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पब्लिक बोली, ‘पहले सुरक्षा फिर सुविधा मिले’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 02 Feb 2017 01:53 AM IST
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बजट पर लोगों की प्रतिक्रियायें
- फोटो : अमर उजाला
आम बजट में रेलवे को मिले बजट जिन यात्री सुविधाओं का प्रावधान किया है। इस पर यात्रियों ने खुशी तो जताई लेकिन पहले उन्होंने सुरक्षा पर जोर देने की अपील की है। एक लाख करोड़ रुपये के सेफ्टी फंड के प्रावधान पर यात्रियों ने संतुष्टि जताई है। ये हैं कानपुर के कुछ लोगों की प्रतिक्रियाएं...
इंजीनियर प्रमोद सराफ ने कहा कि - ‘रेलवे सुरक्षा पर ध्यान दे। आए दिन पटरियां चटकने, डिरेलमेंट होने को जड़ से दूर करने की टेक्नोलॉजी विकसित करे। ऐसी व्यवस्था हो कि दो स्टेशनों के बीच अगर कहीं पटरी टूटी या चटकी हो तो सिग्नल रेड हो और स्टेशन पर पटरी की लोकेशन भी पता चले।’
अमिता ने कहा कि ‘ऑनलाइन टिकटों पर सरचार्ज खत्म करना अच्छा कदम है। इससे कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा। सरचार्ज खत्म होने से आनलाइन यात्री किराया सस्ता होगा। गरीब यात्रियों को ध्यान में रखते हुए भी किराया कम करना चाहिए और यात्री सुरक्षा सबसे जरूरी है।’
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बैंक अफसर हिमांशु चौबे ने कहा कि ‘सुविधाओं पर ध्यान देना जरूरी है। आम बजट के साथ रेलवे बजट पेश होना सही है। पहले नेता अपने अपने इलाकों में ट्रेन चलाने की सिफारिश करते थे। अब बजट से रेलवे यह तय करेगा कि किस ट्रैक पर लोड के हिसाब से ट्रेन चलाएं।’
गृहणी शिल्पा ने कहा कि ‘ट्रेनों की लेटलतीफी खत्म करने के लिए रेलवे को ध्यान देना चाहिए। घंटों से लोग ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं। यह व्यवस्था हो कि अगर किसी की ट्रेन लेट हो तो उसके पास मैसेज आ जाए। कभी कभी इंटरनेट दगा दे जाता है।’
डीजी गर्ल्स डिग्री कॉलेज प्रवक्ता डॉ. हिना अफशां ने कहा कि ‘नोटबंदी के बाद परेशान हुई जनता को बजट से राहत तो नहीं मिली बल्कि धमकी जैसा जरूर मिला। 18 लाख लोगों की पहचान कर ली है और कार्रवाई करेंगे। जो गलत हैं, उन पर कार्रवाई करें, जिन गरीबों के पास अभी एक हजार और दो तीन पांच सौ की नोटें हैं, वह उन्हें बदल सकते हैं। ऐसा कुछ भी कहना चाहिए था। मध्यम वर्गीय परिवार के लिए बजट में तारीफ करने जैसा कुछ नहीं है।’
एटक ने बजट को बताया शर्मनाक
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने आम बजट में असंगठित क्षेत्र के बेरोजगार श्रमिकों के लिए कोई व्यवस्था न मिलने पर इसे शर्मनाक बताया है। एटक के सचिव असित कुमार सिंह ने कहा कि नोटबंदी के कारण असंगठित क्षेत्र के करीब 40 फीसदी मजदूर बेरोजगार हो गए। इस क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों पर सरकार की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया है। बजट में सिर्फ पूंजीपतियों को ही प्रोत्साहित किया गया है। कर्मचारी भविष्य निधि के पेंशनरों को बजट से उनकी पेंशन राशि बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया।
भारतीय मजदूर संघ ने भी बजट को निराश करने वाला बताया। संघ के राष्ट्रीय मंत्री सुखदेव प्रसाद मिश्र ने कहा कि बजट में कर्मचारी भविष्य निधि व कर्मचारी राज्य बीमा को अनिवार्य के स्थान पर ऐच्छिक किए जाने का प्रस्ताव दोनों ही कानूनों की मूल भावनाओं के विपरीत है। बेहतर होता कि सरकार मिडडे मील, आशा, शिक्षामित्र आदि योजना कर्मचारियों को इस योजना से जोड़ती। नोटबंदी के बाद बेरोजगार हो गए लोगों को राहत की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
रीयल एस्टेट को राहत नहीं
द कंफरडेशन ऑफ रीयल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) यूपी के वाइस प्रेसीडेंट ललित खन्ना ने कहा कि इस बजट से रीयल एस्टेट सेक्टर को राहत की उम्मीद थी, लेकिन कुछ खास नहीं मिला है। इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बढ़ाने से इंडस्ट्री सेक्टर को होने वाले फायदे का कुछ लाभ रीयल एस्टेट सेक्टर को भी मिलेगा। कैपिटल गेन की समयसीमा को तीन साल से घटाकर दो साल करने के साथ ही पुरानी प्रापर्टी की बिक्री पर भी टैक्स लगा दिया गया है। इन फैसलों से भी सेक्टर को झटका लगा है।
बजट से स्वास्थ्य महकमा निराशा
आम बजट से स्वास्थ्य महकमा निराश है। केंद्र सरकार ने न तो सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, आपदा कौशल प्रबंधन केंद्र के लिए बजट में प्रावधान किया और न ही स्मार्ट सिटी के लिए धन का बंदोबस्त। इससे चालू वित्तीय वर्ष में इन योजनाओं की शुरू का सपना टूट गया है।
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत चार महीने पहले जीएसवीएम मेडिकल कालेज में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाने का ऐलान हुआ। स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम ने यहां निरीक्षण कर हैलट में जीटी रोड की तरफ स्थित बंगलों को तोड़कर उनके स्थान पर 10 हजार वर्ग मीटर जमीन पर इसके निर्माण के लिए भी मुहर लगा दी। इसी तरह रेल हादसों के बाद यहां आपदा प्रबंधन कौशल केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव पर केंद्र ने मुहर लगाई।
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इंजीनियर प्रमोद सराफ ने कहा कि - ‘रेलवे सुरक्षा पर ध्यान दे। आए दिन पटरियां चटकने, डिरेलमेंट होने को जड़ से दूर करने की टेक्नोलॉजी विकसित करे। ऐसी व्यवस्था हो कि दो स्टेशनों के बीच अगर कहीं पटरी टूटी या चटकी हो तो सिग्नल रेड हो और स्टेशन पर पटरी की लोकेशन भी पता चले।’
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अमिता ने कहा कि ‘ऑनलाइन टिकटों पर सरचार्ज खत्म करना अच्छा कदम है। इससे कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा। सरचार्ज खत्म होने से आनलाइन यात्री किराया सस्ता होगा। गरीब यात्रियों को ध्यान में रखते हुए भी किराया कम करना चाहिए और यात्री सुरक्षा सबसे जरूरी है।’
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बैंक अफसर हिमांशु चौबे ने कहा कि ‘सुविधाओं पर ध्यान देना जरूरी है। आम बजट के साथ रेलवे बजट पेश होना सही है। पहले नेता अपने अपने इलाकों में ट्रेन चलाने की सिफारिश करते थे। अब बजट से रेलवे यह तय करेगा कि किस ट्रैक पर लोड के हिसाब से ट्रेन चलाएं।’
गृहणी शिल्पा ने कहा कि ‘ट्रेनों की लेटलतीफी खत्म करने के लिए रेलवे को ध्यान देना चाहिए। घंटों से लोग ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं। यह व्यवस्था हो कि अगर किसी की ट्रेन लेट हो तो उसके पास मैसेज आ जाए। कभी कभी इंटरनेट दगा दे जाता है।’
डीजी गर्ल्स डिग्री कॉलेज प्रवक्ता डॉ. हिना अफशां ने कहा कि ‘नोटबंदी के बाद परेशान हुई जनता को बजट से राहत तो नहीं मिली बल्कि धमकी जैसा जरूर मिला। 18 लाख लोगों की पहचान कर ली है और कार्रवाई करेंगे। जो गलत हैं, उन पर कार्रवाई करें, जिन गरीबों के पास अभी एक हजार और दो तीन पांच सौ की नोटें हैं, वह उन्हें बदल सकते हैं। ऐसा कुछ भी कहना चाहिए था। मध्यम वर्गीय परिवार के लिए बजट में तारीफ करने जैसा कुछ नहीं है।’
एटक ने बजट को बताया शर्मनाक
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने आम बजट में असंगठित क्षेत्र के बेरोजगार श्रमिकों के लिए कोई व्यवस्था न मिलने पर इसे शर्मनाक बताया है। एटक के सचिव असित कुमार सिंह ने कहा कि नोटबंदी के कारण असंगठित क्षेत्र के करीब 40 फीसदी मजदूर बेरोजगार हो गए। इस क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों पर सरकार की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया है। बजट में सिर्फ पूंजीपतियों को ही प्रोत्साहित किया गया है। कर्मचारी भविष्य निधि के पेंशनरों को बजट से उनकी पेंशन राशि बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया।
भारतीय मजदूर संघ ने भी बजट को निराश करने वाला बताया। संघ के राष्ट्रीय मंत्री सुखदेव प्रसाद मिश्र ने कहा कि बजट में कर्मचारी भविष्य निधि व कर्मचारी राज्य बीमा को अनिवार्य के स्थान पर ऐच्छिक किए जाने का प्रस्ताव दोनों ही कानूनों की मूल भावनाओं के विपरीत है। बेहतर होता कि सरकार मिडडे मील, आशा, शिक्षामित्र आदि योजना कर्मचारियों को इस योजना से जोड़ती। नोटबंदी के बाद बेरोजगार हो गए लोगों को राहत की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
रीयल एस्टेट को राहत नहीं
द कंफरडेशन ऑफ रीयल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) यूपी के वाइस प्रेसीडेंट ललित खन्ना ने कहा कि इस बजट से रीयल एस्टेट सेक्टर को राहत की उम्मीद थी, लेकिन कुछ खास नहीं मिला है। इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बढ़ाने से इंडस्ट्री सेक्टर को होने वाले फायदे का कुछ लाभ रीयल एस्टेट सेक्टर को भी मिलेगा। कैपिटल गेन की समयसीमा को तीन साल से घटाकर दो साल करने के साथ ही पुरानी प्रापर्टी की बिक्री पर भी टैक्स लगा दिया गया है। इन फैसलों से भी सेक्टर को झटका लगा है।
बजट से स्वास्थ्य महकमा निराशा
आम बजट से स्वास्थ्य महकमा निराश है। केंद्र सरकार ने न तो सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, आपदा कौशल प्रबंधन केंद्र के लिए बजट में प्रावधान किया और न ही स्मार्ट सिटी के लिए धन का बंदोबस्त। इससे चालू वित्तीय वर्ष में इन योजनाओं की शुरू का सपना टूट गया है।
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत चार महीने पहले जीएसवीएम मेडिकल कालेज में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाने का ऐलान हुआ। स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम ने यहां निरीक्षण कर हैलट में जीटी रोड की तरफ स्थित बंगलों को तोड़कर उनके स्थान पर 10 हजार वर्ग मीटर जमीन पर इसके निर्माण के लिए भी मुहर लगा दी। इसी तरह रेल हादसों के बाद यहां आपदा प्रबंधन कौशल केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव पर केंद्र ने मुहर लगाई।