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Piyush Jain gets bail from High Court, but will not be released, GST evasion decision is yet to come
पीयूष जैन फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में सोना तस्करी मामले में इत्र कारोबारी पीयूष जैन को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। कोर्ट ने दो जमानतों और निजी बंधपत्र दाखिल करने पर उसकी रिहाई के आदेश कर दिए हैं। हालांकि जीएसटी चोरी मामले में भी आरोपी होने के कारण अभी उसे जेल में ही रहना पड़ेगा। याचिका पर सुनवाई दो अगस्त को होनी है।

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डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) अहमदाबाद की टीम ने इत्र कारोबारी पीयूष जैन के कानपुर और कन्नौज स्थित घर में दिसंबर में छापेमारी की थी। इस दौरान 196.57 करोड़ की नगदी के साथ ही 23 किलो सोना भी बरामद हुआ था।
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इन पर विदेशी मुहर लगी होने पर डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) लखनऊ को जानकारी दी गई थी। 27 दिसंबर को यह सोना जांच के लिए डीआरआई के सुपुर्द कर दिया गया था। डीआरआई की टीम ने जेल में पीयूष से पूछताछ की थी, लेकिन वह सोने की खरीद संबंधी दस्तावेज पेश नहीं कर सका था। 

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उसने नगद रुपयों से सोना खरीदने की बात कही थी। डीआरआई ने माना था कि यह सोना पीयूष तस्करी के जरिये विदेश से भारत लाया है। कस्टम एक्ट के तहत सोने को सीज कर दिया गया था। विदेशी सोना बरामदगी के मामले में डीआरआई ने पीयूष को सोना तस्करी का आरोपी मानकर उस पर कस्टम एक्ट का मुकदमा दर्ज किया था।

पीयूष के वकील ने यह तर्क रखा
कोर्ट में पीयूष की ओर से तर्क रखा गया कि पीयूष के पास से 23 किलो सोने की बरामदगी दिखाई गई है। इसमें से 11 किलो सोने पर कोई विदेशी मुहर नहीं है। डीआरआई के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है कि पीयूष विदेशी सोने की तस्करी में लिप्त है। सिर्फ विदेशी मुहर देखकर सोना सीज कर दिया गया, लेकिन यह साबित नहीं कर सकी कि सोना तस्करी का है। 

पीयूष के पास पासपोर्ट नहीं है। पीयूष काफी समय से जेल में बंद है। जांच भी पूरी हो चुकी है, अब उसे जेल में रखने का कोई मतलब नहीं है। पीयूष के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होकर हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है।

हाईकोर्ट ने लगाई सात शर्तें

  • पीयूष बिना कोर्ट की अनुमति के देश नहीं छोड़ेगा।
  • डीआरआई को एक करोड़ रुपये की बैंक गारंटी देगा। आदेश में लिखी शर्तों का उल्लंघन करने पर डीआरआई रकम को जब्त कर सकेगा।
  • जांच या सुनवाई के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा।
  • मुकदमे की सुनवाई में सहयोग करेगा, कोई स्थगन प्रार्थना पत्र नहीं देगा।
  • जमानत पर बाहर आने के बाद किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा।
  • कोर्ट या जांच अधिकारी के सामने मुकदमे से संबंधित किसी तथ्य को बताने से किसी भी व्यक्ति या परिचित को मना नहीं करेगा। इस संबंध में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा और न ही किसी व्यक्ति से ऐसा कोई वादा करेगा।
  • अंडरटेकिंग देनी होगी कि गवाह के कोर्ट आने पर गवाही की तारीख पर कोई स्थगन प्रार्थना पत्र नहीं देगा। ऐसा करने पर ट्रायल कोर्ट इसे जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग मानकर कानून के तहत हाजिर होने के लिए आदेश पारित कर सकेगी। किसी भी शर्त का उल्लंघन करने पर जमानत खारिज की जा सकेगी।

सोना तस्करी मामले में पीयूष के खिलाफ दर्ज कस्टम एक्ट के मुकदमे में उसे हाईकोर्ट से जमानत मिली है, लेकिन अभी वह जेल से रिहा नहीं हो सकेगा। 196.57 करोड़ रुपये नकद बरामदगी के मामले में भी जीएसटी चोरी का एक मुकदमा डीजीजीआई अहमदाबाद की ओर से दाखिल किया गया है। इसकी जमानत अर्जी पर हाईकोर्ट में दो अगस्त को सुनवाई होनी है। इसके बाद ही पीयूष की जेल से रिहाई की स्थिति साफ होगी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान स्पेशल सीजेएम कोर्ट में एक अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पीयूष की पेशी होनी है।  -अम्बरीष  टंडन, विशेष लोक अभियोजक, डीआरआई

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