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Kanpur News: स्तन कैंसर की सर्जरी में अंग न काटने पर रोगी जल्दी होतीं ठीक
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कानपुर। स्तन कैंसर की जिन रोगियों का अंग काटा नहीं जाता उनकी रिकवरी जल्दी ठीक होती है। उन्हें मानसिक ट्रॉमा से नहीं गुजरना पड़ता और अस्पताल से जल्दी डिस्चार्ज होती हैं। यह तथ्य सर्जरी विभाग के ताजा शोध में आया है। इसमें 140 रोगी शामिल की गईं। इनमें 113 रोगी हैलट और 27 रोगी लखनऊ के एक सरकारी अस्पताल की रही हैं। कैंसर दोबारा पलटने का मामला सिर्फ एक रोगी में मिला है जो एक प्रतिशत से कम है।
स्तन कैंसर की रोगियों पर यह शोध जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला की देखरेख में सीनियर रेजीडेंट डॉ. शशांक खंडेलवाल ने किया। इसमें 70 रोगी ऐसी रहीं जिनके स्तन कैंसर की सर्जरी की गई लेकिन अंग नहीं निकाला गया। 70 रोगी का अंग काट कर निकाला गया। इसके बाद दोनों ग्रुप के रोगियों का अध्ययन किया गया। अंग काटे जाने वाली रोगियों को जटिलताएं आईं। उन्हें अधिक दिनों तक अस्पताल में रुकना पड़ा।
डॉ. शशांक ने बताया कि जिन रोगियों का अंग नहीं काटा गया उन्हें जल्दी डिस्चार्ज किया गया। इसके साथ ही उनकी रिकवरी तेज हुई। उन्हें मानसिक ट्रॉमा नहीं हुआ। लाइफ क्वालिटी बेहतर रही। उन्होंने बताया कि कुल 140 रोगी अध्ययन में शामिल किए गए लेकिन रिलैप्स रेट एक प्रतिशत भी कम रहा है। सिर्फ एक रोगी को मर्ज दोबारा हुआ। अब अंग कंजर्वेशन वाली सर्जरी के लिए रोगी खुद मांग करते हैं।
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स्तन कैंसर की रोगियों पर यह शोध जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला की देखरेख में सीनियर रेजीडेंट डॉ. शशांक खंडेलवाल ने किया। इसमें 70 रोगी ऐसी रहीं जिनके स्तन कैंसर की सर्जरी की गई लेकिन अंग नहीं निकाला गया। 70 रोगी का अंग काट कर निकाला गया। इसके बाद दोनों ग्रुप के रोगियों का अध्ययन किया गया। अंग काटे जाने वाली रोगियों को जटिलताएं आईं। उन्हें अधिक दिनों तक अस्पताल में रुकना पड़ा।
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डॉ. शशांक ने बताया कि जिन रोगियों का अंग नहीं काटा गया उन्हें जल्दी डिस्चार्ज किया गया। इसके साथ ही उनकी रिकवरी तेज हुई। उन्हें मानसिक ट्रॉमा नहीं हुआ। लाइफ क्वालिटी बेहतर रही। उन्होंने बताया कि कुल 140 रोगी अध्ययन में शामिल किए गए लेकिन रिलैप्स रेट एक प्रतिशत भी कम रहा है। सिर्फ एक रोगी को मर्ज दोबारा हुआ। अब अंग कंजर्वेशन वाली सर्जरी के लिए रोगी खुद मांग करते हैं।
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