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बम से बचाएं ‘बेबस मरीजों’ का दम
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 29 Oct 2016 11:02 PM IST
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दमा, हार्ट और मानसिक रोगी बरतें सावधानी
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दीपावली में तेज आवाज, ज्यादा धुएं वाले पटाखों से मरीजों को सांस लेने में तकलीफ से लेकर दमा, हार्ट अटैक तक का खतरा है। डॉक्टरों ने सुरक्षित तरीके से कम आवाज वाले पटाखे छुड़ाने की सलाह दी है।
कानपुर जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग की पूर्व हेड डॉ. आरती लाल चंदानी के अनुसार सांप सीढ़ी, फुलझड़ी, अनार, चटाई आदि पटाखों के धुएं से सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, स्किन एलर्जी आदि हो सकती है। चटाई से उलझन, घबराहट, बेचैनी, चक्कर, सिरदर्द, हाथों-पैरों में सुन्नपन हो सकता है। तेज धमाके वाले पटाखों से सुनने में दिक्कत, सुन्नपन से लेकर कान का पर्दा तक फट सकता है। बारूद लगे हाथों से खाने से दस्त, उल्टी, गेस्ट्रोइंट्राइटिस की आशंका रहती है। दमा के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ से लेकर दमा का अटैक तक पड़ सकता है। इसी तरह हार्ट के रोगियों के लिए तेज धमाकों वाले पटाखे जानलेवा हो सकते हैं। पटाखों का धुआं सांस के जरिये खून में पहुंच कर उसमें आक्सीजन का स्तर घटाता है, इससे हार्ट अटैक तक हो सकता है। उधर मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. उन्नति कुमार और डॉ. तरुण निगम ने मानसिक रोगियों के लिए भी अलर्ट जारी किया है। उनका कहना है कि बदलता मौसम और पटाखों का शोर व प्रदूषण मस्तिष्क में रसायनों का संतुलन बिगाड़ सकता है। शोर और प्रदूषण से चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, नींद न आने की समस्या बढ़ सकती है। भूख-प्यास, खुशी-अवसाद, निद्रा प्रभावित हो सकती है। डॉ. कुमार के अनुसार सामान्य दिनचर्या का पालन करें। पूरी नींद लें। अगर स्वभाव में चेंज आने लगे तो डॉक्टर से मिलकर डोज सेट करा लेनी चाहिए। कोशिश करें कि मरीजों के सोने का स्थान एकांत में हो जहां शोर व धुआं न जा सके।
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कानपुर जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग की पूर्व हेड डॉ. आरती लाल चंदानी के अनुसार सांप सीढ़ी, फुलझड़ी, अनार, चटाई आदि पटाखों के धुएं से सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, स्किन एलर्जी आदि हो सकती है। चटाई से उलझन, घबराहट, बेचैनी, चक्कर, सिरदर्द, हाथों-पैरों में सुन्नपन हो सकता है। तेज धमाके वाले पटाखों से सुनने में दिक्कत, सुन्नपन से लेकर कान का पर्दा तक फट सकता है। बारूद लगे हाथों से खाने से दस्त, उल्टी, गेस्ट्रोइंट्राइटिस की आशंका रहती है। दमा के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ से लेकर दमा का अटैक तक पड़ सकता है। इसी तरह हार्ट के रोगियों के लिए तेज धमाकों वाले पटाखे जानलेवा हो सकते हैं। पटाखों का धुआं सांस के जरिये खून में पहुंच कर उसमें आक्सीजन का स्तर घटाता है, इससे हार्ट अटैक तक हो सकता है। उधर मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. उन्नति कुमार और डॉ. तरुण निगम ने मानसिक रोगियों के लिए भी अलर्ट जारी किया है। उनका कहना है कि बदलता मौसम और पटाखों का शोर व प्रदूषण मस्तिष्क में रसायनों का संतुलन बिगाड़ सकता है। शोर और प्रदूषण से चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, नींद न आने की समस्या बढ़ सकती है। भूख-प्यास, खुशी-अवसाद, निद्रा प्रभावित हो सकती है। डॉ. कुमार के अनुसार सामान्य दिनचर्या का पालन करें। पूरी नींद लें। अगर स्वभाव में चेंज आने लगे तो डॉक्टर से मिलकर डोज सेट करा लेनी चाहिए। कोशिश करें कि मरीजों के सोने का स्थान एकांत में हो जहां शोर व धुआं न जा सके।
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