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ट्रायल में फेल हाे गया नाैसेना का ये राॅकेट, राेका गया प्राेडक्शन
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 15 Oct 2016 04:13 PM IST
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पिनाका रॉकेट
कम दूरी की मारक क्षमता वाला सबसे उन्नत स्वदेशी रॉकेटों में से एक पिनाका रॉकेट निर्माण के लंबे समय बाद ट्रायल में फेल हो गया। नौसेना के एक परीक्षण में पांच किलोमीटर पर निर्धारित टारगेट को भेदने के बजाय रॉकेट 200 मीटर पर दग गया। इससे नौसेना को नुकसान होते बचा। भरोसेमंद रॉकेट के लक्ष्य साधने में असफल होने पर रक्षा मंत्रालय ने जांच बैठा दी है। फिलहाल देश की पांच आर्डनेंस फैक्ट्रियों में बन रहे इसके कम्पोनेंट के निर्माण पर रोक लगा दी गई है।
पिनाका रॉकेट डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन) का प्रोडक्ट है। करीब पांच साल पहले आर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड को इसके निर्माण की जिम्मेदारी मिली थी। इसके बाद इस रॉकेट के अलग-अलग कम्पोनेंट का देश की पांच आर्डनेंस फैक्ट्रियों में निर्माण शुरू हुआ। स्वदेशी तकनीक से बने रॉकेट ने शुरुआत में शानदार तरीके से लक्ष्य भेदे और भारतीय सेना की ताकत बना। बीते दिनों नौसेना के एक क्रूज पर इसका परीक्षण चल रहा था। पिनाका रॉकेट से पांच किलोमीटर दूरी का लक्ष्य साधा गया लेकिन वह 200 मीटर दूर जाकर गिर गया। इसके बाद कुछ और रॉकेटों का परीक्षण हुआ तो वे भी लक्ष्य से पहले ही जा गिरे। इससे जानमाल का खतरा तो नहीं हुआ लेकिन नौसेना ने इसे गंभीर खामी माना।
रक्षा मंत्रालय ने भी गंभीरता से लेते हुए तत्काल निर्माण पर रोक लगा दी और जांच के आदेश दिए हैं। आर्डनेंस फैक्ट्री के सूत्र बताते हैं कि दो माह से देश की पांच आर्डनेंस फैक्ट्रियों में पिनाका का निर्माण ठप है। बताया जाता है कि किसी फैक्ट्री में इसके कम्पोनेंट में एक्सपायरी आयुध इस्तेमाल किया गया था। कितनी रॉकेटों में यह खामी है इसकी जांच की जा रही है।
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यहां बनते हैं रॉकेट के कम्पोनेंट
चांदा महाराष्ट्र, ओएफ (आंबाझारी) नागपुर , ओएफसी कानपुर, फील्डगन फैक्ट्री कानपुर, खमरिया जबलपुर
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पिनाका रॉकेट डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन) का प्रोडक्ट है। करीब पांच साल पहले आर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड को इसके निर्माण की जिम्मेदारी मिली थी। इसके बाद इस रॉकेट के अलग-अलग कम्पोनेंट का देश की पांच आर्डनेंस फैक्ट्रियों में निर्माण शुरू हुआ। स्वदेशी तकनीक से बने रॉकेट ने शुरुआत में शानदार तरीके से लक्ष्य भेदे और भारतीय सेना की ताकत बना। बीते दिनों नौसेना के एक क्रूज पर इसका परीक्षण चल रहा था। पिनाका रॉकेट से पांच किलोमीटर दूरी का लक्ष्य साधा गया लेकिन वह 200 मीटर दूर जाकर गिर गया। इसके बाद कुछ और रॉकेटों का परीक्षण हुआ तो वे भी लक्ष्य से पहले ही जा गिरे। इससे जानमाल का खतरा तो नहीं हुआ लेकिन नौसेना ने इसे गंभीर खामी माना।
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रक्षा मंत्रालय ने भी गंभीरता से लेते हुए तत्काल निर्माण पर रोक लगा दी और जांच के आदेश दिए हैं। आर्डनेंस फैक्ट्री के सूत्र बताते हैं कि दो माह से देश की पांच आर्डनेंस फैक्ट्रियों में पिनाका का निर्माण ठप है। बताया जाता है कि किसी फैक्ट्री में इसके कम्पोनेंट में एक्सपायरी आयुध इस्तेमाल किया गया था। कितनी रॉकेटों में यह खामी है इसकी जांच की जा रही है।
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यहां बनते हैं रॉकेट के कम्पोनेंट
चांदा महाराष्ट्र, ओएफ (आंबाझारी) नागपुर , ओएफसी कानपुर, फील्डगन फैक्ट्री कानपुर, खमरिया जबलपुर