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जैन हो या मारवाड़ी हर समाज में पावन महीने की अलग-अलग हैं मान्यताएं, जानिए वजह
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 01 Aug 2018 05:35 PM IST
सार
- कोई 15 दिन बाद मानता तो कोई 15 दिन पहले से
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मनभावन सावन के रंग निराले हैं। इस पावन मास में हर समाज अलग-अलग मान्यताओं का पालन करता है। एक ओर जहां मारवाड़ी समाज इस माह में तीज पर्व को धूमधाम से मनाता है तो वहीं जैन समाज के लोग इस महीने में विहार कम करते हैं। गुजराती समाज 15 दिन बाद सावन को मनाना शुरू करता है। वहीं, कुमाऊं समाज 15 दिन पहले से ही सावन मानने लगता है।
मारवाड़ी समाज: तीज का रहता इंतजार
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मारवाड़ी समाज में सावन में तीज पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इसे लेकर खासा उत्साह रहता है। तीज वाले दिन बेटियों को घर पर बुलाने और फिर मेंहदी लगाकर मिठाई, गिफ्ट के साथ ससुराल विदा किया जाता है। इसके बाद ससुराल में तीजा माता की पूजा कर व्रत का परायण किया जाता है। अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी समाज के महामंत्री मनोज अग्रवाल कहते है कि समाज के लोगों को सावन का इंतजार रहता हैं। लड़कियों को घर बुलाने के लिए उनकी ससुराल में खास निमंत्रण भेजा जाता है।
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जैन समाज: चातुर्मास शुरू होता, कम होता विहार
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जैन धर्म में सावन से ही चातुर्मास शुरू हो जाता है। समाज के लोग चार महीने तक ज्यादा विहार नहीं करते हैं। जैन समाज के राहुल जैन बताते हैं कि सावन की शुरुआत से ही जैन समुदाय के मुनि एक स्थान पर रुक जाते हैं। चार महीनों तक उनका विहार बंद हो जाता है। कहते हैं कि सावन के महीने में कीड़े-मकौड़े बहुत होते हैं। जीव हत्या न हो इस कारण विहार बंद किया जाता है। साथ ही समाज के लोग सावन में रात का भोजन भी नहीं करते हैं।
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गुजराती समाज: 15 दिन बाद शुरू होता पावन मास
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गुजरात समाज में सावन की शुरूआत 15 दिन के बाद से होती है। यानि सावन की शुरुआत अमावस्या से होती है। समाज की नेहा मेहता ने बताया कि सावन के चौथे दिन बौढ़ चौथ मनाई जाती है। इस दिन काली गाय और बछड़े की पूजा होती है। छठ के दिन खाना बनाया जाता है जिसे सप्तमी के दिन शीतला माता की पूजा के बाद खाया जाता है। कच्चे आटे में गुड़ और घी डालकर पंजीरी बनाई जाती है, जिसका भोग शीतला माता को चढ़ाया जाता है। सावन में मेहंदी और झूले का कोई खास महत्व नहीं है।
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कुमाऊं समाज: हरेला से हो जाती शुरूआत
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कुमाऊं समाज में सावन की शुरूआत 15 दिन पहले से हो जाती है। सावन में हरेला उत्सव मनाया जाता है। कुमाऊं समाज इस बार सावन 16 जुलाई से 16 अगस्त तक मानेगा। समाज के विक्रम सिंह अधिकारी ने बताया कि सावन की शुरुआत में हरेला बोया जाता है। रक्षाबंधन के दौरान इसे काटा जाता है और पूजन के दौरान इस्तेमाल होता है। समाज में हरेला से ही पौधरोपण की शुरूआत होती है। सावन भर नाखून, बाल नहीं काटे जाते हैं। झूला डालने की परंपरा भी है।
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