फर्जी दस्तावेजों के जरिये पासपोर्ट बनाने का खेल: सीबीआई और विदेश मंत्रालय की विजिलेंस सक्रिय, कई अफसर रडार पर
कानपुर में फर्जी दस्तावेजों पर पासपोर्ट बनवाने के मामले में विभाग के जिस पासपोर्ट अफसर व कर्मचारियों का नाम सामने आया हैं, उनकी कुंडली खंगाली जा रही है।
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फर्जी दस्तावेजों पर पासपोर्ट बनवाने के खेल में अब सीबीआई और विदेश मंत्रालय की विजिलेंस की इंट्री हो गई है। विभाग के जिस पासपोर्ट अफसर व कर्मचारियों का नाम सामने आया हैं, उनकी कुंडली खंगाली जा रही है। कुछ दिन पहले दोनों टीमों ने लखनऊ कार्यालय पहुंचकर जानकारी जुटाई थी।
कई दस्तावेज भी जब्त करके ले गए थे। भविष्य में इसमें बड़ी कार्रवाई हो सकती है। कर्नलगंज पुलिस ने इसी साल जनवरी में बाबूपुरवा निवासी वसीम अली को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। खुलासा किया था कि वसीम व उसका गिरोह फर्जी दस्तावेज तैयार करता है। उसी आधार पर असली पासपोर्ट बनवाते हैं।
मामले में वाराणसी से विपिन गुप्ता व शहर के विवादित बिल्डर आसिफ मनाजिर के भाई दानिश को भी जेल भेजा था। जांच में सामने आया था कि कानपुर पासपोर्ट सेवा केंद्र पर तैनात रहे पासपोर्ट अफसर शैलेंद्र सिन्हा व कर्मचारी प्रताप सिंह, सुधीर तिवारी, आनंद व अर्शी त्रिवेदी की भी भूमिका है। इन सभी को आरोपी बनाया गया था।
केस की जांच जारी है। सूत्रों के मुताबिक मामले में सीबीआई व विजिलेंस टीम सक्रिय हो गई है। इन सभी आरोपियों का ब्योरा जुटा रही है। कई अहम दस्तावेज लखनऊ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय से जुटाए हैं। इसके अलावा भी कई और अधिकारी रडार पर हैं। वर्तमान में शैलेंद्र चंडीगढ़ पासपोर्ट सेवा केंद्र में तैनात है।
विवेचना ठप, इंस्पेक्टर के खिलाफ जांच भी सुस्त
केस की विवेचना तत्कालीन कर्नलगंज एसीपी त्रिपुरारी पांडेय कर रहे थे। जब से उनका तबादला हो गया है तब से विवेचना ठप पड़ी है। वहीं मामले में सामने आया था कि तत्कालीन कर्नलगंज इंस्पेक्टर बलराम मिश्रा ने दो तीन लोगों को थाने से छोड़ा था। इस प्रकरण की जांच एसीपी सीसामऊ निशंक शर्मा कर रहे हैं। हालांकि इंस्पेक्टर को बचाने के प्रयास जारी है। इस वजह से जांच बहुत धीमी चल रही है।