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Kanpur News: पर्चा बनाने की नई व्यवस्था से परेशान रहे मरीज-तीमारदार
Tue, 22 Sep 2026 01:25 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Tue, 22 Sep 2026 01:25 AM IST
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कानपुर देहात। अकबरपुर मेडिकल कॉलेज में सोमवार को पर्चा बनाने की नई व्यवस्था मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन गई। दोपहर 12 से एक बजे तक सर्वर ठप रहने से पर्चे नहीं बन सके। पर्चा न बनने पर काफी देर तक इंतजार के बाद कुछ मरीज बिना डॉक्टर को दिखाए वापस लौट गए। बाद में ओपीडी का समय एक घंटे बढ़ाकर मरीजों को राहत देने की कोशिश की गई।
मेडिकल कॉलेज में ओपीडी को पेपरलेस बनाने के लिए 15 दिन पहले ही आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) पोर्टल पर पर्चे बनाने की व्यवस्था शुरू की गई है। इसके लिए पर्चा काउंटर पर तैनात कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। ऑनलाइन पंजीकरण के लिए चार काउंटर बनाए गए हैं। सोमवार को दोपहर 12 बजे अचानक सर्वर में समस्या आने से ऑनलाइन पर्चा बनने की प्रक्रिया रुक गई। मरीजों को पहले पंजीकरण के लिए इंतजार करना पड़ा और इसके बाद चिकित्सक को दिखाने के लिए भी समय निकलता गया। लंबे इंतजार से परेशान कुछ मरीज बिना इलाज कराए ही लौट गए।
मलासा निवासी रामवीर ने बताया कि उन्हें खांसी-जुकाम की समस्या होने पर मेडिकल कॉलेज में दिखाने आए थे। पर्चा न बनने व मरीजों की कतार अधिक लंबी हो जाने के चलते वह बिना डॉक्टर से परामर्श लिए लौट गए। खमहैला निवासी मोहन ने बताया कि दो दिन से बुखार आ रहा है। सोमवार को मेडिकल कॉलेज में दिखाने आए थे। काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी पर्चा नहीं बन पाने पर कर्मचारियों से जानकारी की तो पता चला कि सर्वर की समस्या की वजह से पर्चे नहीं बन पा रहे हैं। इसके चलते वह वापस लौट गए। अब मंगलवार को दोबारा मेडिकल कॉलेज आएंगे।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता ने बताया कि कॉलेज में मरीजों का एबीडीएम पंजीकरण शुरू किया गया है। सोमवार को सर्वर की समस्या की वजह से पर्चे बनाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। सीएमएस डॉ. उमेश शर्मा को मौके पर भेजकर मैनुअल पर्चे बनवाना शुरू करने के साथ मरीजों को राहत दिलाने के लिए तय समय से एक घंटे अधिक तीन बजे तक ओपीडी का संचालन किया गया है।
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छह माह में पूर्ण रूप से पेपरलेस होगी ओपीडी
प्राचार्य डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता ने बताया कि पेपर पर पर्चा बनाने से लेकर परामर्श देने की प्रक्रिया में अधिकांश मरीज अपनी फाइल खो देते हैं। इससे उनका फॉलोअप करने में डॉक्टर को परेशानी का सामना करने के साथ मरीज को त्वरित उपचार देने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। मरीज की बीमारी व उसको दिए गए इलाज की पूरी जानकारी डिजिटली सुरक्षित करने के लिए मेडिकल कॉलेज में एबीडीएम पोर्टल का संचालन किया गया है। इसके लिए कार्यदायी संस्था डाटामैन की ओर से कॉलेज को तीन माह तक निशुल्क सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाया गया है। प्रारंभिक तौर पर पंजीकरण को डिजिटल करने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद ओपीडी में डॉक्टर की ओर से ई-परामर्श की सुविधा शुरू करवाई जाएगी। इसमें करीब छह माह का समय लग जाएगा। ओपीडी पूर्ण रूप से डिजिटल हो जाने के बाद पैथोलॉजी को एबीडीएम पोर्टल से लिंक की जाएगी। मरीज अपना डिजिटल पर्चा बनवाने के लिए अपना आधार कार्ड व उससे लिंक मोबाइल नंबर साथ लेकर आएं।
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एबीडीएम के प्रमुख फायदे
मरीज की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
मरीज की सहमति से स्वास्थ्य रिकॉर्ड को एक डिजिटल पहचान से जोड़ा जा सकता है।
जांच रिपोर्ट, पर्चे और उपचार संबंधी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध कराना आसान होता है।
उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड को जरूरत पड़ने पर दूसरे स्वास्थ्य संस्थान में साझा किया जा सकता है।
कागजी पर्चे और रिकॉर्ड पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है।
अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध रिकॉर्ड को एक साथ देखने की सुविधा मिल सकती है।
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मेडिकल कॉलेज में ओपीडी को पेपरलेस बनाने के लिए 15 दिन पहले ही आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) पोर्टल पर पर्चे बनाने की व्यवस्था शुरू की गई है। इसके लिए पर्चा काउंटर पर तैनात कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। ऑनलाइन पंजीकरण के लिए चार काउंटर बनाए गए हैं। सोमवार को दोपहर 12 बजे अचानक सर्वर में समस्या आने से ऑनलाइन पर्चा बनने की प्रक्रिया रुक गई। मरीजों को पहले पंजीकरण के लिए इंतजार करना पड़ा और इसके बाद चिकित्सक को दिखाने के लिए भी समय निकलता गया। लंबे इंतजार से परेशान कुछ मरीज बिना इलाज कराए ही लौट गए।
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मलासा निवासी रामवीर ने बताया कि उन्हें खांसी-जुकाम की समस्या होने पर मेडिकल कॉलेज में दिखाने आए थे। पर्चा न बनने व मरीजों की कतार अधिक लंबी हो जाने के चलते वह बिना डॉक्टर से परामर्श लिए लौट गए। खमहैला निवासी मोहन ने बताया कि दो दिन से बुखार आ रहा है। सोमवार को मेडिकल कॉलेज में दिखाने आए थे। काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी पर्चा नहीं बन पाने पर कर्मचारियों से जानकारी की तो पता चला कि सर्वर की समस्या की वजह से पर्चे नहीं बन पा रहे हैं। इसके चलते वह वापस लौट गए। अब मंगलवार को दोबारा मेडिकल कॉलेज आएंगे।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता ने बताया कि कॉलेज में मरीजों का एबीडीएम पंजीकरण शुरू किया गया है। सोमवार को सर्वर की समस्या की वजह से पर्चे बनाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। सीएमएस डॉ. उमेश शर्मा को मौके पर भेजकर मैनुअल पर्चे बनवाना शुरू करने के साथ मरीजों को राहत दिलाने के लिए तय समय से एक घंटे अधिक तीन बजे तक ओपीडी का संचालन किया गया है।
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छह माह में पूर्ण रूप से पेपरलेस होगी ओपीडी
प्राचार्य डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता ने बताया कि पेपर पर पर्चा बनाने से लेकर परामर्श देने की प्रक्रिया में अधिकांश मरीज अपनी फाइल खो देते हैं। इससे उनका फॉलोअप करने में डॉक्टर को परेशानी का सामना करने के साथ मरीज को त्वरित उपचार देने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। मरीज की बीमारी व उसको दिए गए इलाज की पूरी जानकारी डिजिटली सुरक्षित करने के लिए मेडिकल कॉलेज में एबीडीएम पोर्टल का संचालन किया गया है। इसके लिए कार्यदायी संस्था डाटामैन की ओर से कॉलेज को तीन माह तक निशुल्क सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाया गया है। प्रारंभिक तौर पर पंजीकरण को डिजिटल करने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद ओपीडी में डॉक्टर की ओर से ई-परामर्श की सुविधा शुरू करवाई जाएगी। इसमें करीब छह माह का समय लग जाएगा। ओपीडी पूर्ण रूप से डिजिटल हो जाने के बाद पैथोलॉजी को एबीडीएम पोर्टल से लिंक की जाएगी। मरीज अपना डिजिटल पर्चा बनवाने के लिए अपना आधार कार्ड व उससे लिंक मोबाइल नंबर साथ लेकर आएं।
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एबीडीएम के प्रमुख फायदे
मरीज की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
मरीज की सहमति से स्वास्थ्य रिकॉर्ड को एक डिजिटल पहचान से जोड़ा जा सकता है।
जांच रिपोर्ट, पर्चे और उपचार संबंधी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध कराना आसान होता है।
उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड को जरूरत पड़ने पर दूसरे स्वास्थ्य संस्थान में साझा किया जा सकता है।
कागजी पर्चे और रिकॉर्ड पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है।
अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध रिकॉर्ड को एक साथ देखने की सुविधा मिल सकती है।